दिल्ली

मेट्रो में सफर कर केंद्रीय मंत्री खट्टर ने परखी सुविधाएं, लास्ट माइल कनेक्टिविटी को बताया प्राथमिकता

केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री Manohar Lal Khattar अपने अलग अंदाज और जमीनी कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं। वे अक्सर योजनाओं को कागजों से निकालकर धरातल पर उतारने और आम लोगों से सीधे संवाद करने के लिए सुर्खियों में रहते हैं। इसी कड़ी में शुक्रवार को उन्होंने राजधानी Delhi में मेट्रो के जरिए सफर कर न केवल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था का जायजा लिया, बल्कि यात्रियों से बातचीत कर उनकी राय भी जानी।

केंद्रीय मंत्री सुबह अपने सरकारी आवास से निकलकर ऑटो से मेट्रो स्टेशन पहुंचे। वहां से उन्होंने आम यात्रियों के साथ मेट्रो ट्रेन में यात्रा की। इस दौरान उन्होंने यात्रियों से मेट्रो सेवाओं की गुणवत्ता, सफाई व्यवस्था, समयबद्धता और सुरक्षा जैसे पहलुओं पर चर्चा की। मंत्री ने यात्रियों से यह भी पूछा कि परिवहन व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

मंत्री खट्टर ने कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य देश के शहरों में सार्वजनिक परिवहन को इतना सुविधाजनक बनाना है कि लोग निजी वाहनों के बजाय मेट्रो और अन्य सार्वजनिक साधनों का अधिक उपयोग करें। उन्होंने विशेष रूप से “लास्ट माइल कनेक्टिविटी” पर जोर देते हुए कहा कि मेट्रो स्टेशन से अंतिम गंतव्य तक पहुंचना यात्रियों के लिए आसान होना चाहिए। इसके लिए ऑटो, बस, ई-रिक्शा और अन्य स्थानीय परिवहन साधनों को मेट्रो नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ा जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जब तक मेट्रो स्टेशन से घर, कार्यालय या बाजार तक पहुंचने के लिए सहज और सुलभ साधन उपलब्ध नहीं होंगे, तब तक लोग पूरी तरह से सार्वजनिक परिवहन को नहीं अपनाएंगे। इसलिए सरकार की प्राथमिकता यही है कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत किया जाए, ताकि यात्रा पूरी तरह से आसान और सुगम बन सके।

इस दौरान मेट्रो में सफर कर रहे यात्रियों ने भी मंत्री के इस कदम की सराहना की। कई यात्रियों ने कहा कि जब कोई केंद्रीय मंत्री आम लोगों के बीच आकर उनकी समस्याएं सुनता है, तो इससे सरकार और जनता के बीच भरोसा मजबूत होता है। कुछ यात्रियों ने सुझाव दिया कि मेट्रो स्टेशनों के आसपास पार्किंग की सुविधा बढ़ाई जानी चाहिए और बस सेवाओं को भी मेट्रो से बेहतर तरीके से जोड़ा जाना चाहिए।

केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार देश में मेट्रो नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत ने मेट्रो परियोजनाओं के विकास और विस्तार के लिए लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है। इस बड़े निवेश की वजह से देश के कई शहरों में मेट्रो नेटवर्क का तेजी से विस्तार हुआ है और शहरी परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

उन्होंने कहा कि सरकार की नीतियों का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य मेट्रो परियोजनाओं में घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना भी है। इसी दिशा में “Make in India” अभियान के तहत कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं। सरकार ने यह प्रावधान किया है कि मेट्रो कोचों का कम से कम 75 प्रतिशत हिस्सा और प्रमुख उपकरणों व उप-प्रणालियों का करीब 25 प्रतिशत घरेलू स्तर पर ही खरीदा जाए।

मंत्री खट्टर के अनुसार, इस पहल से न केवल देश में निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा मिला है, बल्कि परिवहन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। इससे स्थानीय उद्योगों को मजबूती मिली है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।

मेट्रो कोचों के घरेलू निर्माण में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी Bharat Earth Movers Limited की भूमिका भी अहम रही है। कंपनी ने मई 2025 तक देश के कई बड़े शहरों में 2000 से अधिक मेट्रो कोचों की आपूर्ति की है। इनमें Jaipur, Kolkata, Bengaluru और Mumbai जैसे प्रमुख शहर शामिल हैं। इस पहल से देश की उत्पादन क्षमता को मजबूती मिली है और मेट्रो कोचों के आयात पर निर्भरता भी काफी हद तक कम हुई है।

मंत्री ने कहा कि भारत का मेट्रो नेटवर्क आज दुनिया के सबसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी परिवहन नेटवर्क में से एक बन चुका है। देश के कई शहरों में मेट्रो परियोजनाएं या तो संचालित हो रही हैं या निर्माणाधीन हैं। इससे न केवल यातायात जाम की समस्या कम हो रही है, बल्कि प्रदूषण को नियंत्रित करने में भी मदद मिल रही है।

उन्होंने बताया कि देश में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी अहम भूमिका निभा रहा है। कई परियोजनाएं विदेशी वित्तीय संस्थानों और साझेदारों के सहयोग से आगे बढ़ रही हैं। ऐसी ही एक महत्वपूर्ण परियोजना Mumbai Metro Line 3 है, जिसे शहरी परिवहन के क्षेत्र में एक बड़ा परिवर्तनकारी कदम माना जा रहा है।

करीब 23,136 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रही इस परियोजना के जरिए मुंबई की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है। यह मेट्रो लाइन शहर के कई प्रमुख इलाकों को जोड़ते हुए लाखों यात्रियों के लिए यात्रा को तेज और सुविधाजनक बनाएगी।

इस परियोजना के वित्तपोषण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग भी महत्वपूर्ण है। कुल लागत का लगभग 57.2 प्रतिशत यानी 13,235 करोड़ रुपये ऋण सहायता के रूप में Japan International Cooperation Agency द्वारा प्रदान किया जा रहा है। शेष वित्तीय सहयोग भारत सरकार, महाराष्ट्र सरकार और Mumbai Metropolitan Region Development Authority द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है।

मंत्री खट्टर ने कहा कि यह परियोजना अंतरराष्ट्रीय और घरेलू सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि भारत की अवसंरचना परियोजनाओं में वैश्विक भागीदारी लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने यह भी कहा कि आने वाले वर्षों में सरकार का लक्ष्य देश के अधिक से अधिक शहरों में आधुनिक और टिकाऊ सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था विकसित करना है। इसके लिए मेट्रो, बस रैपिड ट्रांजिट सिस्टम और अन्य स्मार्ट मोबिलिटी समाधान पर तेजी से काम किया जा रहा है।

अंत में मंत्री ने कहा कि शहरों की बढ़ती आबादी और यातायात की चुनौतियों को देखते हुए मेट्रो जैसी आधुनिक परिवहन व्यवस्था बेहद जरूरी हो गई है। सरकार का प्रयास है कि हर नागरिक को सुरक्षित, सस्ती और सुविधाजनक यात्रा उपलब्ध हो सके।

उन्होंने भरोसा जताया कि लास्ट माइल कनेक्टिविटी को मजबूत करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में उठाए गए कदम भारत के शहरी परिवहन को नई ऊंचाइयों तक

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