
लुधियाना में बड़ा इमीग्रेशन घोटाला: एएसआई के बेटे समेत दो युवकों से 40 लाख की ठगी, महिला एजेंट सहित दो गिरफ्तार
पंजाब के लुधियाना जिले में विदेश भेजने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया भेजने का झांसा देकर करीब 40 लाख रुपये हड़पने के आरोप में दो ट्रैवल एजेंटों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि एक अन्य एजेंट की तलाश जारी है। मामले ने इमीग्रेशन कारोबार में चल रहे कथित फर्जीवाड़े पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

थाना सुधार की पुलिस ने सुधार बाजार स्थित ‘सेफ कंसल्टेंट्स इमीग्रेशन’ के संचालक लखवीर सिंह सिद्धू निवासी मुल्लांपुर दाखा और उसकी पार्टनर रीना रानी निवासी अब्बूवाल रोड को गिरफ्तार किया है। दोनों को अदालत में पेश कर दो दिन के पुलिस रिमांड पर लिया गया है। पुलिस का कहना है कि पूछताछ में कई और खुलासे होने की संभावना है।
एएसआई के बेटे को पेपर मैरिज के जरिये भेजा गया इंग्लैंड
पहला मामला थाना सुधार में तैनात एएसआई मनोहर लाल के बेटे चानणप्रीत सिंह से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, मनोहर लाल ने अपने बेटे को विदेश भेजने के उद्देश्य से एजेंटों से संपर्क किया था। एजेंटों ने कथित तौर पर उन्हें बताया कि लुधियाना के गांव चमिंडा की किरनजीत कौर को इंग्लैंड की एक यूनिवर्सिटी से ऑफर लेटर मिला है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि चानणप्रीत की किरनजीत से “पेपर मैरिज” करवा दी जाए, तो उसे आसानी से इंग्लैंड भेजा जा सकता है।
एजेंटों ने यूनिवर्सिटी फीस, वीजा, टिकट और अन्य खर्चों सहित 33 लाख रुपये में पूरा काम कराने का भरोसा दिया। परिवार ने अलग-अलग तारीखों में पूरी राशि अदा कर दी। इसके बाद चानणप्रीत को 7 नवंबर 2025 को इंग्लैंड भेज दिया गया।
लेकिन वहां पहुंचते ही सच्चाई सामने आने लगी। चानणप्रीत को पता चला कि यूनिवर्सिटी की फीस जमा ही नहीं करवाई गई थी। उसकी कथित पत्नी किरनजीत कौर ने भी बताया कि फीस पेंडिंग है और एम्बेसी से संबंधित ईमेल आ चुके हैं। 13 नवंबर 2025 को होशियारपुर के एजेंट महेश कुमार वर्मा ने भी इंग्लैंड में फोन कर दावा किया कि उसके माध्यम से फाइल लगाई गई थी, लेकिन उसे 9 लाख रुपये नहीं दिए गए।
स्थिति तब और गंभीर हो गई जब 16 दिसंबर 2025 को इंग्लैंड एम्बेसी ने वीजा रद्द कर दिया और यूनिवर्सिटी ने भी नामांकन समाप्त कर दिया। 5 जनवरी को भारत लौटने का ईमेल जारी कर दिया गया। इस घटनाक्रम से परिवार को भारी आर्थिक और मानसिक आघात पहुंचा।
33 लाख की रकम बांटने का आरोप
मनोहर लाल के अनुसार, कुल 33 लाख रुपये में से 15 लाख महेश कुमार वर्मा और 18 लाख लखवीर सिंह सिद्धू व रीना रानी ने कथित रूप से आपस में बांट लिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जिस बीबीए डिग्री के आधार पर किरनजीत कौर का वीजा लगाया गया, वह फर्जी है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि किरनजीत और उसकी मां भी एजेंटों के साथ मिली हुई हो सकती हैं। पुलिस इन आरोपों की भी जांच कर रही है।
मोगा निवासी से भी ठगी
