
बैंक कर्मचारी दंपती पर भरोसा तोड़ने का आरोप, दो करोड़ की ठगी में FIR
वाराणसी के कैंट थाना क्षेत्र से सामने आया यह मामला न सिर्फ आर्थिक धोखाधड़ी का है, बल्कि उस भरोसे के टूटने की कहानी भी है, जो आम लोग बैंक कर्मचारियों पर आंख मूंदकर करते हैं। भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से जुड़े एक कर्मचारी, उसकी पत्नी और एक अन्य व्यक्ति पर एक परिवार को विश्वास में लेकर करीब दो करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी करने का आरोप लगा है। पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने तीनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

कैंट थाना क्षेत्र के अर्दली बाजार इलाके की रहने वाली शिवांगी बरनवाल ने पुलिस को दी गई तहरीर में बताया कि उनके पिता घनश्याम बरनवाल भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा से सेवानिवृत्त कर्मचारी थे। सेवा निवृत्ति के बाद उनके खातों में ग्रेच्युटी, पेंशन, फिक्स्ड डिपॉजिट और अन्य मदों को मिलाकर लगभग दो करोड़ रुपये जमा थे। परिवार को कभी यह अंदेशा नहीं था कि यही पूंजी उनके लिए परेशानी का कारण बन जाएगी।
पीड़िता के अनुसार, पिता के निधन के बाद बैंक से जुड़े होने के कारण शक्ति शुक्ला और उनकी पत्नी पूजा शुक्ला का उनके घर आना-जाना बढ़ गया। शुरुआत में व्यवहार इतना अपनापन भरा था कि धीरे-धीरे दोनों परिवार के सदस्य जैसे हो गए। बैंक कर्मचारी होने के कारण उनकी बातों पर भरोसा करना स्वाभाविक था। इसी भरोसे का कथित तौर पर आरोपियों ने फायदा उठाया।
शिवांगी का आरोप है कि आरोपियों ने उनकी मां को यह कहकर डरा दिया कि खातों में इतनी बड़ी रकम रहने पर आयकर विभाग की कार्रवाई हो सकती है और जेल तक जाना पड़ सकता है। मां पहले से ही पति के निधन से सदमे में थीं, ऐसे में इन बातों से वह और घबरा गईं। आरोपियों ने खुद को मददगार बताते हुए कहा कि वे पैसे को सुरक्षित तरीके से संभाल सकते हैं।
इसी बहाने आरोपियों ने पीड़िता की मां से हस्ताक्षरित चेक, मोबाइल फोन और बैंकिंग से जुड़ा पूरा एक्सेस अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद योनो एप के जरिए ओटीपी मंगवाकर अलग-अलग बैंक खातों में बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी गई। परिवार को यह तक पता नहीं चला कि कब और कैसे खातों से पैसा निकलता चला गया।
साल 2022 में पीड़िता की मां का भी निधन हो गया। मां के जाने के बाद जब शिवांगी ने बैंक खातों और जमा रकम की जानकारी जुटानी शुरू की, तब इस कथित धोखाधड़ी का खुलासा हुआ। खाते खंगालने पर रकम गायब मिली, जिससे परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई।
पीड़िता का कहना है कि जब उन्होंने आरोपियों से जवाब मांगा और दबाव बनाया, तो मामला और उलझता चला गया। बाद में आरोपियों ने एक नोटरी एग्रीमेंट के जरिए यह स्वीकार किया कि उन्होंने एक करोड़ रुपये लिए हैं और उसे वापस करने का आश्वासन दिया। इस भरोसे के तहत उन्होंने 50-50 लाख रुपये के दो चेक दिए।
हालांकि, जब ये दोनों चेक बैंक में जमा किए गए तो वे बाउंस हो गए। इसके बाद पीड़िता ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां मामला फिलहाल विचाराधीन है। अब न्यायालयी प्रक्रिया के साथ-साथ पुलिस जांच भी शुरू हो चुकी है, जिससे पीड़िता को न्याय की उम्मीद बंधी है।
कैंट थाना प्रभारी शिवाकांत मिश्रा ने बताया कि पीड़िता की तहरीर के आधार पर शक्ति शुक्ला, पूजा शुक्ला और अनिल सिंह के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस बैंक खातों, डिजिटल लेन-देन, चेक और मोबाइल रिकॉर्ड की जांच कर रही है। सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला सामने आने के बाद बैंकिंग व्यवस्था और ग्राहकों की सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। आम तौर पर लोग बैंक कर्मचारियों को भरोसेमंद मानते हैं, लेकिन इस घटना ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि वित्तीय मामलों में कितनी सतर्कता जरूरी है, खासकर तब जब लेन-देन बड़ी रकम का हो।
इसी बीच वाराणसी के मंडुवाडीह थाना क्षेत्र से चोरी की एक और घटना सामने आई है। शिव नगर कॉलोनी, चांदपुर में रविवार देर रात चोरों ने राजकुमार सोनकर के घर को निशाना बनाया। चोर घर से बैटरी, इनवर्टर, फ्रिज का स्टेबलाइजर, सीसीटीवी कैमरे की डीवीआर समेत कई घरेलू सामान लेकर फरार हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। मंडुवाडीह थाना प्रभारी अजय राज वर्मा ने बताया कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है, ताकि चोरों की पहचान की जा सके। स्थानीय लोगों में इस घटना के बाद डर का माहौल है और उन्होंने पुलिस से इलाके में गश्त बढ़ाने की मांग की है।
एक ओर जहां करोड़ों की कथित धोखाधड़ी ने बैंकिंग भरोसे को झकझोर दिया है, वहीं दूसरी ओर चोरी की घटनाएं शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही हैं। अब देखना यह है कि पुलिस जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए पीड़ितों को कब और कितना न्याय मिल पाता है।



