
प्यार, पैसों का झगड़ा और खामोश लाश
मुजफ्फरनगर।
गंगनहर की पटरी पर पड़ा एक शव…
चेहरे पर टेप, बदन पर कपड़ा और चारों ओर सन्नाटा।
तीन दिन तक लाश वहीं रही, लेकिन किसी को भनक तक नहीं लगी। जब पुलिस की नजर पड़ी, तब खुली एक ऐसी कहानी, जिसने रिश्तों पर सवाल खड़े कर दिए।

यह मामला खतौली थाना क्षेत्र का है, जहां एक महिला की हत्या कर उसके शव को गंगनहर में फेंकने की कोशिश की गई। मृतका ममता, जो घरों में खाना बनाने का काम करती थी, किसी की प्रेमिका थी… और उसी प्रेमी ने उसकी जान ले ली।
🔍 प्यार की शुरुआत, शक की आग
संदीप नामदेव, जिसकी पत्नी की मौत 2012 में हो चुकी थी, अकेलेपन में ममता के करीब आया। टिफिन के बहाने शुरू हुई दोस्ती कब प्यार में बदल गई, किसी को पता नहीं चला। लेकिन वक्त के साथ रिश्ते में शक, पैसों की मांग और फोन कॉल्स को लेकर तनाव बढ़ता चला गया।
जिस दिन ममता संदीप के घर पहुंची, उसी दिन उसके फोन पर बार-बार कॉल आए। संदीप ने सवाल किया, लेकिन ममता ने जवाब नहीं दिया। यही चुप्पी संदीप के गुस्से को हिंसा में बदलने वाली थी।
☠️ पहले बेहोशी, फिर बेरहमी
आरोपी ने पहले से ही साजिश रच रखी थी। घर में रखी नशे की गोलियां चाय में मिलाई गईं। ममता ने चाय पी, कुछ ही देर में वह बेहोश हो गई। इसके बाद संदीप ने उसके मुंह को दबाया और तब तक नहीं छोड़ा, जब तक उसकी सांसें थम नहीं गईं।
घबराहट में आरोपी ने उसके चेहरे पर टेप चिपका दी, ताकि कोई हलचल न हो। रात के अंधेरे में शव को ठेले पर रखा और गंगनहर की ओर निकल पड़ा।
🚔 पुलिस की लापरवाही भी आई सामने
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि हत्या के बाद शव तीन दिन तक गंगनहर किनारे पड़ा रहा। पुलिस गश्त का दावा करती रही, लेकिन किसी ने उस लाश को नहीं देखा। जब मामला खुला, तो पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे।
सीओ राम आशीष यादव ने बताया कि कॉल डिटेल और तकनीकी जांच के आधार पर आरोपी तक पहुंचा गया। पूछताछ में संदीप ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया।



