
तीन बहनें, नौवीं मंज़िल और कई सवाल: गाजियाबाद हादसे की परतें
गाजियाबाद में नौवीं मंज़िल से गिरकर तीन नाबालिग बहनों की मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। यह सिर्फ एक हादसा या आत्महत्या का मामला नहीं लगता, बल्कि इसके पीछे पारिवारिक तनाव, आर्थिक तंगी, भावनात्मक दबाव और किशोर मानसिकता से जुड़े कई ऐसे पहलू सामने आ रहे हैं, जो इस त्रासदी को और भी जटिल बना देते हैं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे इस दर्दनाक घटना की नई परतें खुलती जा रही हैं।

यह मामला उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद के एक हाई-राइज़ अपार्टमेंट से जुड़ा है, जहां एक ही परिवार की तीन नाबालिग बहनों की नौवीं मंज़िल से गिरकर मौत हो गई। शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या से जोड़कर देखा गया, लेकिन घटना के बाद जो तथ्य सामने आए, उन्होंने जांच एजेंसियों को भी उलझन में डाल दिया। सवाल यह नहीं है कि बच्चियों ने छलांग क्यों लगाई, बल्कि यह है कि उन्हें उस मानसिक स्थिति तक किसने और किन हालात ने पहुंचाया।
घटना के तुरंत बाद बच्चियों के पिता चेतन कुमार ने मीडिया को बताया कि उनकी बेटियां एक कथित “कोरियन गेम” खेल रही थीं, जिसमें टास्क पूरे करने होते हैं और अंतिम टास्क आत्महत्या करना था। इस बयान ने पूरे मामले को सनसनीखेज बना दिया। हालांकि, पुलिस ने कुछ ही घंटों में इस दावे को खारिज कर दिया। पुलिस का कहना था कि ऐसा कोई गेम सामने नहीं आया है, जो इस घटना से सीधे तौर पर जुड़ा हो। जांच में यह जरूर सामने आया कि तीनों बहनें कोरियाई ड्रामा और कोरियन कल्चर से काफी प्रभावित थीं।
पुलिस के मुताबिक, लड़कियों को कोरियाई सीरियल देखने का शौक था। वे अपने माता-पिता के मोबाइल फोन पर जो भी उपलब्ध होता था, वही देखती थीं। कोरियन ड्रामा की भावनात्मक कहानियां, किरदारों की गहरी संवेदनशीलता और रोमांटिक कल्पनाएं कम उम्र के बच्चों के मन पर गहरा असर डाल सकती हैं। जांच अधिकारियों का मानना है कि इन भावनात्मक कहानियों का असर बच्चियों की सोच और भावनात्मक स्थिति पर पड़ा हो सकता है, हालांकि इसे अकेला कारण नहीं माना जा रहा।
जांच में यह भी सामने आया कि तीनों बहनें कोरियन कल्चर से बेहद प्रभावित थीं। उन्हें के-फूड, फैशन और के-ब्यूटी पसंद थी। यहां तक कि वे किसी कोरियन लड़के से शादी करने की बातें भी किया करती थीं। पुलिस के अनुसार, घटना से कुछ दिन पहले पिता ने उनका मोबाइल फोन इस्तेमाल बंद करवा दिया था। बताया जा रहा है कि यह फैसला आर्थिक मजबूरी के चलते लिया गया था। पिता पर भारी कर्ज था और बिजली का बिल चुकाने के लिए उन्होंने बेटियों के मोबाइल फोन तक बेच दिए थे। संभव है कि यह पाबंदी बच्चियों को मानसिक रूप से आहत कर गई हो।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में आर्थिक तंगी को एक बड़ा कारण माना जा रहा है। चेतन कुमार एक स्टॉक ट्रेडर हैं और उन पर करीब दो करोड़ रुपये का कर्ज बताया जा रहा है। परिवार की आय सीमित थी, जबकि जिम्मेदारियां बहुत ज्यादा। दो पत्नियां, पांच बच्चे और एक मानसिक रूप से विकलांग बेटा—इन सबका खर्च उठाना उनके लिए बेहद मुश्किल हो गया था। पुलिस के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद आर्थिक हालात इतने खराब हो गए कि उन्होंने अपनी बेटियों को स्कूल भेजना भी बंद कर दिया था।
