
भीषण गर्मी का संकेत: अगले तीन महीने रहेंगे तपते, कई हिस्सों में लू के बढ़ेंगे दिन; सरकारों को अलर्ट
देश में गर्मी का मौसम इस बार सामान्य से अधिक तीखा हो सकता है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने मार्च से मई 2026 के लिए जारी अपने ताजा मौसमी पूर्वानुमान में संकेत दिया है कि आने वाले 90 दिनों में देश के बड़े हिस्से में तापमान औसत से ऊपर रह सकता है। अधिकतम ही नहीं, बल्कि न्यूनतम तापमान भी सामान्य से अधिक रहने की आशंका है, जिससे दिन और रात दोनों समय गर्मी का असर महसूस किया जाएगा। कई राज्यों में लू के दिनों की संख्या बढ़ने की संभावना जताई गई है, जबकि मार्च में औसत वर्षा सामान्य रहने का अनुमान है।

गर्मी का व्यापक दायरा
आईएमडी के अनुसार, मार्च से मई के दौरान देश के अधिकांश हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य से अधिक रह सकता है। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत और मध्य भारत के कुछ सीमित क्षेत्रों में तापमान सामान्य या थोड़ा कम रहने की संभावना है, लेकिन कुल मिलाकर परिदृश्य अधिक गर्मी की ओर इशारा कर रहा है। मैदानी क्षेत्रों और आंतरिक इलाकों में इसका प्रभाव ज्यादा तीव्र हो सकता है।
न्यूनतम तापमान में भी बढ़ोतरी के संकेत हैं। दक्षिणी प्रायद्वीप के कुछ हिस्सों को छोड़ दें तो देश के अधिकतर क्षेत्रों में रात का तापमान औसत से ऊपर रह सकता है। इसका मतलब है कि लोगों को रात में भी राहत कम मिलेगी और गर्म रातों का सिलसिला जारी रह सकता है।
मार्च का संभावित रुख
मार्च महीने के लिए जारी पूर्वानुमान में कुछ मिश्रित संकेत हैं। देश के कई हिस्सों में अधिकतम तापमान सामान्य या सामान्य से कम रह सकता है। लेकिन पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी भारत के आसपास के क्षेत्र, पश्चिमी हिमालयी इलाकों के कुछ हिस्से और मध्य तथा प्रायद्वीपीय भारत के कुछ भागों में तापमान औसत से ऊपर जाने की संभावना है।
न्यूनतम तापमान के मामले में मार्च में अधिकांश क्षेत्रों में स्थिति सामान्य रहने का अनुमान है। उत्तर-पश्चिम भारत, दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों और पूर्वी तट के कुछ इलाकों में रात का तापमान सामान्य से कम रह सकता है, जिससे शुरुआती दिनों में थोड़ी राहत मिल सकती है।
लू का बढ़ता खतरा
लू की स्थिति तब बनती है जब किसी क्षेत्र में लगातार कई दिनों तक अत्यधिक गर्मी बनी रहती है। इस बार पूर्वी और पूर्व-मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों, दक्षिण-पूर्वी प्रायद्वीप के कई क्षेत्रों तथा उत्तर-पश्चिम और पश्चिम-मध्य भारत के कुछ भागों में सामान्य से अधिक लू वाले दिनों का अनुमान है।
विशेष रूप से गुजरात और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में मार्च के दौरान ही सामान्य से अधिक लू चल सकती है। इससे स्पष्ट है कि पश्चिमी और दक्षिणी क्षेत्रों में गर्मी की शुरुआत ही तेज हो सकती है। अन्य क्षेत्रों में लू के दिन सामान्य रह सकते हैं, लेकिन स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तीव्रता बदल सकती है।
वर्षा का संतुलित संकेत
गर्मी के बढ़ते असर के बीच एक सकारात्मक संकेत यह है कि मार्च 2026 में देशभर में औसत वर्षा सामान्य रहने की संभावना है। ‘सामान्य’ वर्षा का अर्थ है कि यह लंबे समय के औसत (एलपीए) के 83 से 117 प्रतिशत के बीच हो सकती है। ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर मार्च में देश में औसतन करीब 29.9 मिलीमीटर वर्षा होती है।
हालांकि वर्षा का वितरण समान नहीं होगा, लेकिन जहां-जहां बारिश होगी वहां अस्थायी राहत मिल सकती है।
पश्चिमी विक्षोभ और ऊपरी हवाओं की भूमिका
मौसम में बदलाव के पीछे ऊपरी वायुमंडलीय गतिविधियां अहम भूमिका निभा रही हैं। उत्तर-पश्चिम भारत के ऊपर लगभग 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर उपोष्णकटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम सक्रिय है, जिसकी रफ्तार लगभग 120 नॉट बताई गई है। यह तेज हवा की धारा सतही तापमान और मौसम प्रणालियों को प्रभावित करती है।
4 मार्च से एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश, बर्फबारी या तेज हवाएं चल सकती हैं। 3 और 4 मार्च को हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में 20 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है।
कृषि पर संभावित असर
तेज हवाएं और बढ़ती गर्मी का असर कृषि पर पड़ सकता है। खेतों में खड़ी फसलें तेज हवा से झुक सकती हैं या गिर सकती हैं। विशेषकर गेहूं और अन्य रबी फसलों के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे फसलों की सुरक्षा के उपाय करें और स्थानीय कृषि अधिकारियों के संपर्क में रहें।
तापमान में संभावित उछाल
आने वाले दिनों में तापमान में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। उत्तर-पश्चिम भारत में अगले पांच दिनों के दौरान अधिकतम तापमान 3 से 5 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। कई स्थानों पर यह सामान्य से 4 से 7 डिग्री अधिक रह सकता है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में करीब 2 डिग्री तक वृद्धि संभव है।
मध्य भारत में भी अगले पांच दिनों में 2 से 4 डिग्री की बढ़ोतरी हो सकती है। पूर्वी भारत में फिलहाल 4 से 5 दिनों तक तापमान में बड़ा बदलाव नहीं दिखेगा, लेकिन बाद में स्थिति बदल सकती है।
स्वास्थ्य के लिए चेतावनी
अत्यधिक गर्मी और लू स्वास्थ्य के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, थकान और चक्कर जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
आईएमडी ने राज्य सरकारों को कूलिंग सेंटर स्थापित करने, पर्याप्त पेयजल उपलब्ध कराने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत रखने की सलाह दी है। अस्पतालों को भी गर्मी से संबंधित आपात स्थितियों के लिए तैयार रहने को कहा गया है।
आम लोगों के लिए सुझाव
दोपहर की तेज धूप से बचें
पर्याप्त मात्रा में पानी और तरल पदार्थ लें
हल्के और सूती कपड़े पहनें
बाहर निकलते समय सिर ढकें
बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
लंबे समय तक धूप में काम करने से बचें
निष्कर्ष
मार्च से मई तक का यह हॉट वेदर सीजन देश के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। तापमान सामान्य से अधिक रहने, लू के दिनों में बढ़ोतरी और गर्म रातों के कारण जनजीवन पर व्यापक असर पड़ सकता है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में वर्षा और पश्चिमी विक्षोभ के कारण अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन समग्र रूप से गर्मी का दबाव बना रहेगा।
ऐसे में सतर्कता, तैयारी और सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। मौसम विभाग लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और समय-समय पर अपडेट जारी करेगा। फिलहाल संकेत स्पष्ट हैं—आने वाले 90 दिन गर्मी के लिहाज से कठिन हो सकते हैं, इसलिए अभी से तैयारी जरूरी है।
