
मानसिक बीमारी ने ली मां की जान, बेटे के हाथों हुआ खौफनाक कत्ल
गौतम बुद्ध नगर के जेवर क्षेत्र से एक दिल को झकझोर देने वाली वारदात सामने आई है, जहां एक मानसिक रूप से बीमार युवक ने गुस्से में आकर अपनी ही मां की बेरहमी से हत्या कर दी। यह घटना जेवर कोतवाली क्षेत्र के दयौरार गांव की है, जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस ने मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी बेटे को गिरफ्तार कर लिया है और आगे की जांच जारी है।
जानकारी के मुताबिक, दयौरार गांव निवासी वीरेंद्र सिंह अपने परिवार के साथ रहते हैं। उनके परिवार में पत्नी रुक्मणी देवी और 25 वर्षीय बेटा कृष्ण कुमार शामिल हैं। बताया जा रहा है कि बुधवार को घर के अंदर किसी बात को लेकर मां-बेटे के बीच कहासुनी शुरू हुई। शुरुआत में यह एक सामान्य घरेलू विवाद था, लेकिन देखते ही देखते मामला इतना बढ़ गया कि युवक ने आपा खो दिया।
आरोप है कि गुस्से में कृष्ण कुमार ने पास में रखे डंडे और परात से अपनी मां रुक्मणी देवी पर हमला कर दिया। उसने लगातार वार किए, जिससे महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं। सिर और शरीर पर गहरी चोटें लगने के कारण वह मौके पर ही लहूलुहान होकर गिर पड़ीं। घर से चीख-पुकार की आवाजें सुनकर आसपास के लोग दौड़कर मौके पर पहुंचे।
ग्रामीणों और परिजनों की मदद से घायल महिला को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने जांच के बाद रुक्मणी देवी को मृत घोषित कर दिया। मां की मौत की खबर मिलते ही परिवार में मातम पसर गया और गांव का माहौल गमगीन हो गया।
घटना की सूचना मिलते ही जेवर पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा और मामले की जांच शुरू की। मृतका के पति वीरेंद्र सिंह की तहरीर पर आरोपी कृष्ण कुमार के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि आरोपी युवक लंबे समय से मानसिक रूप से अस्वस्थ था। मृतका के पति ने पुलिस को बताया कि उनका बेटा कई वर्षों से मानसिक बीमारी से पीड़ित था। उन्होंने उसका इलाज अलग-अलग जगहों पर कराया, लेकिन उसकी हालत में कोई खास सुधार नहीं हो सका। मानसिक परेशानी के चलते उसका व्यवहार अक्सर उग्र और असंतुलित रहता था।
वीरेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि कृष्ण कुमार पिछले करीब दस दिनों से घर से लापता था। परिवार को उसकी चिंता हो रही थी, लेकिन मंगलवार की शाम वह अचानक घर लौट आया। घर लौटने के बाद शुरुआत में सब कुछ सामान्य लगा, मगर अगले ही दिन किसी बात को लेकर उसका अपनी मां से विवाद हो गया। यही विवाद बाद में इस भयावह घटना में बदल गया।
ग्रामीणों का कहना है कि रुक्मणी देवी एक सरल और शांत स्वभाव की महिला थीं। वह अपने बेटे की बीमारी को लेकर हमेशा चिंतित रहती थीं और उसके बेहतर इलाज के लिए प्रयासरत थीं। गांव वालों के अनुसार, कृष्ण कुमार की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह कई बार अजीब हरकतें करता था, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेगा।
इस घटना ने एक बार फिर मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की गंभीरता को उजागर कर दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि मानसिक रूप से बीमार व्यक्तियों की नियमित निगरानी और सही इलाज बेहद जरूरी है। यदि समय रहते ऐसे मरीजों को उचित चिकित्सा, काउंसलिंग और पारिवारिक सहयोग मिले, तो कई अप्रिय घटनाओं को टाला जा सकता है।
पुलिस का कहना है कि आरोपी के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति की भी जांच कराई जाएगी। जरूरत पड़ने पर उसका मेडिकल और मानसिक परीक्षण कराया जाएगा, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वारदात के समय उसकी मानसिक हालत क्या थी। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। गांव में शांति बनाए रखने के लिए पुलिस की नजर बनी हुई है। इस दर्दनाक घटना ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़कर रख दिया है, बल्कि समाज के सामने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि मानसिक बीमारी को नजरअंदाज करना कितना खतरनाक साबित हो सकता है।



