
भारत में बनेगी राफेल की ताकत बढ़ाने वाली ‘हैमर’ मिसाइल, भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को एक नई दिशा देने वाला महत्वपूर्ण कदम इस सप्ताह उठाया जा सकता है। दोनों देशों के बीच होने वाले उच्चस्तरीय रक्षा संवाद में राफेल लड़ाकू विमानों में इस्तेमाल होने वाली अत्याधुनिक हैमर मिसाइल के भारत में संयुक्त निर्माण को लेकर समझौता होने की संभावना है। यह प्रस्ताव केवल एक हथियार सौदा नहीं, बल्कि तकनीकी साझेदारी और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।

यह वार्ता भारत के रक्षा मंत्री Rajnath Singh और फ्रांस की रक्षा मंत्री Catherine Vautrin के बीच कर्नाटक की राजधानी Bengaluru में आयोजित वार्षिक रक्षा संवाद के दौरान होने वाली है। अक्टूबर 2025 में पद संभालने के बाद कैथरीन वॉट्रिन की यह पहली भारत यात्रा है, इसलिए इस बैठक को दोनों देशों के रिश्तों के लिहाज से विशेष महत्व दिया जा रहा है।
यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब भारत ने अपनी वायुसेना को और मजबूत करने के लिए अतिरिक्त राफेल लड़ाकू विमानों और स्कैल्प क्रूज मिसाइलों की खरीद से जुड़े प्रस्तावों को हाल ही में मंजूरी दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन फैसलों से साफ है कि भारत आधुनिक युद्ध तकनीकों को अपनाने के साथ-साथ भरोसेमंद रणनीतिक साझेदारों के साथ रक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
हैमर मिसाइल एक उन्नत हवा-से-जमीन पर मार करने वाली स्मार्ट हथियार प्रणाली है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी सटीकता और बहुउपयोगिता है। यह दुश्मन के बंकर, मजबूत सैन्य ढांचे, कमांड सेंटर और बख्तरबंद वाहनों को दूर से ही निशाना बनाने में सक्षम है। बताया जाता है कि यह लगभग 70 किलोमीटर की दूरी तक लक्ष्य को सटीकता से भेद सकती है। इसके अलावा यह कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जैसे पहाड़ी इलाकों या छिपे ठिकानों पर भी प्रभावी ढंग से काम करती है।
इस मिसाइल की तकनीकी विशेषताओं में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि यह जीपीएस पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहती। आधुनिक युद्ध में जब दुश्मन इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग के जरिए संचार और नेविगेशन प्रणालियों को बाधित करने की कोशिश करता है, तब भी यह मिसाइल अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सक्षम रहती है। यही कारण है कि इसे आधुनिक वायु अभियानों के लिए बेहद उपयोगी माना जाता है।
फिलहाल भारतीय वायुसेना अपने राफेल विमानों में फ्रांस से आयातित हैमर मिसाइलों का इस्तेमाल करती है। यदि प्रस्तावित समझौता लागू होता है और इनका निर्माण भारत में शुरू होता है, तो इससे रक्षा उपकरणों की लागत कम होगी और देश की स्वदेशी उत्पादन क्षमता भी बढ़ेगी। लंबे समय में इससे भारत को रक्षा निर्यातक बनने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
सूत्रों के अनुसार, इस समझौते में तकनीक हस्तांतरण का प्रावधान भी शामिल होगा। इससे भारत केवल असेंबली ही नहीं, बल्कि मिसाइल निर्माण की तकनीकी प्रक्रियाओं में भी दक्षता हासिल कर सकेगा। इस परियोजना में फ्रांस की प्रमुख रक्षा कंपनी Safran और भारत की सरकारी रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी Bharat Electronics Limited के बीच सहयोग की संभावना जताई जा रही है। यह साझेदारी भारतीय उद्योग को उच्च तकनीक रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान दिला सकती है।
रक्षा संवाद के दौरान दोनों देश अपने द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की समीक्षा भी करेंगे। चर्चा इस बात पर भी हो सकती है कि मौजूदा रक्षा सहयोग समझौते को अगले दस वर्षों के लिए बढ़ाया जाए। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलती रणनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए यह सहयोग दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसी यात्रा के दौरान एक और अहम कार्यक्रम आयोजित होगा। दोनों मंत्री कर्नाटक के वेमगल में टाटा-एयरबस परियोजना के तहत एच125 लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर की फाइनल असेंबली लाइन के वर्चुअल उद्घाटन में शामिल होंगे। इस कार्यक्रम का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi और फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron संयुक्त रूप से कर सकते हैं। यह परियोजना भारत में हेलिकॉप्टर निर्माण को बढ़ावा देने के साथ-साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी को भी मजबूत करेगी।
भारत और फ्रांस के बीच रक्षा संबंध लंबे समय से भरोसे और सहयोग पर आधारित रहे हैं। दोनों देश नियमित रूप से संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं। थल सेना के लिए “शक्ति”, नौसेना के लिए “वरुण” और वायुसेना के लिए “गरुड़” अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करते हैं। इन अभ्यासों के जरिए युद्ध कौशल, तकनीकी जानकारी और रणनीतिक अनुभव का आदान-प्रदान होता है।
पिछले कुछ वर्षों में दोनों देशों के राजनीतिक और रणनीतिक संबंध भी मजबूत हुए हैं। उच्चस्तरीय यात्राओं और रक्षा समझौतों ने द्विपक्षीय विश्वास को नई ऊंचाई दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर बदलते सुरक्षा परिदृश्य और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच भारत और फ्रांस का सहयोग दोनों के लिए लाभकारी साबित हो सकता है।
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि यदि हैमर मिसाइल का उत्पादन भारत में शुरू होता है, तो इससे देश के रक्षा उद्योग को गति मिलेगी, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और विदेशी निर्भरता घटेगी। यह कदम भारत को रक्षा उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
कुल मिलाकर, प्रस्तावित समझौता केवल एक रक्षा परियोजना नहीं, बल्कि भारत-फ्रांस रणनीतिक साझेदारी का प्रतीक माना जा रहा है। इससे भारत की सैन्य क्षमता मजबूत होगी, औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा और दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग का दायरा और विस्तृत हो सकता है।
