
नांगलोई में अचार फैक्टरी बना मौत का गड्ढा: मजदूर को बचाने उतरे पिता-पुत्र की दम घुटने से मौत, दो की हालत गंभीर
दिल्ली के पश्चिमी हिस्से में स्थित नांगलोई इलाके से शनिवार शाम एक बेहद दुखद घटना सामने आई, जहां घर के अंदर चल रही एक अचार बनाने की फैक्टरी में जहरीली गैस के कारण दो लोगों की मौत हो गई। मृतकों में फैक्टरी मालिक और उनका बेटा शामिल हैं।

यह हादसा राव विहार क्षेत्र के एक मकान में हुआ, जहां अचार को गलाने के लिए बनाए गए गहरे गड्ढे में उतरने के बाद चार लोग अचानक बेहोश हो गए थे। इनमें से दो की मौत हो गई, जबकि दो अन्य लोगों की हालत गंभीर बताई जा रही है और उनका इलाज जारी है।
घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और स्थानीय लोग इस हादसे को बेहद दर्दनाक बता रहे हैं।
घर के भीतर चल रहा था अचार बनाने का काम
पुलिस के अनुसार, 60 वर्षीय अनिल अपने परिवार के साथ राव विहार इलाके के एक मकान में रहते थे। उन्होंने अपने घर के ग्राउंड फ्लोर पर अचार बनाने का छोटा सा यूनिट बना रखा था।
इसी जगह पर विभिन्न प्रकार के अचार तैयार किए जाते थे। अचार को गलाने और पकाने के लिए जमीन के भीतर कई गहरे गड्ढे बनाए गए थे, जिनकी गहराई लगभग 10 फीट बताई जा रही है।
इन गड्ढों में अचार को विशेष केमिकल और मसालों के साथ कई दिनों तक रखा जाता था ताकि वह धीरे-धीरे तैयार हो सके।
अचार गलाने की प्रक्रिया
अचार बनाने की इस प्रक्रिया में पहले कच्चे फल या सब्जियों को मसालों और अन्य सामग्री के साथ तैयार किया जाता है। इसके बाद उन्हें बड़े कंटेनरों या गड्ढों में डाल दिया जाता है।
इन गड्ढों को कई बार ढककर रखा जाता है ताकि अंदर गर्मी और रासायनिक प्रक्रिया के कारण अचार जल्दी गल सके।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के बंद गड्ढों में कभी-कभी जहरीली गैस बन जाती है, जो इंसान के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है।
मजदूर के नीचे उतरते ही बिगड़ी हालत
शनिवार शाम करीब छह बजे फैक्टरी में काम करने वाला एक मजदूर अचार को देखने और उसे ऊपर-नीचे करने के लिए गड्ढे में उतरा था।
जैसे ही वह नीचे पहुंचा, अचानक उसकी तबीयत खराब होने लगी। कुछ ही क्षणों में वह बेहोश होकर वहीं गिर पड़ा।
ऊपर मौजूद लोगों को जब उसकी कोई आवाज या प्रतिक्रिया नहीं मिली तो उन्हें लगा कि शायद वह बेहोश हो गया है।
बचाने उतरे पिता और बेटे
मजदूर की हालत देखकर फैक्टरी मालिक अनिल तुरंत वहां पहुंचे। उन्होंने अपने बेटों नीरज और संदीप को आवाज देकर बुलाया।
तीनों ने मिलकर मजदूर को बाहर निकालने की कोशिश करने का फैसला किया और गड्ढे में उतर गए।
लेकिन गड्ढे के अंदर मौजूद जहरीली गैस के कारण कुछ ही मिनटों में उनकी भी हालत बिगड़ने लगी और वे भी अचेत हो गए।
ऊपर खड़े लोगों में मची अफरा-तफरी
जब ऊपर मौजूद अन्य कर्मचारियों ने देखा कि चारों लोग अंदर बेहोश हो गए हैं, तो वहां अफरा-तफरी मच गई।
लोगों ने जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया और आसपास के लोगों को मदद के लिए बुलाया।
इसके बाद अनिल के भाई सुभाष भी मौके पर पहुंचे और उन्होंने पड़ोसियों के साथ मिलकर बचाव कार्य शुरू किया।
रस्सी और सीढ़ी से निकाले गए चारों लोग
सुभाष और अन्य लोगों ने तुरंत रस्सी और सीढ़ी की व्यवस्था की और एक-एक करके चारों को गड्ढे से बाहर निकालने की कोशिश की।
काफी मशक्कत के बाद चारों को बाहर निकाला गया, लेकिन उस समय उनकी हालत बेहद गंभीर थी।
अनिल और उनके बेटे नीरज के शरीर में कोई हलचल नहीं दिखाई दे रही थी, जबकि संदीप और मजदूर की सांसें चल रही थीं।
अस्पताल ले जाया गया
घायलों को तुरंत एंबुलेंस और पीसीआर की मदद से संजय गांधी अस्पताल पहुंचाया गया।
डॉक्टरों ने जांच के बाद अनिल और नीरज को मृत घोषित कर दिया।
वहीं संदीप और मजदूर को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया, जहां उनका इलाज चल रहा है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत अभी भी गंभीर बनी हुई है।
दम घुटने से हुई मौत
घटना की सूचना मिलने के बाद दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीम मौके पर पहुंची।
पुलिस ने घटनास्थल की जांच की और फॉरेंसिक टीम को भी बुलाया गया।
बाहरी जिले के पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में दम घुटने की वजह से मौत होने की बात सामने आई है।
जहरीली गैस बनने की आशंका
पुलिस का मानना है कि अचार बनाने के दौरान इस्तेमाल किए गए केमिकल की वजह से गड्ढे के अंदर जहरीली गैस बन गई होगी।
जब मजदूर गड्ढे में उतरा तो वह उसी गैस की चपेट में आ गया। बाद में उसे बचाने के लिए उतरे अन्य लोग भी उसी गैस से प्रभावित हो गए।
पहले भी हो चुके हैं ऐसे हादसे
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह के हादसे कई बार उन जगहों पर होते हैं जहां बंद टैंक, गड्ढे या सीवर में बिना जांच के लोग उतर जाते हैं।
ऐसी जगहों पर कार्बन मोनोऑक्साइड, मीथेन या अन्य जहरीली गैसें जमा हो सकती हैं, जो कुछ ही सेकंड में इंसान को बेहोश कर सकती हैं।
सुरक्षा उपायों की जरूरत
औद्योगिक सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी बंद गड्ढे या टैंक में उतरने से पहले गैस की जांच करना जरूरी होता है।
इसके अलावा कर्मचारियों को सुरक्षा उपकरण जैसे मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर और सेफ्टी बेल्ट का इस्तेमाल करना चाहिए।
अगर इन नियमों का पालन किया जाए तो ऐसे हादसों को काफी हद तक रोका जा सकता है।
इलाके में शोक का माहौल
इस हादसे के बाद पूरे राव विहार इलाके में शोक का माहौल है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अनिल लंबे समय से अचार बनाने का काम कर रहे थे और इलाके में उन्हें एक मेहनती व्यक्ति के रूप में जाना जाता था।
एक ही घटना में पिता और बेटे की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
पुलिस कर रही जांच
पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह भी देखा जा रहा है कि घर के अंदर चल रही इस फैक्टरी के लिए जरूरी लाइसेंस और सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे या नहीं।
फॉरेंसिक रिपोर्ट और पोस्टमार्टम के बाद ही हादसे की पूरी सच्चाई सामने आ सकेगी।
फिलहाल पुलिस का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।



