
नकली दवाइयों का जाल उजागर, करोड़ों का खेल, 6 आरोपी दबोचे
दिल्ली में लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ करने वाले एक खतरनाक नकली दवा गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। क्राइम ब्रांच की साइबर सेल ने इस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई में पुलिस ने भारी मात्रा में नकली दवाइयां बरामद की हैं, जो गंभीर बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली थीं और अगर बाजार में पहुंचतीं तो कई लोगों की जान खतरे में पड़ सकती थी।

पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के पास से करीब 1.20 लाख नकली टैबलेट और कैप्सूल जब्त किए गए हैं। ये दवाइयां डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, इंफेक्शन और लीवर जैसी बीमारियों के इलाज के नाम पर तैयार की गई थीं। खास बात यह है कि इन नकली दवाइयों की पैकेजिंग और ब्रांडिंग इतनी असली जैसी थी कि आम व्यक्ति के लिए असली और नकली में फर्क कर पाना बेहद मुश्किल था।
इस पूरे मामले का खुलासा एक गुप्त सूचना के आधार पर हुआ। पुलिस को जानकारी मिली थी कि दिल्ली में नकली दवाइयों का एक बड़ा रैकेट सक्रिय है, जो अंतरराज्यीय स्तर पर काम कर रहा है। सूचना के आधार पर 11 मार्च 2026 को शाहदरा के बिहारी कॉलोनी में छापेमारी की गई। इस दौरान पुलिस ने निखिल अरोड़ा उर्फ सन्नी को गिरफ्तार किया, जो भगीरथ पैलेस में ‘बाबा श्याम मेडिकोज’ के नाम से दुकान चला रहा था।
जांच में यह सामने आया कि यह गिरोह फर्जी जीएसटी कंपनियों के जरिए अपने अवैध कारोबार को अंजाम दे रहा था। आरोपी नकली कंपनियों के नाम पर बिल बनाकर अपने लेन-देन को वैध दिखाने की कोशिश करते थे और टैक्स से भी बचते थे। पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह ने अब तक करीब 50 करोड़ रुपये के फर्जी बिल तैयार किए थे, जो इस नेटवर्क के बड़े पैमाने पर फैले होने की ओर इशारा करता है।
गिरफ्तार किए गए अन्य आरोपियों की पहचान शिवम त्यागी, मयंक अग्रवाल, मोहित शर्मा, शाहरुख और राहुल के रूप में हुई है। पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह के हर सदस्य की भूमिका तय थी। कुछ लोग नकली दवाइयों के निर्माण और पैकिंग में लगे थे, जबकि कुछ लोग उनकी सप्लाई और मार्केट में खपत का काम संभालते थे। वहीं, दो आरोपी फर्जी जीएसटी फर्म बनाकर पूरे नेटवर्क को कानूनी जामा पहनाने में मदद करते थे।
जांच के दौरान पुलिस को एक और बड़ी सफलता मिली, जब इस गिरोह से जुड़ी एक अवैध दवा फैक्ट्री का पता चला। यह फैक्ट्री उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में संचालित की जा रही थी। पुलिस ने वहां छापा मारकर फैक्ट्री को सील कर दिया और मौके से करीब 2000 किलो कच्चा माल, दवा बनाने की मशीनें और पैकिंग से जुड़ा सामान बरामद किया।
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, इस फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर नकली दवाइयां तैयार की जाती थीं और फिर उन्हें दिल्ली समेत कई राज्यों में सप्लाई किया जाता था। गिरोह लंबे समय से इस अवैध धंधे में लिप्त था और लगातार अपने नेटवर्क को बढ़ा रहा था। हालांकि, पुलिस की सतर्कता और समय पर कार्रवाई के चलते इस पूरे रैकेट का खुलासा हो सका।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि ये नकली दवाइयां गंभीर बीमारियों के मरीजों तक पहुंच सकती थीं। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसी दवाइयां मरीजों के इलाज को पूरी तरह बेअसर कर सकती हैं या उनकी हालत को और बिगाड़ सकती हैं। कई मामलों में तो नकली दवाइयां जानलेवा भी साबित हो सकती हैं।
पुलिस का कहना है कि इस गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा था और कई राज्यों में फैला हुआ था। ऐसे में यह आशंका जताई जा रही है कि इनके द्वारा तैयार की गई नकली दवाइयां पहले से ही बाजार में पहुंच चुकी होंगी। फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है, ताकि इससे जुड़े अन्य लोगों को भी पकड़कर कानून के दायरे में लाया जा सके।
क्राइम ब्रांच के अधिकारियों ने बताया कि सभी गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ जारी है और उनसे कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की उम्मीद है। पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह से जुड़े अन्य सप्लायर और ग्राहक कौन-कौन हैं।
यह मामला केवल एक आपराधिक घटना नहीं है, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा है। नकली दवाइयों का कारोबार सीधे तौर पर लोगों की जान से जुड़ा होता है, इसलिए इस पर सख्त कार्रवाई करना बेहद जरूरी है।
फिलहाल पुलिस इस मामले में हर एंगल से जांच कर रही है और उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही इस पूरे नेटवर्क का पूरी तरह से खुलासा हो जाएगा। साथ ही लोगों को भी जागरूक रहने की जरूरत है, ताकि वे दवाइयां खरीदते समय सतर्क रहें और किसी भी संदिग्ध उत्पाद से बच सकें।



