उत्तर प्रदेश

देशव्यापी हड़ताल से वाराणसी ठप, बैंकों-एलआईसी में ताले; 300 करोड़ का लेनदेन प्रभावित

केंद्रीय श्रम संगठनों, बैंक यूनियनों और किसान संगठनों के आह्वान पर आयोजित एक दिवसीय देशव्यापी हड़ताल का वाराणसी जिले में व्यापक असर देखने को मिला। सुबह से ही शहर के प्रमुख बैंक, बीमा कार्यालय और कई सरकारी संस्थान बंद रहे। सड़कों पर उतरे कर्मचारियों, मजदूरों, रेलकर्मियों और महिला संगठनों ने चार नए श्रम संहिताओं के विरोध में जोरदार प्रदर्शन किया। हड़ताल के चलते बैंकिंग लेनदेन बुरी तरह प्रभावित हुआ और अनुमानित 300 करोड़ रुपये का कारोबार ठप रहा।

बैंकों में तालाबंदी, सेवाएं बाधित

यूपी बैंक इंप्लाइज यूनियन के सहायक महामंत्री संजय शर्मा और अध्यक्ष आरबी चौबे ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक को छोड़कर जिले की 350 से अधिक सरकारी बैंक शाखाओं में पूर्ण तालाबंदी रही। शहर के विभिन्न इलाकों—नदेसर, कैंट, सिगरा, लहुराबीर और कचहरी—स्थित बैंक शाखाओं के बाहर ताले लटकते दिखे।

हड़ताल के कारण कैश जमा-निकासी, चेक क्लीयरेंस, नेफ्ट और आरटीजीएस जैसी ऑनलाइन सेवाएं भी प्रभावित रहीं। व्यापारियों, वेतनभोगियों और छोटे उद्यमियों को दिनभर परेशानी उठानी पड़ी। यूनियन के मुताबिक, एक ही दिन में लगभग 300 करोड़ रुपये का बैंकिंग लेनदेन प्रभावित हुआ।

प्रदर्शनकारी बैंक ऑफ बड़ौदा और नदेसर स्थित इंडियन बैंक के अंचल कार्यालय पहुंचे। इंडियन बैंक कार्यालय विरोध का मुख्य केंद्र बना, जहां 250 से अधिक कर्मचारियों ने नारेबाजी की। कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के अधिकारों को कमजोर करती हैं और निजीकरण को बढ़ावा देती हैं। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि पांच दिवसीय कार्य सप्ताह और श्रमिक हितों से जुड़ी मांगें नहीं मानी गईं तो अनिश्चितकालीन हड़ताल पर भी विचार किया जाएगा।

कचहरी में प्रदर्शन, ज्ञापन सौंपा

कचहरी स्थित आंबेडकर पार्क में विभिन्न संगठनों ने संयुक्त धरना-प्रदर्शन किया। ऑल इंडिया सेंट्रल काउंसिल ऑफ ट्रेड यूनियंस (एआईसीसीटीयू) के नेतृत्व में निर्माण मजदूर यूनियन, घरेलू कामगार संगठन, खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा, आशा वर्कर्स यूनियन, किसान महासभा और ऐपवा सहित कई संगठनों ने भाग लिया।

प्रदर्शनकारियों ने चौकी इंचार्ज जमुना प्रसाद तिवारी को राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा। साथ ही श्रम कार्यालय पहुंचकर अपर श्रमायुक्त को भी अपनी मांगों से अवगत कराया। वक्ताओं ने कहा कि श्रम संहिताओं के माध्यम से काम के घंटे बढ़ाने और सामाजिक सुरक्षा घटाने की कोशिश की जा रही है, जिसे मजदूर वर्ग स्वीकार नहीं करेगा।

रेलकर्मियों का विशाल मार्च

डीएलडब्ल्यू (बरेका) रेल मजदूर यूनियन ने भी हड़ताल का समर्थन करते हुए शक्ति प्रदर्शन किया। कारखाना परिसर के पूर्वी गेट से प्रशासन भवन तक विशाल विरोध मार्च निकाला गया। हजारों रेलकर्मी हाथों में बैनर और झंडे लिए नारे लगाते हुए आगे बढ़े।

