रफ्तार का कहर: अंबाला में दो हादसों ने छीनी एक जिंदगी, बुजुर्ग दंपती को दी दर्दनाक चोटें
हरियाणा के अंबाला और उसके आसपास के इलाकों में हाल ही में हुए दो अलग-अलग सड़क हादसों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि तेज रफ्तार और लापरवाही किस तरह पल भर में जिंदगी को तबाह कर सकती है। एक ओर जहां नारायणगढ़ क्षेत्र में एक युवक की ट्रक की चपेट में आकर मौके पर ही मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर अंबाला कैंट में एक बुजुर्ग दंपती कार की टक्कर से गंभीर रूप से घायल हो गए। इन दोनों घटनाओं ने न केवल परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है, बल्कि पूरे इलाके में चिंता और गुस्से का माहौल भी पैदा कर दिया है।

पहली घटना नारायणगढ़ के लौटों गांव के पास बने पुल की है, जहां मंगलवार शाम को एक तेज रफ्तार ट्रक ने बाइक सवार युवक को अपनी चपेट में ले लिया। मृतक की पहचान यमुनानगर जिले के अली शेरपुर निवासी प्रवीण कुमार के रूप में हुई है। बताया जा रहा है कि हादसा इतना भयानक था कि टक्कर के बाद ट्रक सीधे प्रवीण के ऊपर से गुजर गया, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
प्रवीण कुमार कालाआम्ब स्थित एक निजी कंपनी में सिक्योरिटी गार्ड के तौर पर कार्यरत था। वह रोजाना की तरह अपनी ड्यूटी खत्म कर घर लौट रहा था। उसके साथ उसका चचेरा भाई चरण सिंह भी मौजूद था, जो उसी दिन उससे मिलने कालाआम्ब आया था। दोनों अपनी-अपनी बाइक पर सवार होकर नारायणगढ़ की ओर जा रहे थे।
चरण सिंह के मुताबिक, जब वे लौटों गांव के पुल के पास पहुंचे, तभी पीछे से तेज रफ्तार में आ रहे ट्रक ने अचानक प्रवीण की बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि प्रवीण सड़क पर गिर गया और ट्रक चालक वाहन को नियंत्रित नहीं कर सका। नतीजतन ट्रक उसके ऊपर से गुजर गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हादसे के बाद ट्रक चालक मौके से फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने घटना की सूचना पुलिस को दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है।
प्रवीण की मौत की खबर जैसे ही उसके परिवार तक पहुंची, घर में मातम छा गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। बताया जा रहा है कि प्रवीण परिवार का इकलौता कमाने वाला था और उसकी मौत से परिवार आर्थिक और भावनात्मक दोनों रूप से टूट गया है।
वहीं दूसरी घटना अंबाला कैंट के एसडी कॉलेज के पास हुई, जहां एक तेज रफ्तार कार ने एक्टिवा सवार बुजुर्ग दंपती को टक्कर मार दी। इस हादसे में 79 वर्षीय हरभजन सिंह और उनकी पत्नी कुलदीप कौर गंभीर रूप से घायल हो गए।
हरभजन सिंह भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त कर्मचारी हैं और वर्तमान में वशिष्ठ नगर में रहते हैं। उन्होंने बताया कि 30 मार्च की सुबह करीब 8 बजे वह अपनी पत्नी के साथ एक्टिवा पर सवार होकर ईसीएचएस अस्पताल जा रहे थे, जहां उन्हें नियमित दवाइयां लेनी थीं।
जैसे ही वे एसडी कॉलेज के सामने कट से मुड़ने लगे, तभी तेज रफ्तार से आ रही कार ने उनकी एक्टिवा को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि दोनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। कुलदीप कौर के सिर में गहरी चोटें आई हैं और उनके दोनों पैरों में फ्रैक्चर बताया जा रहा है। हरभजन सिंह को भी चोटें आई हैं।
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने मानवता दिखाते हुए दोनों को अस्पताल पहुंचाया, जहां उनका इलाज चल रहा है। पुलिस ने मामले में कार चालक के खिलाफ केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
इन दोनों घटनाओं ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कब तक सड़क हादसों में लोग अपनी जान गंवाते रहेंगे? तेज रफ्तार, लापरवाही और ट्रैफिक नियमों की अनदेखी आज भी बड़ी संख्या में हादसों का कारण बन रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि लौटों गांव के पुल के पास पहले भी कई बार हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। लोगों की मांग है कि वहां स्पीड ब्रेकर लगाए जाएं और ट्रैफिक पुलिस की निगरानी बढ़ाई जाए ताकि ऐसे हादसों को रोका जा सके।
इसी तरह, अंबाला कैंट के एसडी कॉलेज के पास भी ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कई शिकायतें सामने आती रही हैं। यहां अक्सर तेज रफ्तार वाहन चलते हैं और कट के पास दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि वहां ट्रैफिक नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क सुरक्षा को लेकर केवल सरकार या प्रशासन को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। आम लोगों को भी अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी। वाहन चलाते समय गति सीमा का पालन करना, हेलमेट और सीट बेल्ट का उपयोग करना, और ट्रैफिक नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है।
इन हादसों ने यह भी दिखाया कि आपात स्थिति में लोगों की मदद करना कितना जरूरी है। दोनों मामलों में स्थानीय लोगों ने घायलों की तुरंत मदद की, जिससे उनकी जान बचाने में मदद मिली।
फिलहाल पुलिस दोनों मामलों की जांच कर रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दे रही है। लेकिन इन घटनाओं ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर कब तक लापरवाही की कीमत निर्दोष लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी।
प्रवीण कुमार की असमय मौत और बुजुर्ग दंपती की गंभीर हालत यह बताने के लिए काफी है कि सड़क पर एक छोटी सी गलती भी कितनी बड़ी त्रासदी बन सकती है। जरूरत है कि हर व्यक्ति जागरूक बने और सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता दे।
जब तक हम सभी मिलकर इस दिशा में प्रयास नहीं करेंगे, तब तक ऐसे हादसे रुकने वाले नहीं हैं। यह समय है कि हम सबक लें और जिम्मेदारी के साथ वाहन चलाएं, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को इस तरह का दर्द न सहना पड़े।

