
पानीपत स्टेशन पर ट्रेनों की लेटलतीफी से यात्रियों की बढ़ी मुश्किलें, इंटरसिटी सहित कई गाड़ियां घंटों देरी से पहुंचीं
पानीपत। रेलवे यात्रियों के लिए मंगलवार का दिन काफी परेशानी भरा साबित हुआ। दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस समेत कुल 12 ट्रेनों के निर्धारित समय से देरी से पहुंचने के कारण स्टेशन पर अफरा-तफरी और असुविधा का माहौल बना रहा। यात्रियों को प्लेटफॉर्म पर लंबा इंतजार करना पड़ा, जिससे उनकी दिनचर्या और यात्रा योजनाएं प्रभावित हुईं।

सुबह से ही स्टेशन पर यात्रियों की भीड़ नजर आने लगी थी। कई लोग अपने कामकाज, परीक्षाओं, इंटरव्यू और पारिवारिक कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए समय से पहले स्टेशन पहुंच गए थे, लेकिन ट्रेनों की देरी ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। सबसे अधिक देरी दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस में दर्ज की गई, जो लगभग तीन घंटे विलंब से पानीपत पहुंची।
प्लेटफॉर्म पर बैठी यात्री प्रीति ने बताया कि वह जरूरी कार्य से दिल्ली जा रही थीं। उन्होंने कहा कि ट्रेन की डेढ़ घंटे की देरी के कारण उनका पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो गया। “इतने समय में तो हम आधी दूरी तय कर सकते थे,” उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा। वहीं कुशल नामक यात्री ने बताया कि बार-बार ट्रेनों की देरी से उन्हें दफ्तर पहुंचने में समस्या होती है और कई बार उन्हें वरिष्ठ अधिकारियों के सामने जवाब देना पड़ता है।
रेलवे स्टेशन पर मौजूद अन्य यात्रियों ने भी अपनी परेशानी साझा की। कुछ बुजुर्ग यात्रियों को लंबे इंतजार के कारण थकान महसूस हुई, वहीं छोटे बच्चों के साथ सफर कर रहे परिवारों को अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ा। प्लेटफॉर्म पर भीड़ बढ़ने से बैठने की जगह कम पड़ गई और खानपान की दुकानों पर भी लंबी कतारें लग गईं।
मंगलवार को देरी से आने वाली ट्रेनों की सूची लंबी रही। दिल्ली इंटरसिटी एक्सप्रेस करीब तीन घंटे लेट रही। मालवा सुपरफास्ट एक्सप्रेस लगभग ढाई घंटे की देरी से पहुंची। कुरुक्षेत्र-दिल्ली एमईएमयू ट्रेन डेढ़ घंटे विलंब से आई। जम्मू तवी एक्सप्रेस सवा दो घंटे देरी से चली, जबकि झेलम एक्सप्रेस करीब 35 मिनट देर से पहुंची। नेताजी एक्सप्रेस भी लगभग 45 मिनट लेट रही।
इसके अलावा जम्मू मेल लगभग एक घंटे की देरी से आई। बीकानेर एक्सप्रेस और अमृतसर एक्सप्रेस करीब आधे घंटे विलंब से पहुंचीं। गीता जयंती एक्सप्रेस सवा एक घंटे लेट रही। फाजिल्का इंटरसिटी एक्सप्रेस एक घंटे देरी से आई, जबकि नई दिल्ली-कुरुक्षेत्र एमईएमयू लगभग 45 मिनट लेट रही। कुरुक्षेत्र जंक्शन से चलने वाली गीता जयंती एक्सप्रेस भी करीब आधे घंटे की देरी से स्टेशन पहुंची।
यात्रियों का कहना है कि ट्रेनों की अनियमितता से न केवल समय की बर्बादी होती है, बल्कि मानसिक तनाव भी बढ़ता है। कई यात्रियों को अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए आगे अन्य साधनों का सहारा लेना पड़ता है, जिससे अतिरिक्त खर्च भी बढ़ जाता है। कुछ यात्रियों ने यह भी कहा कि यदि देरी की जानकारी समय रहते मोबाइल संदेश या ऐप के माध्यम से मिल जाए तो वे अपनी योजना में बदलाव कर सकते हैं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कभी-कभी परिचालन कारणों, ट्रैफिक घनत्व और अन्य तकनीकी वजहों से ट्रेनों के संचालन में देरी हो जाती है। हालांकि यात्रियों की मांग है कि समय प्रबंधन को और बेहतर बनाया जाए। उनका कहना है कि डिजिटल सिग्नलिंग और बेहतर समन्वय से ट्रेनों की समयपालन क्षमता में सुधार किया जा सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते रेल यातायात के कारण व्यस्त रूटों पर ट्रेनों का दबाव बढ़ गया है। ऐसे में ट्रैक रखरखाव, सिग्नलिंग सिस्टम और क्रॉसिंग प्रबंधन को आधुनिक बनाने की जरूरत है। यदि समय पर अपग्रेडेशन और निगरानी हो, तो देरी की घटनाओं में कमी लाई जा सकती है।
पानीपत जंक्शन उत्तर भारत का एक महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशन है, जहां से रोजाना हजारों यात्री सफर करते हैं। ऐसे में यहां ट्रेनों की बार-बार देरी यात्रियों के लिए बड़ी समस्या बनती जा रही है। यात्रियों ने रेलवे प्रशासन से अपील की है कि समयबद्ध संचालन सुनिश्चित किया जाए और यदि किसी कारणवश देरी हो, तो उसकी स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी उपलब्ध कराई जाए।
मंगलवार की यह स्थिति यात्रियों के लिए असुविधाजनक जरूर रही, लेकिन उम्मीद है कि भविष्य में रेलवे प्रशासन समय प्रबंधन और तकनीकी सुधारों के जरिए इस समस्या का स्थायी समाधान खोजेगा। यात्रियों की अपेक्षा है कि रेल सेवाएं अधिक भरोसेमंद और समयनिष्ठ बनें, ताकि सफर सुगम और तनावमुक्त हो सके।

