
दालमंडी में बुलडोजर कार्रवाई के बीच आगजनी, 21 जर्जर मकान ध्वस्त
वाराणसी के दालमंडी क्षेत्र में सोमवार को नगर निगम ने बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाया। जर्जर घोषित 21 भवनों को बुलडोजर से गिरा दिया गया। इस दौरान स्थानीय व्यापारियों और भवन स्वामियों ने विरोध जताया। कार्रवाई के बीच एक मकान मालिक द्वारा पेट्रोल छिड़ककर आग लगाने की घटना से इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने व्यापार मंडल अध्यक्ष सहित छह लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की है।

प्रशासनिक अमला और पुलिस बल तैनात
दोपहर करीब 12 बजे एसीपी दशाश्वमेध अतुल अंजान त्रिपाठी भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उनके साथ नगर निगम और पीडब्ल्यूडी के अधिकारी भी मौजूद थे। नगर निगम द्वारा पहले से चिह्नित जर्जर भवनों की सूची के आधार पर कार्रवाई शुरू की गई। अधिकारियों का कहना था कि सभी भवन मालिकों को 31 जनवरी को नोटिस जारी किया जा चुका था।

पहले चार मकानों को गिराने की प्रक्रिया शांतिपूर्वक पूरी हुई, लेकिन पांचवें भवन पर पहुंचते ही स्थिति तनावपूर्ण हो गई।
कोर्ट आदेश का दावा, फिर आगजनी
भवन संख्या सीके 40/71 पर जैसे ही मजदूरों ने टिन शेड हटाना शुरू किया, मकान मालिक रहमत अली छत की खिड़की से कागज लहराते हुए चिल्लाने लगा कि उसके पास अदालत का आदेश है और मकान जर्जर नहीं है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने उसे नीचे आने के लिए कहा, लेकिन वह लगातार विरोध करता रहा।

इसी दौरान उसने बोतल में भरा पेट्रोल नीचे टिन शेड और गली में खड़े पुलिसकर्मियों की ओर फेंक दिया। कुछ ही क्षणों में उसने पेट्रोल में आग लगा दी। टिन शेड में आग भड़क उठी और बाजार में अफरा-तफरी मच गई। लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। घटना के बाद रहमत मौके से फरार हो गया।
दमकल विभाग को सूचना दी गई और आग पर जल्द ही काबू पा लिया गया। समय रहते आग बुझा दिए जाने से बड़ा हादसा टल गया।
छह लोगों को लिया हिरासत में
घटना के बाद पुलिस ने सख्ती दिखाते हुए रहमत के भाई नौशाद को हिरासत में लिया। साथ ही दालमंडी व्यापार मंडल अध्यक्ष फारुक समेत कुल छह लोगों को पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। इस दौरान पुलिस और व्यापारियों के बीच तीखी बहस भी हुई।

व्यापारियों का कहना था कि जिन मकानों को जर्जर बताया जा रहा है, वे अभी सुरक्षित हैं। उन्होंने 10 दिन की अतिरिक्त मोहलत मांगी, लेकिन प्रशासन ने यह मांग अस्वीकार कर दी। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि नोटिस पहले ही जारी किया जा चुका था और कार्रवाई नियमों के अनुसार हो रही है।
महिलाओं का भी विरोध
कार्रवाई के दौरान कई घरों की महिलाएं बाहर निकल आईं और ध्वस्तीकरण का विरोध करने लगीं। कुछ महिलाएं रोती नजर आईं। उनका आरोप था कि उनके मकानों को गलत तरीके से जर्जर घोषित किया गया है। कुछ ने यह भी दावा किया कि उनके पास कोर्ट से स्थगन आदेश है, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम
पूरे अभियान के दौरान इलाके में बैरिकेडिंग की गई थी। दालमंडी आने-जाने वाले मार्गों पर पुलिस तैनात रही। आगजनी की घटना के बाद कुछ समय के लिए आवाजाही रोक दी गई। स्थिति पर नजर रखने के लिए ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया गया।
पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन केके सिंह ने बताया कि सूचीबद्ध सभी 21 जर्जर भवनों को ध्वस्त कर दिया गया है। अब तक कुल 50 मकानों को गिराया जा चुका है। मंगलवार से मलबा हटाने का कार्य शुरू किया जाएगा।
फरार आरोपी की तलाश जारी
पुलिस आगजनी की घटना में शामिल रहमत की तलाश कर रही है। उसके खिलाफ आगजनी और सरकारी कार्य में बाधा डालने जैसी धाराओं में मामला दर्ज करने की तैयारी है। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्थानीय व्यापारियों में नाराजगी बनी हुई है।
दालमंडी की यह कार्रवाई शहर में चर्चा का विषय बनी हुई है, जहां एक ओर प्रशासन इसे सुरक्षा के लिहाज से जरूरी कदम बता रहा है, वहीं दूसरी ओर प्रभावित परिवार इसे अन्यायपूर्ण बता रहे हैं।



