
मुंबई के विकास को गति देने वाला बजट: इंफ्रास्ट्रक्चर, पानी और स्वास्थ्य पर बड़ा निवेश
देश की आर्थिक राजधानी की पहचान रखने वाले महानगर के प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने के उद्देश्य से बृहन्मुंबई नगर निगम ने वित्त वर्ष 2026–27 के लिए 80,952.56 करोड़ रुपये का बजट प्रस्तुत किया है। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से बड़ा है और इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन शहर के बुनियादी ढांचे और नागरिक सुविधाओं में दीर्घकालिक निवेश करना चाहता है।

नगर निगम आयुक्त भूषण गागरानी ने बजट पेश करते हुए कहा कि इस बार ध्यान अल्पकालिक योजनाओं के बजाय दीर्घकालिक विकास पर है। उनका कहना था कि तेजी से बढ़ती आबादी, ट्रैफिक दबाव, जल संकट और सार्वजनिक स्वास्थ्य जरूरतों को देखते हुए शहर के लिए व्यापक योजना बनाना जरूरी हो गया है।
सड़कों और कनेक्टिविटी पर सबसे बड़ा दांव
इस बजट में शहर की सड़क व्यवस्था और परिवहन नेटवर्क को मजबूत बनाने पर खास जोर दिया गया है। प्रशासन मानता है कि मुंबई की सबसे बड़ी समस्या यातायात दबाव है, इसलिए बड़े कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स को प्राथमिकता दी गई है।
कोस्टल रोड परियोजना और गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड के लिए लगभग 13,990 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इन परियोजनाओं से शहर के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों के बीच यात्रा समय कम होने की उम्मीद है। इसके साथ ही इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर की आर्थिक गतिविधियों को भी गति देना है।
स्वच्छता और पर्यावरण सुधार पर फोकस
शहर में प्रदूषण और गंदे पानी की समस्या से निपटने के लिए सीवेज ट्रीटमेंट परियोजनाओं पर भी बड़ा खर्च प्रस्तावित किया गया है। लगभग 4,104 करोड़ रुपये इन योजनाओं के लिए निर्धारित किए गए हैं।
प्रशासन का मानना है कि आने वाले समय में जल संरक्षण और स्वच्छता पर ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि यह सीधे नागरिकों के स्वास्थ्य और जीवन स्तर से जुड़ा हुआ है। इसी सोच के तहत बजट में जल सुरक्षा योजनाओं को भी प्रमुख स्थान दिया गया है।
पानी की कमी से निपटने की तैयारी
मुंबई जैसे तटीय शहर में बढ़ती आबादी के साथ पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। इसे ध्यान में रखते हुए जल आपूर्ति और सुरक्षा के लिए 6,475 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
मनोरी में प्रस्तावित डीसैलिनेशन प्लांट के लिए अलग से राशि निर्धारित की गई है, जिससे समुद्री पानी को पीने योग्य बनाने की दिशा में काम तेज होगा। इसके अलावा गार्गई जल परियोजना पर भी निवेश किया गया है। प्रशासन का मानना है कि इन योजनाओं से भविष्य में पानी की कमी से राहत मिल सकेगी।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने की योजना
महानगर में स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसे देखते हुए इस बार स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए 7,456 करोड़ रुपये से अधिक की राशि रखी गई है।
इसमें नए अस्पतालों का निर्माण, पुराने अस्पतालों का आधुनिकीकरण और उपनगरीय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाएं बढ़ाने की योजना शामिल है। महामारी के अनुभव ने प्रशासन को यह सिखाया कि मजबूत सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था शहर की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है।
रिजर्व फंड का उपयोग विकास में
नगर निगम ने अपनी जमा पूंजी का भी इस्तेमाल विकास योजनाओं में करने का फैसला किया है। लगभग 36,600 करोड़ रुपये इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं के लिए अलग रखे गए हैं। हालांकि निगम के पास इससे अधिक जमा राशि मौजूद है, लेकिन उसका बड़ा हिस्सा पेंशन और दीर्घकालिक दायित्वों के लिए सुरक्षित रखा गया है।
इस रणनीति का उद्देश्य यह है कि शहर के बड़े प्रोजेक्ट्स धन की कमी के कारण अधूरे न रहें।
आय और खर्च का संतुलित अनुमान
बजट दस्तावेज के अनुसार नगर निगम को वर्ष 2026–27 में करीब 51,510 करोड़ रुपये की आय होने की उम्मीद है। इसमें संपत्ति कर से बड़ी हिस्सेदारी आने का अनुमान लगाया गया है।
खर्च का अनुमान भी बढ़ाया गया है, लेकिन प्रशासन का दावा है कि वित्तीय संतुलन बनाए रखा जाएगा। बजट में हल्का अधिशेष भी दिखाया गया है, जिससे यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि विकास योजनाओं के बावजूद वित्तीय अनुशासन बना रहेगा।
डिजिटल तकनीक से शहर प्रबंधन
इस बजट की एक खास बात यह है कि इसमें तकनीक आधारित प्रबंधन को महत्व दिया गया है। स्ट्रीट वेंडर्स के लिए QR कोड आधारित प्रमाणन प्रणाली शुरू करने की घोषणा की गई है। इससे वैध विक्रेताओं का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और अवैध अतिक्रमण पर निगरानी आसान होगी।
इसके साथ ही शहर में कैमरों की संख्या बढ़ाकर उन्हें उन्नत वीडियो एनालिटिक्स सिस्टम से जोड़ने की योजना बनाई गई है। प्रशासन का मानना है कि इससे सुरक्षा व्यवस्था बेहतर होगी और अपराध नियंत्रण में मदद मिलेगी।
विपक्ष की तीखी प्रतिक्रिया
बजट पेश होने के तुरंत बाद विपक्षी दलों ने इस पर सवाल उठाए। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि बजट में आम नागरिकों की जरूरतों से ज्यादा ठेकेदारों के हितों को ध्यान में रखा गया है।
वहीं शिव सेना (यूबीटी) ने दावा किया कि निगम की वित्तीय स्थिति पहले ज्यादा मजबूत थी और वर्तमान प्रशासन के दौरान जमा पूंजी में कमी आई है।
दूसरी ओर सत्तारूढ़ पक्ष से जुड़े नेताओं ने इन आरोपों को राजनीतिक बताते हुए कहा कि यह बजट भविष्य के मुंबई के निर्माण की दिशा तय करेगा। उन्होंने कहा कि शहर को वैश्विक स्तर का बुनियादी ढांचा देने के लिए बड़े निवेश जरूरी हैं। इस संदर्भ में भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने बजट को विकासोन्मुख बताया।
भविष्य के मुंबई की रूपरेखा
कुल मिलाकर यह बजट मुंबई को अधिक आधुनिक, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक व्यापक रोडमैप के रूप में देखा जा रहा है।
अब असली चुनौती इन परियोजनाओं के समय पर पूरा होने और उनके लाभ आम नागरिकों तक पहुंचाने की होगी। यदि योजनाएं सफल रहती हैं, तो आने वाले वर्षों में शहर का बुनियादी ढांचा काफी मजबूत हो सकता है।
