
पहाड़ों की बर्फ ने बढ़ाई मैदानों की कंपकंपी, शीतलहर का दौर जारी; 27 जनवरी से मौसम फिर लेगा करवट
देश के पहाड़ी राज्यों में हो रही लगातार बर्फबारी अब मैदानी इलाकों के लिए भी सर्दी की बड़ी वजह बन गई है। उत्तर भारत के कई हिस्सों में ठंडी हवाओं की रफ्तार तेज होने से तापमान तेजी से नीचे गिरा है। हालात ऐसे हैं कि दिन में निकल रही हल्की धूप भी ठंड के असर को कम नहीं कर पा रही। सुबह और शाम की सर्दी लोगों को घरों में कैद रहने पर मजबूर कर रही है।

बीते कुछ दिनों में मौसम का मिजाज बार-बार बदला है। पहले चार दिन तक हल्की गर्माहट महसूस हुई, लेकिन उसके बाद अचानक मौसम ने पलटी मारी और ठंड दोबारा लौट आई। हाल ही में हुई बारिश के कारण वातावरण में नमी बनी हुई है, जिसने सर्दी की चुभन को और बढ़ा दिया है। ठंडी हवाओं के साथ बढ़ी नमी के कारण लोगों को ज्यादा ठिठुरन महसूस हो रही है।
मौसम में आए इस बदलाव का असर जनजीवन के साथ-साथ पर्यावरण पर भी देखने को मिला है। नमी बढ़ने से प्रदूषण का स्तर कुछ हद तक घटा है और हवा अपेक्षाकृत साफ हुई है। हालांकि, ठंड के इस दौर में बुजुर्गों, बच्चों और बीमार लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है। डॉक्टरों का कहना है कि ठंड से जुड़ी बीमारियों से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी जरूरी है।
भारतीय कृषि प्रणाली अनुसंधान संस्थान, मोदीपुरम के मौसम वैज्ञानिक डॉ. एम. शमीम के अनुसार, फिलहाल अगले दो दिन तक मौसम में किसी बड़ी राहत की उम्मीद नहीं है। शीतलहर का प्रभाव बना रहेगा और तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा। इसके बाद 27 जनवरी से एक बार फिर बारिश होने की संभावना जताई गई है। इस बारिश के बाद ठंड और बढ़ सकती है, खासकर रात के तापमान में और गिरावट दर्ज की जा सकती है।
मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में ठंडी हवाओं के साथ-साथ कोहरा भी परेशानी बढ़ा सकता है। ऐसे में लोगों को सलाह दी गई है कि वे गर्म कपड़े पहनें, सुबह-शाम बाहर निकलने से बचें और मौसम को देखते हुए अपनी दिनचर्या तय करें।
कुल मिलाकर, पहाड़ों की बर्फबारी का असर अभी लंबे समय तक मैदानी इलाकों में महसूस किया जा सकता है। शीतलहर के इस दौर में सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है, क्योंकि मौसम के तेवर फिलहाल नरम पड़ते नजर नहीं आ रहे हैं।



