
तरनतारन लॉ कॉलेज बना खून का मैदान: ‘ना’ कहने की सजा में बुझा जज बनने का सपना, सवालों के घेरे में सुरक्षा व्यवस्था
तरनतारन।
सोमवार की सुबह माई भागो लॉ कॉलेज में रोज़ की तरह छात्र-छात्राएं किताबें खोलकर भविष्य के सपनों में डूबे थे। किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही पलों में यह शिक्षण संस्थान गोलियों की आवाज़ से गूंज उठेगा और एक होनहार छात्रा का जीवन हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा। एकतरफा प्यार, अहंकार और अस्वीकार न कर पाने की मानसिकता ने एक बेटी की जान ले ली, जबकि आरोपी खुद भी मौत को गले लगा बैठा।

चंद सेकंड में उजड़ गया एक परिवार
करीब सवा नौ बजे का वक्त था। कक्षा में पढ़ाई चल रही थी। तभी लॉ का छात्र प्रिंसराज सिंह बैग के साथ क्लास में दाखिल हुआ। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता, उसने अपनी सहपाठी संदीप कौर के माथे पर बेहद करीब से गोली दाग दी। इसके बाद उसी पिस्तौल से उसने खुद को भी गोली मार ली। तीन सेकंड के भीतर दो जिंदगियां खत्म हो गईं।
क्लासरूम में मौजूद छात्र-छात्राएं चीखते-चिल्लाते बाहर भागे। पूरा कॉलेज परिसर दहशत में डूब गया।
वायरल वीडियो ने झकझोर दिया देश
इस सनसनीखेज वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है। वीडियो में दिखता है कि आरोपी बिना किसी बहस या चेतावनी के सीधे गोली चलाता है। यह वीडियो सिर्फ एक अपराध का दृश्य नहीं, बल्कि उस खतरनाक सोच का आईना है, जिसमें “ना” को अपमान समझ लिया जाता है।
पुलिस ने वीडियो को जांच का अहम हिस्सा बनाया है और फोरेंसिक टीम इसकी गहन पड़ताल कर रही है।
एकतरफा प्यार, बार-बार का दबाव
पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी प्रिंसराज सिंह लंबे समय से संदीप कौर पर दोस्ती और रिश्ते के लिए दबाव बना रहा था। उसने कई बार प्रपोज किया, लेकिन संदीप हर बार साफ शब्दों में इनकार करती रही।
संदीप का जवाब हर बार एक ही होता था—
“मेरी सगाई हो चुकी है, मैं परिवार के खिलाफ नहीं जा सकती।”
यह साफ इनकार आरोपी को मंजूर नहीं था। धीरे-धीरे यह जुनून और गुस्से में बदलता गया।
प्रपोज-डे से हत्या तक
सूत्रों के मुताबिक, प्रिंसराज ने प्रपोज-डे के मौके पर भी संदीप को फ्रेंडशिप के लिए कहा था। इनकार के बाद वह मानसिक रूप से अस्थिर हो गया। रविवार को भी उसने संदीप को फोन कर प्रस्ताव रखा, जिसकी जानकारी संदीप ने अपनी मां को दी थी।
अगले ही दिन वह कॉलेज बैग में पिस्तौल लेकर पहुंचा—एक खतरनाक इरादे के साथ।
जज बनने का सपना लिए थी संदीप
संदीप कौर का परिवार पहले ही मुश्किलों से जूझ रहा था। पिता का देहांत हो चुका है। सात बेटियों की परवरिश कर रही मां हरजिंदर कौर के लिए संदीप उम्मीद और सहारा थी।
मां ने बताया कि संदीप पढ़ाई में तेज थी और जज बनकर समाज में न्याय की मिसाल कायम करना चाहती थी। लेकिन एक सनकी सोच ने उसके सपनों को गोली मार दी।
“वह हमारे घर भी आता था”
परिजनों का कहना है कि आरोपी पहले भी उनके घर आ चुका था और संदीप से दोस्ती की बात करता था। कई बार मना करने के बावजूद वह पीछा नहीं छोड़ रहा था। यह मामला सिर्फ प्रेम का नहीं, बल्कि लगातार परेशान किए जाने का था।
कॉलेज प्रबंधन की भूमिका पर सवाल
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यह उठा कि कॉलेज परिसर में हथियार कैसे पहुंचा। परिजनों का आरोप है कि सुरक्षा व्यवस्था नाम मात्र की थी। उन्होंने बताया कि घटना के बाद उन्हें करीब 15 मिनट तक कॉलेज गेट के बाहर रोका गया।
इतना ही नहीं, परिवार का दावा है कि पहले उन्हें बताया गया कि संदीप को मामूली चोट आई है, लेकिन जब वे पहुंचे तो बेटी की लाश सामने थी।
पुलिस जांच और कॉलेज सील
घटना की सूचना मिलते ही डीएसपी जगबीर सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कॉलेज को तुरंत सील कर दिया गया। कक्षा और परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज जब्त कर ली गई है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपी को पिस्तौल कहां से मिली और क्या कॉलेज प्रशासन की ओर से लापरवाही हुई।
सवाल सिर्फ एक हत्या का नहीं
यह मामला सिर्फ एक छात्रा की हत्या का नहीं है, बल्कि यह उस मानसिकता का आईना है, जो महिला की असहमति को चुनौती समझती है। “ना” कहने का अधिकार अगर सुरक्षित नहीं है, तो समाज किस दिशा में जा रहा है—यह सबसे बड़ा सवाल है।
शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा पर बहस
दिनदहाड़े क्लासरूम में गोली चलना शिक्षा संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। क्या छात्रों की मानसिक स्थिति पर नजर रखने की कोई व्यवस्था है? क्या कॉलेजों में प्रवेश जांच पर्याप्त है?
समाज के लिए चेतावनी
संदीप की मौत एक चेतावनी है—परिवारों, शिक्षण संस्थानों और समाज के लिए। एकतरफा प्यार को रोमांटिक नहीं, खतरनाक मानने की जरूरत है। बेटियों को “ना” कहने की कीमत जान देकर नहीं चुकानी चाहिए।
आज एक जज बनने का सपना खत्म हुआ है, लेकिन अगर समाज नहीं जागा, तो ऐसे सपने बार-बार गोलियों का शिकार होते रहेंगे।


