
पोर्श, डिफेंडर और प्राइवेट जेट… कौन हैं माघ मेले के ‘VIP संत’ सतुआ बाबा?
प्रयागराज के माघ मेले में इस बार संतों के बीच एक नाम सबसे ज़्यादा चर्चा में है — सतुआ बाबा। पीले कपड़ों में दिखने वाले इस संत का काफ़िला करोड़ों की पोर्श और डिफेंडर कारों से सजा है। सोशल मीडिया पर लोग पूछ रहे हैं — क्या कोई संत इतना वैभवशाली हो सकता है?

सतुआ बाबा उर्फ संतोष दास जी महाराज, वही संत हैं जो अक्सर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ मंच साझा करते दिखाई देते हैं। कभी महंगी गाड़ियों में, तो कभी प्राइवेट जेट में उनकी तस्वीरें वायरल होती रहती हैं।
संत नहीं, एक परंपरा का नाम हैं सतुआ बाबा
बहुत कम लोग जानते हैं कि सतुआ बाबा कोई व्यक्तिगत नाम नहीं, बल्कि एक 200 साल पुरानी धार्मिक परंपरा का प्रतीक है। काशी के मणिकर्णिका घाट पर स्थित सतुआ बाबा पीठ की स्थापना 1803 में संत जेठा पटेल ने की थी। इस पीठ के प्रमुख को ही ‘सतुआ बाबा’ कहा जाता है।
बचपन में छोड़ा घर, 19 साल में बने महामंडलेश्वर
वर्तमान सतुआ बाबा संतोष दास उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले से आते हैं। महज 11 साल की उम्र में घर छोड़कर काशी पहुंचे संतोष दास की प्रतिभा को देख तत्कालीन महंत ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी बना लिया।
सिर्फ 19 साल की उम्र में महामंडलेश्वर बनना अपने आप में एक रिकॉर्ड है। वे वैष्णव संप्रदाय के निर्मोही अखाड़े से जुड़े हैं और आज सनातन धर्म के प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं।
आस्था और वैभव का अनोखा संगम
माघ मेले में सतुआ बाबा का काफ़िला आस्था और आधुनिक वैभव के संगम की तस्वीर पेश करता है। यही वजह है कि वे न सिर्फ धार्मिक हलकों में बल्कि सोशल मीडिया और मीडिया की सुर्खियों में भी छाए हुए हैं।



