
यूपी में बदला मौसम का मिजाज: लखनऊ समेत अवध में झमाझम बारिश, गर्मी से राहत के बीच आगे फिर बढ़ेगी तपिश
उत्तर प्रदेश में मौसम ने अचानक करवट लेकर लोगों को चौंका दिया है। जहां बीते कुछ दिनों से तेज धूप और बढ़ती गर्मी ने लोगों का हाल बेहाल कर रखा था, वहीं अब अचानक हुई बारिश ने माहौल को पूरी तरह बदल दिया है। राजधानी लखनऊ और उसके आसपास के जिलों में देर रात से शुरू हुई बूंदाबांदी बुधवार सुबह तक तेज बारिश में बदल गई, जिससे लोगों को गर्मी से काफी राहत मिली।

31 मार्च की रात से ही आसमान में बादल छाने लगे थे और हल्की बारिश शुरू हो गई थी। जैसे-जैसे रात बढ़ी, बूंदाबांदी ने तेज बारिश का रूप ले लिया। सुबह तक लखनऊ के कई इलाकों जैसे गोमती नगर, हजरतगंज, आलमबाग, अंसल और पीजीआई में लगातार रुक-रुक कर बारिश होती रही। इस दौरान ठंडी हवाओं ने भी मौसम को सुहावना बना दिया, जिससे वातावरण में ठंडक महसूस की गई।
मौसम विभाग के मुताबिक, इस बदलाव का मुख्य कारण पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता है। इसके चलते पूरे उत्तर भारत के मौसम में बदलाव देखा जा रहा है। लखनऊ में तापमान में करीब 4 से 5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। बुधवार सुबह न्यूनतम तापमान लगभग 19 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहा, जो हाल के दिनों की तुलना में काफी कम है।
मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार, यह राहत ज्यादा समय तक नहीं टिकेगी, लेकिन फिलहाल अगले 24 से 48 घंटों तक बारिश का सिलसिला जारी रह सकता है। इस दौरान गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। लोगों को सलाह दी गई है कि वे खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतें और अनावश्यक रूप से घर से बाहर न निकलें।
इसके साथ ही पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में ओलावृष्टि की चेतावनी भी जारी की गई है। हालांकि लखनऊ में ओले गिरने की संभावना कम है, लेकिन आसपास के क्षेत्रों में इसका असर देखने को मिल सकता है। खासकर किसानों के लिए यह चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि ओलावृष्टि से फसलों को नुकसान पहुंच सकता है।
हालांकि इस बारिश ने लोगों को फिलहाल राहत जरूर दी है, लेकिन मौसम विभाग का कहना है कि इस साल गर्मी ज्यादा परेशान करेगी। अप्रैल से जून के बीच तापमान सामान्य से अधिक रहने की संभावना जताई गई है। विशेष रूप से पूर्वांचल और मध्यांचल के इलाकों में गर्मी का असर अधिक देखने को मिल सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, इस साल लू के दिनों की संख्या भी बढ़ सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में लोगों को अधिक गर्म हवाओं और लंबे समय तक चलने वाली तपिश का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि अप्रैल महीने में बीच-बीच में बारिश होने की संभावना बनी रहेगी, जिससे कुछ समय के लिए राहत मिलती रहेगी।
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिकों का कहना है कि हिंद महासागर की तटस्थ स्थिति का भी इस बार के मौसम पर असर पड़ रहा है। इसके चलते प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, लेकिन इससे गर्मी के प्रभाव में ज्यादा कमी नहीं आएगी। तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा और मौसम बार-बार बदल सकता है।
मार्च महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो पहले पखवाड़े में तापमान सामान्य से अधिक रहा, जिससे लोगों को जल्दी गर्मी का अहसास होने लगा था। वहीं दूसरे पखवाड़े में पश्चिमी विक्षोभ के कारण हुई बारिश ने मौसम को संतुलित किया और कुल वर्षा सामान्य स्तर पर बनी रही।
मंगलवार को भी प्रदेश के कुछ जिलों में मौसम में बदलाव देखा गया था। सहारनपुर, मथुरा और अलीगढ़ में हल्की बूंदाबांदी दर्ज की गई थी। इस दौरान तेज हवाएं भी चलीं, जिनकी रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच गई थी। इससे मौसम में अचानक ठंडक आ गई थी।
तापमान की बात करें तो मंगलवार को बांदा सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 40.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वहीं प्रयागराज में 38.8 डिग्री और अमेठी में 38.3 डिग्री तापमान रिकॉर्ड किया गया। इससे साफ है कि प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम की स्थिति अलग-अलग बनी हुई है।
कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश में मौसम का यह अचानक बदलाव लोगों के लिए राहत लेकर आया है, लेकिन यह राहत अस्थायी है। आने वाले समय में गर्मी का प्रकोप और बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को बदलते मौसम के प्रति सतर्क रहने और अपनी दिनचर्या में आवश्यक बदलाव करने की जरूरत है, ताकि वे स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर इसके प्रभाव को कम कर सकें।



