
फिलीपींस के ठग ने गुड़गांव में कराया कॉल सेंटर सेटअप, 1 गिरफ्तार, अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी का खुलासा
गुड़गांव में साइबर ठगी के एक नए और अंतरराष्ट्रीय स्तर के मामले ने पुलिस को हैरान कर दिया है। अब ठग सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि विदेशों से वीडियो कॉल के जरिए अपराध कर रहे हैं। ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां फिलीपींस का एक ठग वीडियो कॉल के माध्यम से भारत में एक कॉल सेंटर का संचालन करा रहा था। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया और जांच में खुलासा हुआ कि यह अपराध नेपाल और बिहार के रास्ते होकर भारत में संचालित किया जा रहा था।

पुलिस के मुताबिक, यह मामला 17 मार्च को उजागर हुआ, जब साइबर अपराध वेस्ट को दो मकान मालिकों ने शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने बताया कि उनके किराएदारों ने उनके घरों में अवैध रूप से सिम बॉक्स (GSM गेटवे) स्थापित किया था। इन सिम बॉक्स का इस्तेमाल अनधिकृत दूरसंचार गतिविधियों और साइबर अपराध में किया जा रहा था। पुलिस ने मौके पर जाकर दो अलग-अलग कमरों से अवैध रूप से संचालित उपकरण बरामद किए। इनमें कुल पांच सिम बॉक्स थे, जिनमें 32-32 सिम पोर्ट एंटीना लगे हुए थे। इसके अलावा 8 राउटर, 18 बैटरी, 3 UPS (इनवर्टर) और एयरटेल तथा वोडाफोन आइडिया के कुल 504 सिम कार्ड भी जब्त किए गए।
18 मार्च को पुलिस ने उत्तर प्रदेश के कासगंज में रेड की और एक आरोपी राहुल कुमार (30 वर्ष), निवासी ग्राम नगला नोक्स, जिला कासगंज को गिरफ्तार किया। आरोपी को अदालत में पेश कर पांच दिन के रिमांड पर लिया गया। पुलिस हिरासत में पूछताछ के दौरान राहुल ने बताया कि वह नोएडा में कार चलाता है। उसने यह भी स्वीकार किया कि यह कॉल सेंटर फिलीपींस के एक व्यक्ति के निर्देशानुसार वीडियो कॉल के जरिए स्थापित किया गया था।
राहुल ने पुलिस को बताया कि फिलीपींस का यह व्यक्ति वीडियो कॉल के माध्यम से सिम बॉक्स के सेटअप और संचालन की निगरानी करता था। राहुल ने अपनी भूमिका स्पष्ट की कि वह नोएडा से पूरे उपकरण गुड़गांव के U-Block, DLF फेज-3 में ले आया और वहां इंस्टॉल किया। इसके बदले उसे फिलीपींस के व्यक्ति से 15 हजार रुपये मिले।
जांच में यह भी पता चला कि इन उपकरणों का इस्तेमाल इंटरनेट के माध्यम से कॉल रूटिंग और अन्य अवैध गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। यह तकनीक साइबर फ्रॉड और अंतरराष्ट्रीय स्तर की ठगी के लिए उपयुक्त थी। पुलिस ने बताया कि उपरोक्त उपकरण फिलीपींस से नेपाल आए और फिर नेपाल से बिहार होते हुए भारत में पहुंचे। इसके बाद इन उपकरणों को विभिन्न जगहों पर वितरित किया गया और साइबर ठगी की घटनाओं को अंजाम दिया गया।
साइबर अपराध वेस्ट के अधिकारियों ने बताया कि यह घटना अंतरराष्ट्रीय साइबर नेटवर्किंग का एक नया तरीका है। ठग अब सिर्फ स्थानीय नेटवर्क पर नहीं बल्कि विदेश से वीडियो कॉल के माध्यम से सीधे भारत में कॉल सेंटर सेटअप करा रहे हैं। यह पूरी तरह से संगठित और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित समूह की गतिविधि प्रतीत होती है।
रिमांड के दौरान पुलिस ने आरोपी से मोबाइल और अन्य उपकरण बरामद किए। इन उपकरणों की जांच के बाद और सिम कार्ड के डेटा को ट्रैक करने पर पता चला कि इन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी, कॉल रूटिंग और अन्य अवैध लेन-देन के लिए इस्तेमाल किया गया। साइबर पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में तकनीकी और इंटरनेशनल सहयोग बहुत जरूरी है, क्योंकि अपराधियों का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैला हुआ है।
पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी का रिमांड पूरा होने के बाद उसे अदालत में पेश किया गया और जेल भेज दिया गया। मामले की जांच अभी भी जारी है। पुलिस ने कहा कि इस जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर और गिरफ्तारी और कार्रवाई की जाएगी।
विशेष रूप से यह मामला साइबर ठगी और अंतरराष्ट्रीय अपराध की नई तकनीकों की तरफ इशारा करता है। अब अपराधी सिर्फ स्थानीय संसाधनों का उपयोग नहीं करते, बल्कि विदेशों से निर्देश प्राप्त करके भारत में अवैध कॉल सेंटर स्थापित कर रहे हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भविष्य में ऐसे अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को ट्रैक करना और रोकना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन वे इस दिशा में पूरी तरह सजग हैं।
गुड़गांव और नोएडा के साइबर अपराध प्रकोष्ठ ने बताया कि वह इस मामले में और गहन जांच कर रहे हैं। आरोपी के सिम बॉक्स, राउटर और अन्य उपकरणों की तकनीकी जाँच के आधार पर यह पता लगाया जाएगा कि कितनी ठगी हुई और किन लोगों को नुकसान पहुंचा। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि फिलीपींस का यह व्यक्ति और कितने अन्य लोगों के माध्यम से अपराध चला रहा था।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि साइबर अपराध अब केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका है और इसके लिए अत्याधुनिक तकनीक, अंतरराष्ट्रीय सहयोग और कानून व्यवस्था की सख्ती जरूरी है। पुलिस ने आम नागरिकों को भी चेताया कि इस तरह के कॉल, लिंक या संदिग्ध गतिविधियों में शामिल न हों।
अदालत में आरोपी की पेशी के दौरान मामले की गंभीरता पर ध्यान दिया गया। पुलिस और न्यायालय ने स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बर्दाश्त की जाएगी। गिरफ्तारी और रिमांड का उद्देश्य जांच को तेजी से आगे बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क को तोड़ना है।
यह मामला साइबर अपराध की नई तकनीक और अंतरराष्ट्रीय गठजोड़ को उजागर करता है। फिलीपींस से संचालित इस कॉल सेंटर ने यह दिखाया कि आधुनिक अपराधी तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का इस्तेमाल करके बड़ी ठगी कर सकते हैं। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच पूरी होने तक आरोपी जेल में ही रहेगा और जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग और अधिक कार्रवाई की जाएगी।

