
राज्यसभा चुनाव से पहले कांग्रेस सतर्क, 31 विधायक शिमला शिफ्ट
हरियाणा में 16 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। क्रॉस वोटिंग और विधायकों की खरीद-फरोख्त की आशंका को देखते हुए कांग्रेस ने अपने 31 विधायकों को हिमाचल प्रदेश के शिमला भेज दिया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनाव से पहले किसी भी तरह की राजनीतिक टूट-फूट से बचने के लिए विधायकों को एक साथ सुरक्षित स्थान पर रखना जरूरी है। इसी रणनीति के तहत उन्हें शिमला के पास कुफरी क्षेत्र के होटलों में ठहराया गया है।

दरअसल, शुक्रवार को चंडीगढ़ में कांग्रेस विधायक दल की अहम बैठक आयोजित की गई थी। यह बैठक पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा के आवास पर हुई। बैठक में पार्टी के सभी 37 विधायक मौजूद रहे। राज्यसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया कि अधिकांश विधायकों को हिमाचल प्रदेश भेज दिया जाए, ताकि चुनाव तक पार्टी के सभी विधायक एकजुट रहें और किसी तरह की क्रॉस वोटिंग की संभावना कम हो सके।
बैठक के बाद सभी विधायकों ने हुड्डा के घर पर लंच किया। इसके बाद कुल 31 विधायक तीन लग्जरी मिनी बसों में सवार होकर हिमाचल प्रदेश के लिए रवाना हो गए। उनके साथ हरियाणा कांग्रेस के प्रभारी बीके हरिप्रसाद और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह भी शिमला पहुंचे। इसके अलावा रोहतक से सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा, सोनीपत के सांसद सतपाल ब्रह्मचारी और अंबाला के सांसद वरुण चौधरी भी इस दौरे में साथ रहे।
कांग्रेस के ये सभी विधायक शिमला शहर से करीब 22 किलोमीटर दूर कुफरी के पास गलू क्षेत्र में स्थित एक होटल में ठहरेंगे। यहां उनके लिए पहले से कमरे बुक किए गए थे। इसके अलावा कुछ विधायकों के लिए कुफरी के ही दूसरे होटल में भी व्यवस्था की गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन विधायकों को 16 मार्च तक यहीं रखा जाएगा और उसी दिन मतदान के लिए उन्हें वापस चंडीगढ़ लाया जाएगा।
शिमला पहुंचने के बाद कांग्रेस विधायकों को मतदान प्रक्रिया की ट्रेनिंग भी दी जाएगी। इसके लिए विशेष रूप से बैलेट बॉक्स भी साथ ले जाया गया है। पार्टी चाहती है कि चुनाव के दौरान कोई तकनीकी गलती न हो, क्योंकि पिछली बार ऐसी ही गलतियों के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था।
हालांकि कांग्रेस विधायक दल की बैठक में 37 विधायक मौजूद थे, लेकिन सभी विधायक शिमला नहीं गए। कुल 31 विधायक ही बसों के जरिए हिमाचल प्रदेश रवाना हुए। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा समेत छह विधायक अभी चंडीगढ़ में ही रुके हुए हैं। इनमें कुलदीप वत्स, विनेश फोगाट, चंद्रमोहन बिश्नोई, मोहम्मद इलियास और टोहाना से विधायक परमवीर सिंह शामिल हैं।
पार्टी नेताओं के मुताबिक, जो विधायक शुक्रवार को हिमाचल नहीं जा सके हैं, उनमें से कुछ शनिवार शाम तक शिमला पहुंच सकते हैं। वहीं, कुलदीप वत्स पारिवारिक शादी समारोह में व्यस्त होने के कारण नहीं जा पाए, जबकि मोहम्मद इलियास बीमारी की वजह से इस दौरे में शामिल नहीं हो सके।
राज्यसभा चुनाव को लेकर हरियाणा की राजनीति में इस समय काफी दिलचस्प समीकरण बन रहे हैं। 90 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा के पास 48 विधायक हैं और उसे तीन अन्य विधायकों का समर्थन भी प्राप्त है। दूसरी ओर कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं। इस गणित के आधार पर दोनों दलों को एक-एक सीट मिलने की संभावना मानी जा रही है, लेकिन पिछले चुनावों के अनुभव को देखते हुए कांग्रेस किसी भी तरह का जोखिम लेने के मूड में नहीं है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि अगर कांग्रेस के कुछ विधायकों ने क्रॉस वोटिंग कर दी और इनेलो के दो विधायकों का समर्थन भाजपा समर्थित उम्मीदवार को मिल गया, तो मुकाबला पलट सकता है। यही वजह है कि कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने की पूरी कोशिश कर रही है।
भाजपा की ओर से राज्यसभा चुनाव में संजय भाटिया की जीत लगभग तय मानी जा रही है। वहीं दूसरी सीट के लिए कांग्रेस के उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के बीच मुकाबला दिलचस्प हो गया है। राजनीतिक गलियारों में इसी सीट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है।
हरियाणा में राज्यसभा चुनाव के दौरान पहले भी कई बार बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिल चुका है। वर्ष 2016 का चर्चित “स्याही कांड” आज भी लोगों को याद है। उस चुनाव में कांग्रेस के 14 विधायकों के वोट रद्द हो गए थे, जिसके चलते भाजपा समर्थित उम्मीदवार सुभाष चंद्रा राज्यसभा पहुंच गए थे।
इसके बाद 2022 के राज्यसभा चुनाव में भी कांग्रेस को बड़ा झटका लगा था। उस समय भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार कार्तिकेय शर्मा ने कांग्रेस के अजय माकन को हराया था। उस चुनाव में भी कांग्रेस के कुछ विधायकों की क्रॉस वोटिंग की चर्चा सामने आई थी। यही वजह है कि इस बार पार्टी पहले से ज्यादा सतर्क नजर आ रही है।
जब कांग्रेस विधायकों की बसें हरियाणा से हिमाचल प्रदेश की सीमा में दाखिल हुईं, तो वहां हिमाचल प्रदेश पुलिस ने उन्हें सुरक्षा मुहैया कराई। जानकारी के अनुसार, पुलिस की तीन गाड़ियां बसों के आगे और पीछे चल रही थीं और पूरे रास्ते उन्हें एस्कॉर्ट किया गया। हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से भी कांग्रेस विधायकों के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं, ताकि उनके ठहरने और सुरक्षा में किसी तरह की परेशानी न हो।
कुल मिलाकर राज्यसभा चुनाव से पहले हरियाणा की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। कांग्रेस अपने विधायकों को एकजुट रखने के लिए हर संभव कदम उठा रही है, जबकि भाजपा भी अपनी रणनीति बनाने में जुटी हुई है। अब सबकी नजरें 16 मार्च को होने वाले मतदान पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि राज्यसभा की दोनों सीटों पर किस पार्टी का कब्जा होगा।

