
फेक वीडियो पर कोर्ट की सख्ती: आतिशी केस में सोशल मीडिया कंपनियों को 24 घंटे का अल्टीमेटम
फेक न्यूज और डिजिटल छेड़छाड़ के बढ़ते खतरे के बीच जालंधर कोर्ट ने एक अहम मिसाल पेश की है। आम आदमी पार्टी की नेता और दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी से जुड़े वायरल वीडियो को अदालत ने फर्जी और भ्रामक करार देते हुए उसे तुरंत हटाने का आदेश दिया है।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM), जालंधर की अदालत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स मेटा, एक्स और टेलीग्राम को निर्देश दिया है कि वे 24 घंटे के भीतर इस वीडियो को पूरी तरह हटाएं। साथ ही कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि भविष्य में इस वीडियो के किसी भी बदले हुए या दोबारा अपलोड किए गए संस्करण को रोका जाए।
कोर्ट का यह फैसला पुलिस द्वारा पेश की गई फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी (FSL) की तकनीकी रिपोर्ट पर आधारित है। रिपोर्ट में बताया गया है कि वीडियो के साथ जानबूझकर ऑडियो छेड़छाड़ की गई और गलत कैप्शन जोड़े गए, ताकि बयान को धार्मिक रूप से संवेदनशील बनाया जा सके।
दरअसल, वायरल क्लिप दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही से जुड़ी थी। सोशल मीडिया पर यह प्रचार किया गया कि आतिशी ने सिखों के नौवें गुरु, श्री गुरु तेग बहादुर जी को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। लेकिन पुलिस जांच में यह साफ हो गया कि मूल भाषण में ऐसा कोई बयान मौजूद ही नहीं था।
पुलिस के अनुसार, इस वीडियो का मकसद पंजाब में सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ना और राजनीतिक लाभ उठाना था। इसी आधार पर इकबाल सिंह बग्गा की शिकायत पर जालंधर पुलिस ने FIR दर्ज की थी। केस में भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1) और आईटी एक्ट की धाराएं लगाई गई हैं।
इस पूरे मामले ने एक नया संवैधानिक विवाद भी खड़ा कर दिया है। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने पंजाब पुलिस को नोटिस भेजते हुए कहा है कि विधानसभा की कार्यवाही का वीडियो “सदन की संपत्ति” होता है और बिना अनुमति FIR दर्ज करना विशेषाधिकार हनन की श्रेणी में आ सकता है।
कोर्ट के आदेश के बाद आम आदमी पार्टी ने भाजपा पर सीधा हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि यह फैसला फेक वीडियो और डिजिटल दुष्प्रचार के खिलाफ एक मजबूत संदेश है।
जालंधर कोर्ट का यह निर्णय केवल एक राजनीतिक विवाद का अंत नहीं है, बल्कि यह सोशल मीडिया के दौर में फैल रही फर्जी खबरों और डीपफेक के खिलाफ एक सख्त चेतावनी भी है।


