
नूंह में बेटे का खौफनाक हमला, मां गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती
हरियाणा के नूंह जिले से एक दर्दनाक और सनसनीखेज घटना सामने आई है, जिसमें एक बेटे ने अपनी ही मां पर चाकू से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। इस वारदात का कारण महिला द्वारा अपने पहले पति और पांच बच्चों को छोड़कर दूसरी शादी करना बताया जा रहा है। घटना ने इलाके में सुरक्षा और पारिवारिक विवादों के प्रति लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

पिनांगवा कस्बे के भाट कॉलोनी में रहने वाली वहीदान (35 वर्ष) अपने पहले पति के साथ पलवल जिले के छैंसा गांव में रहती थीं। वहीदान के पहले विवाह से उन्हें पांच बच्चे हैं। हालांकि, कुछ समय पहले ही उन्होंने अपने पहले पति और बच्चों को छोड़कर पिनांगवा आकर दूसरी शादी कर ली। स्थानीय लोगों की मानें तो वहीदान इस नई शादी में काफी खुश थीं और पिछले 12 दिनों से अपने दूसरे पति के साथ किराए के मकान में रह रही थीं।
लेकिन वहीदान के बड़े बेटे को उनकी मां का यह कदम बिल्कुल पसंद नहीं आया। बेटे का गुस्सा इस कदर बढ़ गया कि उसने अपनी मां पर जानलेवा हमला करने का फैसला कर लिया। सोमवार, 26 जनवरी को यह विवाद खूनी रूप में बदल गया। बेटे ने अपनी मां पर चाकू से ताबड़तोड़ वार किए, खासकर उनके हाथ और पैरों पर हमला किया, जिससे वहीदान लहूलुहान होकर जमीन पर गिर पड़ीं। वारदात के तुरंत बाद आरोपी बेटे ने मौके से फरार हो गया।
घायल महिला को तुरंत मंडी खेड़ा स्थित अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। पुनहाना के पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) जितेंद्र राणा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह पारिवारिक विवाद का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने कहा कि महिला पर हमला उसके बड़े बेटे ने किया था, हालांकि अब तक परिवार की ओर से कोई लिखित शिकायत दर्ज नहीं हुई है। जल्द ही प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली जाएगी और आरोपी की तलाश तेज कर दी गई है।
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, वहीदान शादी से पहले भी कई बार पिनांगवा के अपने दूसरे पति से मिलने आती थीं। उनके पहले पति और बच्चों को तब इस नई शादी की भनक लगी जब वहीदान घर छोड़कर चली गईं। बेटे के गुस्से का मुख्य कारण यही था कि उनकी मां ने पहले परिवार को छोड़कर दूसरी शादी कर ली। इस घटना ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि पारिवारिक विवादों और व्यक्तिगत फैसलों के चलते अक्सर हिंसा की घटनाएँ सामने आती हैं।
पुलिस ने बताया कि आरोपी बेटे को पकड़ने के लिए आसपास के संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और law enforcement agencies मामले को गंभीरता से ले रहे हैं, ताकि जल्द ही आरोपी को गिरफ्तार किया जा सके और पीड़िता को न्याय मिल सके।
घटना के बाद पूरे पिनांगवा क्षेत्र में सनसनी फैल गई है। ग्रामीण और पड़ोसी इस बात से परेशान हैं कि कैसे एक परिवारिक विवाद ने जानलेवा रूप ले लिया। कई लोग सोशल मीडिया पर भी इस मामले की चर्चा कर रहे हैं और यह सवाल उठा रहे हैं कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए समाज और परिवार को क्या कदम उठाने चाहिए।
पुलिस अधिकारियों ने यह भी चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की हिंसा को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और आरोपी को किसी भी हाल में पकड़ा जाएगा। साथ ही, उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस मामले में किसी भी तरह की अफवाहों पर विश्वास न करें और केवल आधिकारिक सूचनाओं का ही पालन करें।
यह घटना हमें यह सोचने पर मजबूर करती है कि पारिवारिक रिश्तों में समझौते और संवाद कितने महत्वपूर्ण हैं। कभी-कभी छोटी-छोटी असहमति भी बड़े संकट का रूप ले लेती है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे मामलों में परिवार और समाज को समय रहते मध्यस्थता करनी चाहिए, ताकि किसी की जान को खतरा न हो।
अस्पताल में भर्ती वहीदान की हालत गंभीर बनी हुई है। डॉक्टरों का कहना है कि उनकी जान फिलहाल खतरे में है और उन्हें लगातार चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है। वहीं, आरोपी बेटे की गिरफ्तारी के लिए पुलिस की टीमें पूरे इलाके में सक्रिय हैं।
इस घटना ने पूरे नूंह जिले में सुरक्षा और पारिवारिक विवादों को लेकर एक चेतावनी की तरह काम किया है। लोगों का कहना है कि परिवार में आपसी तालमेल, संवाद और समझदारी बहुत जरूरी है। अगर समय पर इन चीजों पर ध्यान दिया जाए तो ऐसी खौफनाक घटनाओं को रोका जा सकता है।
पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल पारिवारिक विवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें जानलेवा हमला भी शामिल है, इसलिए आरोपी पर गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी। इस घटना ने यह भी दिखा दिया कि कभी-कभी पारिवारिक कलह और व्यक्तिगत फैसलों में असहमति खतरनाक रूप ले सकती है।
स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि वे पीड़िता और उनके परिवार के साथ हर तरह का सहयोग करेंगे। साथ ही, उन्होंने यह सुनिश्चित करने की बात कही है कि आरोपी को जल्द गिरफ्तार किया जाए और घटना की न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाई जाए।
नूंह की यह घटना एक चेतावनी है कि पारिवारिक विवादों को हल्के में नहीं लेना चाहिए। संवादहीनता और गुस्से का परिणाम कभी-कभी बहुत गंभीर हो सकता है। सामाजिक और कानूनी संस्थाओं की जिम्मेदारी है कि वे ऐसे मामलों में समय पर हस्तक्षेप करें और हिंसा को रोकें।

