
दिल्ली में 223 गैस सिलेंडर का अवैध भंडारण, दो आरोपी गिरफ्तार
दिल्ली में एलपीजी सिलेंडरों के अवैध भंडारण को लेकर पुलिस की कार्रवाई लगातार तेज होती जा रही है। इसी कड़ी में दक्षिणी जिला पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 223 गैस सिलेंडरों के साथ दो लोगों को गिरफ्तार किया है। यह मामला मैदानगढ़ी थाना क्षेत्र के राजपुर खुर्द गांव का है, जहां एक निजी गोदाम में बड़ी मात्रा में सिलेंडर गैरकानूनी तरीके से जमा किए गए थे।

पुलिस के अनुसार, इस पूरे मामले का खुलासा एक गुप्त सूचना के आधार पर हुआ। 17 मार्च को दक्षिणी जिला पुलिस को जानकारी मिली कि राजपुर खुर्द गांव के एक प्लॉट में बड़ी संख्या में एलपीजी सिलेंडर अवैध रूप से रखे गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और स्पेशल स्टाफ की एक टीम का गठन कर मौके पर छापा मारा गया।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने खसरा नंबर 28/2, जनरेटर वाली गली स्थित एक प्लॉट की तलाशी ली। जांच में सामने आया कि वहां कुल 223 इंडेन एलपीजी सिलेंडर रखे हुए थे। इनमें 16 भरे हुए घरेलू सिलेंडर, 45 खाली घरेलू सिलेंडर और 162 खाली कमर्शियल सिलेंडर शामिल थे। इतनी बड़ी संख्या में सिलेंडरों का एक साथ मिलना पुलिस के लिए भी चौंकाने वाला था।
मौके से पुलिस ने एक इलेक्ट्रॉनिक तौल मशीन और आठ सेफ्टी कैप भी बरामद किए। इससे यह अंदेशा और मजबूत हो गया कि यहां सिलेंडरों से जुड़ा कोई अवैध कारोबार चलाया जा रहा था। प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ कि यह पूरा भंडारण बिना किसी वैध लाइसेंस के किया जा रहा था, जो कि कानून का गंभीर उल्लंघन है।
इस मामले में पुलिस ने दो आरोपियों—हितेश राठी और अरविंद कुमार—को मौके से हिरासत में लिया। जांच में पता चला कि जिस गोदाम में सिलेंडर रखे गए थे, वह हितेश राठी का है, जबकि उसे अरविंद कुमार ने किराए पर लिया हुआ था। दोनों मिलकर इस अवैध भंडारण और संभावित बिक्री के काम में लगे हुए थे।
पुलिस ने जब दोनों आरोपियों से सिलेंडरों से संबंधित दस्तावेज मांगे, तो वे कोई भी वैध कागजात पेश नहीं कर सके। इससे साफ हो गया कि यह पूरा काम गैरकानूनी तरीके से किया जा रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, ये सिलेंडर क्षेत्र में आपूर्ति के लिए आए थे और उपयोग के बाद इन्हें गैस एजेंसी को वापस किया जाना था। लेकिन आरोपियों ने ऐसा न करते हुए इन्हें अपने पास ही जमा कर लिया और अवैध रूप से बेचने की योजना बना रहे थे।
इस तरह का अवैध भंडारण न सिर्फ कानून के खिलाफ है, बल्कि यह आम लोगों की सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा साबित हो सकता है। खासकर घनी आबादी वाले इलाके में इतने अधिक सिलेंडरों का बिना किसी सुरक्षा इंतजाम के रखा जाना किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता था। यदि इनमें से किसी सिलेंडर में लीकेज या आग लग जाती, तो स्थिति बेहद भयावह हो सकती थी।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अधिकारियों और इंडेन गैस कंपनी के प्रतिनिधियों को मौके पर बुलाया। उन्होंने बरामद सिलेंडरों का सत्यापन किया और पुष्टि की कि ये सिलेंडर अधिकृत तरीके से वहां नहीं रखे गए थे।
इसके बाद पुलिस ने मैदानगढ़ी थाने में मामला दर्ज कर लिया। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 287, 288, 61(2) और आवश्यक वस्तु अधिनियम की धारा 7 के तहत एफआईआर दर्ज की गई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में यह भी जांच की जा रही है कि क्या इस अवैध कारोबार में और लोग भी शामिल हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि सिलेंडरों की सप्लाई कहां-कहां की जा रही थी और कितने समय से यह धंधा चल रहा था।
इस कार्रवाई के बाद पुलिस ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि उन्हें अपने आसपास किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि नजर आए, खासकर गैस सिलेंडरों या अन्य खतरनाक वस्तुओं के अवैध भंडारण से जुड़ी, तो तुरंत पुलिस को सूचना दें। समय रहते दी गई जानकारी किसी बड़े हादसे को टाल सकती है।
दिल्ली में इस तरह के मामलों का सामने आना यह भी दिखाता है कि अवैध तरीके से मुनाफा कमाने के लिए कुछ लोग किस हद तक जा सकते हैं। हालांकि, पुलिस की सतर्कता और समय पर की गई कार्रवाई ने एक संभावित बड़े खतरे को टाल दिया है। अब देखना होगा कि जांच में और क्या खुलासे होते हैं और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों पर कब तक कार्रवाई होती है।