दूसरा मामला मोगा जिले के गांव लाधायिका निवासी मनविंदर सिंह से संबंधित है। मनविंदर और उनकी पत्नी किरनदीप कौर उच्च शिक्षित हैं और विदेश में बसना चाहते थे। जुलाई 2024 में लखवीर सिंह और रीना रानी ने उन्हें वर्क परमिट पर इंग्लैंड भेजने का आश्वासन दिया। 35 लाख रुपये में कॉन्ट्रैक्ट तय हुआ और एडवांस के रूप में 6 लाख 50 हजार रुपये ले लिए गए।
मनविंदर सिंह का आरोप है कि एजेंटों ने सिक्योरिटी के नाम पर तीन खाली चेकों पर हस्ताक्षर भी करवा लिए। इसके बाद महीनों तक उन्हें टालमटोल किया जाता रहा और विदेश भेजने की कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। जब उन्होंने पैसे वापस मांगे, तो कथित तौर पर धमकियां दी गईं।
मनविंदर सिंह ने 24 नवंबर 2025 को लुधियाना ग्रामीण के एसएसपी डॉ. अंकुर गुप्ता को लिखित शिकायत दी। इसके बाद जांच शुरू हुई और दोनों मामलों में एफआईआर दर्ज की गई।
तीसरे आरोपी की तलाश जारी
थाना सुधार के प्रभारी इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह ने बताया कि लखवीर सिंह सिद्धू और रीना रानी के अलावा महेश कुमार वर्मा के खिलाफ भी केस दर्ज है। उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस का कहना है कि एजेंटों के बैंक खातों, दस्तावेजों और इमीग्रेशन फाइलों की जांच की जा रही है।
इंस्पेक्टर गुरदीप सिंह के अनुसार, सुधार बाजार स्थित एजेंसी के बाहर पहले भी कई लोगों द्वारा प्रदर्शन किए जाने की सूचना मिली है। आशंका है कि ठगी का शिकार हुए अन्य लोग भी सामने आ सकते हैं। पुलिस ने अपील की है कि यदि किसी के साथ ऐसी धोखाधड़ी हुई है, तो वह आगे आकर शिकायत दर्ज कराए।
इमीग्रेशन कारोबार पर सवाल
यह मामला एक बार फिर पंजाब में इमीग्रेशन कारोबार की पारदर्शिता पर सवाल खड़ा करता है। विदेश जाने की चाहत रखने वाले युवाओं और उनके परिवारों को बड़े-बड़े सपने दिखाकर लाखों रुपये ऐंठ लेने की घटनाएं समय-समय पर सामने आती रही हैं। पेपर मैरिज, फर्जी डिग्री, अधूरी फीस और झूठे वीजा वादों के जरिये लोगों को जाल में फंसाया जाता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि विदेश जाने से पहले संबंधित एजेंसी की वैधता, लाइसेंस, पिछले रिकॉर्ड और दस्तावेजों की स्वतंत्र जांच जरूरी है। साथ ही किसी भी तरह की “पेपर मैरिज” या शॉर्टकट के नाम पर दिए जाने वाले प्रस्तावों से सावधान रहना चाहिए।
आगे की कार्रवाई
फिलहाल लखवीर सिंह सिद्धू और रीना रानी पुलिस रिमांड पर हैं और उनसे पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल है, कितने लोगों से रकम वसूली गई और कितनी राशि बरामद की जा सकती है।
पीड़ित परिवारों को उम्मीद है कि जांच निष्पक्ष तरीके से पूरी होगी और दोषियों को कानून के तहत सख्त सजा मिलेगी। यह मामला उन परिवारों के लिए भी चेतावनी है जो बिना पर्याप्त जांच-पड़ताल के विदेश भेजने वाले एजेंटों पर भरोसा कर लेते हैं।
लुधियाना का यह कथित इमीग्रेशन घोटाला न केवल आर्थिक धोखाधड़ी का मामला है, बल्कि यह उन युवाओं के सपनों के साथ खिलवाड़ भी है जो बेहतर भविष्य की तलाश में विदेश जाने का सपना देखते हैं। अब सभी की नजर पुलिस जांच और आगे की कानूनी कार्रवाई पर टिकी हुई है।


