
‘दिन में भी चैन नहीं’: पूर्वी दिल्ली में मच्छरों का बढ़ता आतंक, डेंगू के मामलों ने बढ़ाई चिंता
पूर्वी दिल्ली के यमुनापार इलाके में इन दिनों मच्छरों का प्रकोप भयावह स्तर तक पहुंच गया है। हालात ऐसे हैं कि लोग अब केवल रात में ही नहीं, बल्कि दिन के समय भी मच्छरों के हमलों से परेशान हैं। घरों के अंदर बैठना मुश्किल हो गया है और बाहर निकलना भी जोखिम भरा महसूस होने लगा है। इसी बीच अब तक 9 लोगों में डेंगू की पुष्टि ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है।

दिन में भी मच्छरों की भरमार
आम तौर पर मच्छरों की सक्रियता शाम और रात में ज्यादा होती है, लेकिन यमुनापार के कई इलाकों में यह पैटर्न बदलता नजर आ रहा है। यहां सुबह से ही मच्छर लोगों को परेशान कर रहे हैं। लोग बताते हैं कि दिन में भी लगातार मच्छर काटते रहते हैं, जिससे शरीर पर लाल दाने और सूजन हो रही है।
इस असामान्य स्थिति के कारण लोग अब दिन के समय भी मच्छरदानी और रिपेलेंट का सहारा लेने लगे हैं।
डेंगू के बढ़ते मामले
इलाके में अब तक 9 लोगों के डेंगू से संक्रमित होने की खबर सामने आई है। यह संख्या भले ही शुरुआती लगती हो, लेकिन जिस तेजी से मच्छरों की संख्या बढ़ रही है, उससे साफ है कि खतरा बड़ा हो सकता है।
डेंगू के साथ-साथ मलेरिया और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का भी खतरा बढ़ गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अगर तुरंत कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या महामारी का रूप ले सकती है।
प्रभावित इलाके और लोगों की शिकायतें
दिल्ली के यमुनापार क्षेत्र के कई घनी आबादी वाले इलाके इस समस्या से जूझ रहे हैं। इनमें राम नगर विस्तार, जगजीवन नगर, जगतपुरी, ईस्ट नत्थू कॉलोनी, मौजपुर, जाफराबाद, लक्ष्मी नगर, शकरपुर, मंडावली और पटपड़गंज प्रमुख हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार नगर निगम में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई
मच्छरों के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण इलाके में बिगड़ी सफाई व्यवस्था को माना जा रहा है। लोगों का कहना है कि नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठाया जा रहा है और नालियों की सफाई भी नहीं हो रही।
इस वजह से गलियों और नालियों में गंदगी जमा हो गई है, जो मच्छरों के पनपने के लिए आदर्श वातावरण बनाती है।
रुका पानी बना खतरा
विशेषज्ञों के अनुसार, मच्छर खासतौर पर रुके हुए पानी में पनपते हैं। यमुनापार के कई इलाकों में पानी का जमाव आम बात हो गई है।
बरसात के पानी, कूलर, खुले टैंक और गंदे नालों में जमा पानी मच्छरों के लिए प्रजनन स्थल बन गया है। यही वजह है कि मच्छरों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
फॉगिंग और दवा छिड़काव की कमी
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि नगर निगम की ओर से न तो नियमित फॉगिंग की जा रही है और न ही कीटनाशक दवाओं का छिड़काव किया जा रहा है।
पहले जहां समय-समय पर इन उपायों से मच्छरों पर नियंत्रण रखा जाता था, अब उनकी कमी साफ दिखाई दे रही है। इससे लोगों की परेशानी और बढ़ गई है।
अधिकारियों की अनदेखी
जब इस मुद्दे पर संबंधित अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन कॉल का जवाब नहीं दिया। इससे लोगों में असंतोष और बढ़ गया है।
लोगों का कहना है कि जब जिम्मेदार अधिकारी ही समस्या को नजरअंदाज करेंगे, तो समाधान कैसे निकलेगा।
जनजीवन पर असर
मच्छरों के बढ़ते आतंक ने लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है। बच्चे बाहर खेलने से कतराने लगे हैं, बुजुर्गों की सेहत पर इसका बुरा असर पड़ रहा है और कामकाजी लोग भी परेशान हैं।
रात की नींद खराब हो रही है और दिन में भी आराम नहीं मिल पा रहा है, जिससे लोगों की कार्यक्षमता पर असर पड़ रहा है।
डॉक्टरों की सलाह
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस समय लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है। डेंगू और मलेरिया के लक्षण नजर आने पर तुरंत जांच करानी चाहिए।
बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर में दर्द और प्लेटलेट्स की कमी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
बचाव के उपाय
मच्छरों से बचने के लिए लोगों को कुछ जरूरी सावधानियां अपनानी चाहिए:
घर के आसपास पानी जमा न होने दें
मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल करें
पूरी बांह के कपड़े पहनें
कूलर और टंकी को नियमित साफ करें
घर और आसपास सफाई बनाए रखें
प्रशासन से उम्मीद
लोगों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द ही इस समस्या को गंभीरता से लेगा और जरूरी कदम उठाएगा। नियमित सफाई, फॉगिंग और दवा छिड़काव से ही इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
पूर्वी दिल्ली के यमुनापार इलाके में मच्छरों का बढ़ता प्रकोप एक बड़ा स्वास्थ्य संकट बनता जा रहा है। डेंगू के मामले सामने आने के बाद स्थिति और भी गंभीर हो गई है।
अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो यह समस्या और भी विकराल रूप ले सकती है। ऐसे में प्रशासन और जनता दोनों को मिलकर इस चुनौती का सामना करना होगा, ताकि लोगों को राहत मिल सके और बीमारियों के खतरे को कम किया जा सके।



