
यूपी में आंगनबाड़ी-आशा कार्यकर्ताओं को तोहफा, मानदेय बढ़ाने का ऐलान
उत्तर प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में उस समय हलचल तेज हो गई जब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सदन में प्रदेश की आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का मानदेय बढ़ाने की घोषणा कर दी। विधान परिषद में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने यह महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार जमीनी स्तर पर काम करने वाले कर्मचारियों के हितों की अनदेखी नहीं करेगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हाल ही में निराश्रित और वृद्धावस्था पेंशन से जुड़ी घोषणाओं के बाद सरकार अब आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में वृद्धि करने जा रही है। उन्होंने माना कि ये कार्यकर्ता स्वास्थ्य और पोषण सेवाओं की रीढ़ हैं और ग्रामीण व शहरी गरीब तबके तक सरकारी योजनाओं को पहुंचाने में इनकी भूमिका बेहद अहम है। ऐसे में उनके मानदेय में बढ़ोतरी एक आवश्यक कदम है।
शिक्षामित्रों और अन्य कर्मचारियों के लिए भी राहत
सदन में अपने संबोधन के दौरान मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि सरकार केवल एक वर्ग तक सीमित नहीं है। शिक्षामित्रों, अनुदेशकों, रसोइयों और शिक्षकों के लिए भी महत्वपूर्ण फैसले लिए गए हैं। हाल ही में इन सभी को कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की घोषणा की गई है। यह योजना एक अप्रैल से लागू होगी, जिसके तहत पांच लाख रुपये तक का इलाज निःशुल्क कराया जा सकेगा।
मुख्यमंत्री ने विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार तुष्टीकरण की राजनीति नहीं बल्कि संतुष्टीकरण की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि बीते वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से ऊपर उठाने का कार्य किया गया है।
कानून-व्यवस्था पर सरकार का जोर
अपने भाषण में मुख्यमंत्री ने कानून-व्यवस्था को विकास की पहली शर्त बताया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर पुलिस भर्तियां की गईं और महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। उनका कहना था कि पहले उत्तर प्रदेश को भय और असुरक्षा के माहौल के लिए जाना जाता था, लेकिन अब स्थिति बदल चुकी है।
उन्होंने कहा कि अब बेटियां रात की शिफ्ट में भी काम कर सुरक्षित घर लौटती हैं। सरकार ने मॉडर्न पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया है। उनके अनुसार प्रदेश अब “फियर जोन” से “फेथ जोन” में परिवर्तित हो चुका है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले कर्फ्यू संस्कृति चर्चा में रहती थी, अब जीरो टॉलरेंस नीति प्रदेश की पहचान बन चुकी है। दंगों की जगह अब त्योहारों और धार्मिक पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिल रहा है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश अब उपद्रव की छवि से निकलकर उत्सव और आस्था का प्रदेश बन चुका है।
विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं के अपमान का आरोप
सदन में मुख्यमंत्री ने विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान नहीं कर रहा और समाज को बांटने का प्रयास कर रहा है।
एसआईआर प्रक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विपक्ष के कुछ कार्यकर्ता बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) के साथ दुर्व्यवहार कर रहे हैं, जो उचित नहीं है। मुख्यमंत्री के अनुसार एसआईआर में 2.88 करोड़ से अधिक लोग अनुपस्थित, मृत या स्थानांतरित पाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले इन नामों का दुरुपयोग कर फर्जी मतदान कराया जाता था।
उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की प्रक्रियाओं को पारदर्शी और आवश्यक बताया और कहा कि संविधान की शपथ लेने वालों को संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान करना चाहिए।
आर्थिक और औद्योगिक विकास पर फोकस
मुख्यमंत्री ने प्रदेश की आर्थिक प्रगति का भी विस्तृत उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश ने पर्यटन, हॉस्पिटैलिटी और डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग जैसे क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। अब प्रदेश पारंपरिक उद्योगों से आगे बढ़कर नई तकनीकों और भविष्य की अर्थव्यवस्था से जुड़े क्षेत्रों में तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश एआई, रोबोटिक्स, एडवांस्ड कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, साइबर सुरक्षा और इलेक्ट्रिक व्हीकल जैसे क्षेत्रों में एक साथ काम कर रहा है। हाल ही में लखनऊ में प्रदेश की पहली इलेक्ट्रिक व्हीकल निर्माण इकाई की स्थापना हुई है।
मुख्यमंत्री के अनुसार देश में बिकने वाले इलेक्ट्रिक वाहनों में 19 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी उत्तर प्रदेश की है, जबकि तिपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों में यह भागीदारी 40 प्रतिशत से ज्यादा है। फेम-1 और फेम-2 योजनाओं के भी प्रमुख लाभार्थियों में उत्तर प्रदेश शामिल है। प्रदेश के एक्सप्रेसवे कॉरिडोर पर चार्जिंग स्टेशनों की स्थापना और 700 से अधिक इलेक्ट्रिक बसों का संचालन इसकी पुष्टि करता है।
युवा शक्ति और स्टार्टअप का बढ़ता प्रभाव
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की नई पहचान का आधार उसकी युवा शक्ति है। स्किल इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और स्टैंडअप इंडिया जैसी योजनाओं के माध्यम से प्रदेश के युवा तेजी से आत्मनिर्भर बन रहे हैं।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में 20,000 से अधिक स्टार्टअप सक्रिय हैं। इसके अलावा सात सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और आठ यूनिकॉर्न भी प्रदेश में मौजूद हैं। यह दर्शाता है कि उत्तर प्रदेश अब नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भी अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है।
बेरोजगारी दर में गिरावट का दावा
मुख्यमंत्री ने रोजगार के मुद्दे पर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रदेश में बेरोजगारी दर 19 प्रतिशत से अधिक थी, जो अब घटकर 2.24 प्रतिशत रह गई है। उनके अनुसार जब युवा स्वावलंबी बनता है और स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ता है, तो बेरोजगारी अपने आप कम होती है।
निष्कर्ष
सदन में मुख्यमंत्री के इस विस्तृत संबोधन ने साफ कर दिया कि सरकार एक ओर जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं को राहत देने की दिशा में कदम उठा रही है, तो दूसरी ओर कानून-व्यवस्था, औद्योगिक विकास, तकनीकी प्रगति और रोजगार सृजन को लेकर भी अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही है।
आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं के मानदेय में प्रस्तावित वृद्धि को सरकार की सामाजिक क्षेत्र में एक बड़ी पहल माना जा रहा है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि यह घोषणा किस समयसीमा में लागू होती है और इसका लाभ प्रदेश की हजारों महिला कार्यकर्ताओं को किस रूप में मिलता है।