इस मामले में एक और संवेदनशील पहलू पिता की दो शादियों से जुड़ा है। चेतन कुमार की पहली पत्नी से एक बेटा और एक बेटी है, जबकि दूसरी पत्नी से तीन बेटियां—जो इस हादसे का शिकार हुईं। हैरानी की बात यह है कि दूसरी पत्नी पहली पत्नी की ही बहन है। पुलिस के अनुसार, पहली शादी के करीब 17 साल बाद चेतन कुमार ने अपनी साली से दूसरी शादी की थी। पारिवारिक रिश्तों की यह जटिलता भी घर के माहौल पर असर डाल रही थी।
परिवार की परेशानियां यहीं खत्म नहीं होतीं। पहली पत्नी से जन्मा 14 वर्षीय बेटा मानसिक रूप से विकलांग है, जिसकी देखभाल भी परिवार के लिए एक बड़ी चुनौती थी। आर्थिक तंगी, कर्ज का दबाव, बच्चों की पढ़ाई छूटना और पारिवारिक तनाव—इन सबने मिलकर घर का माहौल बेहद तनावपूर्ण बना दिया था। तीन साल पहले यह परिवार गाजियाबाद के इस अपार्टमेंट में आकर रहने लगा था, जब कोरोना महामारी अपने चरम पर थी।
घटना वाली रात का मंजर भी बेहद भयावह है। बुधवार तड़के करीब दो बजे अपार्टमेंट में रहने वाले कुछ लोगों ने नीचे किसी भारी चीज़ के गिरने की आवाज सुनी। कुछ ही पलों में हड़कंप मच गया। पास के फ्लैट में रहने वाले अरुण सिंह ने बताया कि उन्होंने अपनी बालकनी से तीनों लड़कियों को देखा था। उनके मुताबिक, सबसे बड़ी लड़की किनारे की ओर जा रही थी, जबकि बाकी दो उसे रोकने की कोशिश कर रही थीं। एक पल में तीनों नीचे गिर पड़ीं।
पुलिस जब लड़कियों के कमरे में पहुंची तो वहां का दृश्य भी कम चौंकाने वाला नहीं था। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था, जिसे तोड़कर पुलिस को अंदर जाना पड़ा। कमरे से एक नोटबुक मिली, जिसमें आठ पन्नों में कुछ संदेश लिखे थे। नोटबुक में माता-पिता के लिए लिखा गया था कि वे इसे पढ़ें, क्योंकि “इसमें सब कुछ सच है।” इसके अलावा, परिवार के सदस्यों की तस्वीरें एक घेरे में रखी हुई थीं, और एक मोबाइल फोन भी मिला, जिसके वॉलपेपर पर तीनों बहनों की तस्वीर थी। उन्होंने खुद को कोरियाई नाम भी दे रखे थे।
फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है। हालांकि इस घटना की तुलना कुख्यात ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’ से की जा रही है, लेकिन अभी तक ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला है, जो यह साबित करे कि बच्चियों ने किसी खतरनाक गेम के टास्क के तहत यह कदम उठाया। जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला किसी एक वजह का नहीं, बल्कि कई सामाजिक, आर्थिक और मानसिक दबावों का नतीजा हो सकता है।
गाजियाबाद की यह घटना एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है कि क्या हम बच्चों की मानसिक स्थिति, उनके भावनात्मक दबाव और पारिवारिक माहौल को समय रहते समझ पा रहे हैं या नहीं। तीन मासूम जिंदगियों का यूं चले जाना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है।



