
फाइनेंस कंपनी के रिकवरी एजेंटों ने किया लाखों का घोटाला, 24 ग्राहकों से कैश वसूली के बाद फरार
गुरुग्राम: हुडा सिटी सेंटर में स्थित एक प्रसिद्ध नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी ने हाल ही में अपने दो रिकवरी एजेंटों द्वारा की गई धोखाधड़ी की चौंकाने वाली घटना का खुलासा किया है। आरोप है कि कंपनी के नियुक्त कलेक्शन एजेंटों ने कर्जदारों से कैश वसूलने के बाद फर्जी दस्तावेज़ जारी कर लाखों रुपये हड़प लिए और फरार हो गए। यह मामला कंपनी के लिए सिरदर्द बन गया है और स्थानीय पुलिस इस पर गंभीरता से जांच कर रही है।

सूत्रों के मुताबिक, कंपनी ने अपने दो कर्मचारियों को कर्जदारों से लोन वसूली करने के लिए नियुक्त किया था। नियम और प्रक्रिया के अनुसार, ये एजेंट केवल कंपनी के बैंक खाते में पैसा जमा कर सकते थे। लेकिन आरोपियों ने नियमों को दरकिनार कर कर्जदारों को यह विश्वास दिलाया कि वे कंपनी के अधिकारिक अधिकारी हैं। इसके बाद उन्होंने सीधे कर्जदारों से नकद राशि वसूलना शुरू कर दी।
धोखाधड़ी के दौरान एजेंटों ने न केवल पैसे लिए, बल्कि कर्जदारों को यह यकीन दिलाने के लिए फर्जी रसीदें और नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) भी जारी किए। इन दस्तावेज़ों के माध्यम से ग्राहकों को यह भरोसा हुआ कि उनका लोन पूरी तरह से चुका दिया गया है। कंपनी की आंतरिक जांच में पता चला कि अगस्त 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच कुल 24 ग्राहकों से लगभग 21.77 लाख रुपये की राशि वसूली गई, लेकिन यह पैसा कभी कंपनी के बैंक खाते में जमा नहीं हुआ।
एक कंपनी अधिकारी ने बताया, “हमें इस धोखाधड़ी का पता तब चला जब हमारे रिकॉर्ड और कर्जदारों की भुगतान स्टेटमेंट्स में अंतर नजर आया। प्रारंभिक जांच में स्पष्ट हुआ कि एजेंटों ने पैसे लेकर खुद के फायदे के लिए फर्जी दस्तावेज़ जारी किए।”
मेट्रो थाना पुलिस ने इस मामले में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि एजेंटों ने अपने कृत्य में सावधानी बरती और कर्जदारों के विश्वास का पूरा लाभ उठाया। कर्जदारों के अनुसार, उन्होंने एजेंटों से पैसे देते समय सभी औपचारिकताएं पूरी की थीं और उन्हें विश्वास था कि यह भुगतान सीधे फाइनेंस कंपनी के खाते में जमा होगा।
पुलिस के मुताबिक, यह घटना न केवल कंपनी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाती है बल्कि आम जनता के लिए भी चेतावनी है कि वे ऐसे मामलों में सतर्क रहें। एजेंटों ने जिस तरह फर्जी दस्तावेज़ जारी किए, उससे यह अंदेशा भी बनता है कि वे अपने कृत्यों को लंबे समय तक छुपाने का प्रयास कर रहे थे।
कर्जदारों ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें कभी अंदाजा नहीं था कि वे धोखाधड़ी का शिकार होंगे। एक ग्राहक ने कहा, “मैंने भरोसे के साथ पैसे दिए और रसीदें भी लीं। बाद में पता चला कि एजेंटों ने हमें ठगा और कंपनी तक पैसा नहीं पहुंचाया। यह विश्वासघात बहुत ही दुखद है।”
कंपनी ने इस घटना को गंभीरता से लेते हुए अपने अन्य कर्मचारियों और एजेंटों की जांच भी शुरू कर दी है। अधिकारी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि इस प्रकार की धोखाधड़ी भविष्य में न हो। इसके अलावा कंपनी ने ग्राहकों को आश्वस्त किया है कि वह इस मामले में सभी कानूनी कदम उठाएगी और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजेगी।
मेट्रो थाना पुलिस का कहना है कि अभी तक एजेंटों का पता नहीं चल सका है। जांच में उनके ठिकानों और बैंक लेन-देन का भी विश्लेषण किया जा रहा है। पुलिस ने कर्जदारों से भी आग्रह किया है कि जो भी जानकारी या दस्तावेज उनके पास हैं, उसे साझा करें ताकि आरोपियों को जल्द पकड़ा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की धोखाधड़ी में आमतौर पर एजेंटों का मकसद जल्दी से पैसा हड़पना और फर्जी दस्तावेज़ों के सहारे कर्जदारों का विश्वास जीतना होता है। ऐसे मामलों में कंपनियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके एजेंट नियमों का पालन करें और सभी लेन-देन पारदर्शी तरीके से किए जाएं।
कुल मिलाकर यह मामला न सिर्फ फाइनेंस कंपनी बल्कि पूरे वित्तीय क्षेत्र के लिए एक चेतावनी है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब भी कोई ग्राहक लोन या किस्त का भुगतान कर रहा हो, उसे हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि राशि सीधे कंपनी के बैंक खाते में जा रही है और किसी एजेंट के हाथों में नकद भुगतान नहीं किया गया है।
इस मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस का दावा है कि आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार किया जाएगा। कंपनी भी अपने आंतरिक सुरक्षा और भुगतान प्रक्रिया को मजबूत करने की योजना बना रही है।
इस घटना ने एक बार फिर यह साबित किया कि वित्तीय लेन-देन में सतर्कता कितनी महत्वपूर्ण है। न केवल ग्राहकों को बल्कि कंपनियों को भी यह ध्यान रखना होगा कि उनके प्रतिनिधि नियमों का पालन कर रहे हैं। धोखाधड़ी के इस मामले ने सभी को सचेत कर दिया है कि भरोसे के साथ-साथ जांच और सतर्कता भी जरूरी है।

