
फ्री बस सफर की चाह में बना ‘फर्जी इंस्पेक्टर’, 69 साल के बुजुर्ग की अजीब कहानी
हरियाणा के सोनीपत जिले से सामने आया एक मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। वजह है इसकी हैरान करने वाली और कुछ हद तक हास्य से भरी कहानी। यहां पुलिस ने एक ऐसे बुजुर्ग को हिरासत में लिया है, जो पुलिस इंस्पेक्टर की वर्दी पहनकर खुलेआम घूम रहा था। जब उसकी सच्चाई सामने आई, तो पुलिस भी कुछ पल के लिए हैरान रह गई। आरोपी की उम्र 69 साल है और उसने पुलिस की वर्दी सिर्फ इसलिए पहनी थी ताकि बस में सफर करते वक्त किराया न देना पड़े।

यह मामला सोनीपत के सदर थाना क्षेत्र के गांव भटगांव का है। गांव में एक व्यक्ति पुलिस अधिकारी की वर्दी में घूम रहा था और लोगों से बड़े रौब के साथ बात कर रहा था। उसकी गतिविधियां कुछ लोगों को संदिग्ध लगीं। ग्रामीणों को शक हुआ कि कहीं यह व्यक्ति असली पुलिसकर्मी न होकर कोई और तो नहीं। इसके बाद इस बारे में पुलिस को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही क्राइम ब्रांच और सदर थाना पुलिस की संयुक्त टीम गांव भटगांव पहुंची। पुलिस ने मौके पर जाकर उस व्यक्ति से पूछताछ की। शुरुआत में वह खुद को इंस्पेक्टर बताता रहा, लेकिन जब उससे पहचान और तैनाती से जुड़े सवाल पूछे गए, तो वह संतोषजनक जवाब नहीं दे सका। इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया और थाने ले आई।
पूछताछ में उसकी पहचान राजेंद्र के रूप में हुई, जो झज्जर जिले का रहने वाला है। राजेंद्र ने पुलिस को बताया कि वह अपने किसी रिश्तेदार के यहां गांव भटगांव आया हुआ था। जब उससे पुलिस की वर्दी पहनने की वजह पूछी गई, तो उसने जो कारण बताया, उसने सभी को चौंका दिया। आरोपी ने स्वीकार किया कि उसने बस का किराया बचाने के लिए पुलिस की वर्दी खरीदी और पहन ली थी।
राजेंद्र ने बताया कि अक्सर बसों में पुलिसकर्मियों से टिकट नहीं लिया जाता या उन्हें विशेष सुविधा मिल जाती है। इसी सोच के चलते उसने दो दिन पहले बाजार से पुलिस की वर्दी खरीदी और उसी वर्दी में बस से सफर कर सोनीपत पहुंच गया। उसे उम्मीद थी कि पुलिस की वर्दी देखकर कोई भी उससे किराया नहीं मांगेगा और वह आसानी से मुफ्त में यात्रा कर सकेगा।
हालांकि, आरोपी ने अपनी कहानी को और विश्वसनीय बनाने के लिए खुद को पूर्व पुलिसकर्मी भी बताया। उसने दावा किया कि वह साल 1992 में हरियाणा पुलिस में भर्ती हुआ था। उसके अनुसार, साल 2002 में कैथल में एक भ्रष्टाचार के मामले में उसे सस्पेंड कर दिया गया था और उसी केस में उसे जेल भी जाना पड़ा था। बाद में उसे नौकरी से बर्खास्त कर दिया गया।
लेकिन पुलिस ने जब इस दावे की गहराई से जांच की, तो यह कहानी भी झूठी निकली। पुलिस रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला कि राजेंद्र नाम का कोई व्यक्ति कभी हरियाणा पुलिस में भर्ती हुआ हो। इसके अलावा, अगर वह 1992 में भर्ती हुआ होता, तो उस समय उसकी उम्र और सेवा से जुड़े तथ्य मेल नहीं खा रहे थे। ऐसे में पुलिस ने उसके इस बयान को भी पूरी तरह फर्जी करार दे दिया।
सदर थाना प्रभारी अशोक कुमार ने बताया कि आरोपी को गांव भटगांव से नकली इंस्पेक्टर की वर्दी में हिरासत में लिया गया है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने जानबूझकर पुलिस की वर्दी पहनकर खुद को अधिकारी दिखाने की कोशिश की। फिलहाल उससे यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं उसने इस वर्दी का इस्तेमाल किसी और गलत उद्देश्य के लिए तो नहीं किया।
पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि आरोपी ने पुलिस की वर्दी कहां से खरीदी। नियमों के अनुसार, पुलिस की वर्दी आम नागरिकों को बेचना कानूनन अपराध है। ऐसे में वर्दी बेचने वाले दुकानदार की भूमिका भी संदेह के घेरे में आ गई है। अगर जांच में यह साबित होता है कि किसी दुकानदार ने लापरवाही या जानबूझकर वर्दी बेची है, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जा सकती है।
इस घटना ने पुलिस प्रशासन के सामने एक गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर पुलिस की वर्दी जैसे संवेदनशील सामान खुले बाजार में इतनी आसानी से कैसे उपलब्ध हो जाते हैं। पुलिस की वर्दी सिर्फ एक कपड़ा नहीं, बल्कि कानून और सुरक्षा का प्रतीक होती है। इसका गलत इस्तेमाल आम लोगों के साथ धोखाधड़ी, डराने-धमकाने या अपराध करने के लिए भी किया जा सकता है।
फिलहाल आरोपी राजेंद्र से लगातार पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसने केवल किराया बचाने के इरादे से ही यह वर्दी पहनी थी या इसके पीछे कोई और मकसद भी छिपा हुआ है। जांच पूरी होने के बाद उसके खिलाफ उचित धाराओं में मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह मामला भले ही सुनने में अजीब और मजेदार लगे, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर चेतावनी भी छिपी है। कानून के प्रतीकों का मजाक बनाना या उनका गलत इस्तेमाल करना किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। पुलिस का कहना है कि ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है, ताकि भविष्य में कोई भी व्यक्ति इस तरह की हरकत करने से पहले गंभीर परिणामों के बारे में जरूर सोचे।