यूनियन के संगठन मंत्री सुशील कुमार सिंह और महामंत्री दीपक कुमार ने कहा कि नई श्रम संहिताएं कर्मचारियों की नौकरी की स्थिरता और सामाजिक सुरक्षा पर सीधा हमला हैं। अध्यक्ष प्रदीप कुमार यादव ने रेलवे कॉलोनी को आरएलडीए प्रोजेक्ट के तहत प्रभावित करने की योजना का विरोध किया और इसे कर्मचारियों के हितों के खिलाफ बताया। रेलकर्मियों ने स्पष्ट किया कि वे अपने अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक संघर्ष करने को तैयार हैं।

महिलाओं और स्कीम वर्कर्स की भागीदारी

हड़ताल में महिलाओं और स्कीम वर्कर्स की भागीदारी उल्लेखनीय रही। ऐपवा के बैनर तले घरेलू कामगार, आशा बहुएं और मनरेगा मजदूर बड़ी संख्या में आंबेडकर पार्क पहुंचे। प्रदेश सचिव कुसुम वर्मा ने कहा कि सरकार लेबर कोड के जरिए आठ घंटे कार्य दिवस और मातृत्व अवकाश जैसे अधिकारों को कमजोर करना चाहती है।

आशा कार्यकर्ता धर्मा और अन्य वक्ताओं ने स्कीम वर्कर्स को स्थायी दर्जा देने, समान काम के लिए समान वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग उठाई। किसान नेताओं कृपा वर्मा और आरडी सिंह ने भी प्रदर्शन में भाग लेकर इसे कॉर्पोरेट नीतियों के खिलाफ मजदूर-किसान एकता की लड़ाई बताया।

एलआईसी कार्यालयों में ताले

एक दिवसीय हड़ताल का असर एलआईसी कार्यालयों में भी साफ दिखा। वाराणसी मंडल के सभी आठ जिलों में एलआईसी के दफ्तर बंद रहे। बीमा धारकों को प्रीमियम जमा करने और अन्य सेवाओं के लिए परेशानी का सामना करना पड़ा।

वीडीआईईए के मंडल अध्यक्ष नारायण चटर्जी ने बताया कि हड़ताल के कारण मंडल में लगभग तीन करोड़ रुपये का कारोबार सीधे प्रभावित हुआ। भेलूपुर स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में सैकड़ों कर्मचारियों ने गेट जाम कर विरोध जताया। महामंत्री सुमंत कुमार, वीके सिंह, पंकज गुप्ता और संगीता गुप्ता ने कहा कि यह आंदोलन केवल वेतन वृद्धि तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाओं को निजीकरण से बचाने का संघर्ष है।

मोटरसाइकिल जुलूस और नारेबाजी

कैंट स्थित पंजाब नेशनल बैंक के मंडल कार्यालय से कर्मचारियों ने मोटरसाइकिल जुलूस निकाला। शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरते हुए उन्होंने केंद्र सरकार के खिलाफ नारे लगाए। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कई स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखी।

आमजन पर असर

हड़ताल के कारण आम नागरिकों और व्यापारियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। बैंक बंद रहने से कई जरूरी भुगतान अटक गए। एलआईसी कार्यालयों में कामकाज ठप रहने से बीमा धारकों की किस्तें जमा नहीं हो सकीं। हालांकि डिजिटल माध्यम से कुछ सेवाएं आंशिक रूप से चालू रहीं, लेकिन व्यापक स्तर पर लेनदेन बाधित रहा।

आगे की रणनीति

यूनियन नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार श्रमिक संगठनों के साथ संवाद स्थापित नहीं करती और मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाती, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा। पांच दिवसीय कार्य सप्ताह, सामाजिक सुरक्षा, न्यूनतम वेतन और निजीकरण पर रोक जैसी मांगों को लेकर भविष्य में व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

एक दिन की इस देशव्यापी हड़ताल ने वाराणसी में श्रमिक एकता की ताकत को सामने रखा। बैंकों से लेकर रेल कारखानों और बीमा कार्यालयों तक कामकाज ठप रहा। अब निगाहें इस पर टिकी हैं कि सरकार और श्रमिक संगठनों के बीच वार्ता का रास्ता कब और कैसे निकलता है।

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