हरियाणा

दिल्ली–अंबाला रेल मार्ग पर हाई-टेक सुरक्षा की तैयारी: 421.41 करोड़ रुपये से सिग्नलिंग सिस्टम होगा आधुनिक

भारतीय रेल अपने सबसे व्यस्त रेल मार्गों में से एक दिल्ली–अंबाला कॉरिडोर को तकनीकी रूप से और मजबूत बनाने जा रही है। रेल मंत्रालय ने उत्तर रेलवे के अंतर्गत आने वाले इस महत्वपूर्ण सेक्शन पर सिग्नलिंग व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए 421.41 करोड़ रुपये के बजट को मंजूरी दी है। इस कदम का उद्देश्य न केवल रेल हादसों पर अंकुश लगाना है, बल्कि ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित, तेज और सुव्यवस्थित बनाना भी है।

दिल्ली और अंबाला रेल मंडल देश के उन नेटवर्क का हिस्सा हैं जहां ट्रेनों की आवाजाही अत्यधिक घनी है। इन रूटों पर रोजाना बड़ी संख्या में यात्री ट्रेनें, मालगाड़ियां और विशेष सेवाएं संचालित होती हैं। बढ़ते ट्रैफिक के बीच पारंपरिक सिग्नलिंग व्यवस्था पर दबाव भी बढ़ा है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब पारंपरिक मैकेनिकल इंटरलॉकिंग सिस्टम को हटाकर कंप्यूटर आधारित इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (ईआई) प्रणाली लागू की जाएगी।

क्या है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग?

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक उन्नत सिग्नलिंग तकनीक है, जिसमें ट्रैक, सिग्नल और पॉइंट्स का नियंत्रण डिजिटल प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। यह सिस्टम सुनिश्चित करता है कि किसी भी समय दो ट्रेनों को एक ही ट्रैक पर प्रवेश की अनुमति न मिले। इससे टक्कर जैसी दुर्घटनाओं की संभावना बेहद कम हो जाती है।

पारंपरिक प्रणाली में कई प्रक्रियाएं मैन्युअल या अर्ध-स्वचालित होती थीं, जिनमें मानवीय त्रुटि की गुंजाइश रहती थी। नई डिजिटल प्रणाली में सॉफ्टवेयर आधारित नियंत्रण और रीयल-टाइम मॉनिटरिंग से सुरक्षा स्तर और बेहतर होगा।

किन स्टेशनों पर होगा उन्नयन?

योजना के तहत दिल्ली रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले हाई डेंसिटी नेटवर्क के 21 स्टेशनों पर इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम लगाया जाएगा। इसके लिए 292.24 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

इसी तरह अंबाला रेल मंडल के 13 स्टेशनों को भी इस आधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा, जिस पर 129.17 करोड़ रुपये खर्च होंगे। कुल मिलाकर 34 स्टेशनों पर सिग्नलिंग ढांचे में व्यापक बदलाव किए जाएंगे।

कवच प्रणाली के साथ तालमेल

इन स्टेशनों पर पहले से स्वीकृत स्वदेशी ट्रेन सुरक्षा प्रणाली ‘कवच’ को भी इस उन्नयन के साथ समन्वित किया जाएगा। कवच एक स्वचालित ट्रेन सुरक्षा तकनीक है, जो सिग्नल उल्लंघन या संभावित टक्कर की स्थिति में स्वतः ब्रेक लगा सकती है।

जब इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग और कवच एक साथ कार्य करेंगे, तो सुरक्षा की कई परतें तैयार होंगी। इससे सिग्नल पासिंग एट डेंजर (एसपीएडी) जैसी घटनाओं में कमी आएगी और आपात स्थितियों में तुरंत प्रतिक्रिया संभव होगी।

पिंक बुक परियोजना का हिस्सा

यह परियोजना वर्ष 2024-25 की पिंक बुक में शामिल व्यापक 1,547 करोड़ रुपये के विकास कार्यक्रम का हिस्सा है। पिंक बुक रेलवे की वार्षिक विकास योजनाओं का दस्तावेज होती है, जिसमें बुनियादी ढांचे, मशीनरी और रोलिंग स्टॉक से जुड़े कार्यों का उल्लेख रहता है।

अंबाला रेल मंडल के प्रबंधक विनोद भाटिया के अनुसार, नई प्रणाली से सिग्नल और ट्रैक पॉइंट्स का संचालन अधिक सटीक और केंद्रीकृत होगा। इससे परिचालन में पारदर्शिता और नियंत्रण दोनों बेहतर होंगे।

यात्रियों और परिचालन को लाभ

इस तकनीकी उन्नयन से यात्रियों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के लाभ मिलेंगे।

सुरक्षा में वृद्धि: डिजिटल नियंत्रण प्रणाली से दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।

समयबद्धता में सुधार: ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुव्यवस्थित होने से देरी में कमी आ सकती है।

अधिक क्षमता: व्यस्त मार्गों पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की संभावना बनेगी।

तेज प्रतिक्रिया: किसी तकनीकी गड़बड़ी या आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई संभव होगी।

बढ़ते ट्रैफिक की चुनौती

दिल्ली–अंबाला सेक्शन उत्तर भारत के प्रमुख कॉरिडोर में से एक है। यह मार्ग पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर की ओर जाने वाली ट्रेनों के लिए महत्वपूर्ण कड़ी है। यात्री और माल परिवहन दोनों की दृष्टि से यह रूट रणनीतिक महत्व रखता है।

ट्रैफिक घनत्व बढ़ने के साथ पारंपरिक प्रणालियों की सीमाएं स्पष्ट हो रही थीं। इसलिए यह उन्नयन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर किया जा रहा है।

डिजिटल रेलवे की ओर कदम

भारतीय रेल पिछले कुछ वर्षों से डिजिटल परिवर्तन की दिशा में तेजी से काम कर रही है। स्वदेशी तकनीकों को अपनाने, स्वचालित प्रणालियों को लागू करने और डेटा-आधारित निगरानी तंत्र विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग का विस्तार इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य है—‘शून्य दुर्घटना’ की दिशा में आगे बढ़ना और विश्वस्तरीय सुरक्षा मानक स्थापित करना।

आगे की राह

रेल मंत्रालय की यह स्वीकृति संकेत देती है कि देश के व्यस्ततम रेल मार्गों पर सुरक्षा और दक्षता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। आने वाले समय में अन्य हाई डेंसिटी नेटवर्क पर भी इसी तरह के उन्नयन की संभावना है।

दिल्ली–अंबाला रेल मार्ग पर 421.41 करोड़ रुपये का यह निवेश केवल तकनीकी बदलाव नहीं, बल्कि सुरक्षित और भरोसेमंद रेल यात्रा की दिशा में एक मजबूत कदम है। इससे न केवल यात्रियों का विश्वास बढ़ेगा, बल्कि भारतीय रेल की परिचालन क्षमता भी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकेगी।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on X-twitter Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Back to top button