
टैंक में उतरे और नहीं लौटे: जहरीली गैस ने ली दो भाइयों की जान
हरियाणा के पानीपत जिले से एक दर्दनाक हादसा सामने आया है, जिसने दो परिवारों की खुशियों को एक पल में मातम में बदल दिया। यहां एक फैक्टरी में काम करने गए दो चचेरे भाइयों की जहरीली गैस की चपेट में आने से मौत हो गई। यह हादसा उस समय हुआ जब दोनों पहली बार फैक्टरी में काम करने पहुंचे थे और उन्हें दूषित पानी के टैंक की सफाई का काम सौंप दिया गया।

मृतकों की पहचान नितिन (18) और शिवम (19) के रूप में हुई है, जो उत्तर प्रदेश के शामली जिले के कैराना क्षेत्र के जंधेड़ी गांव के निवासी थे। दोनों युवक अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए काम की तलाश में पानीपत आए थे। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा।
जानकारी के अनुसार, दोनों युवक अपने एक रिश्तेदार मोनू के साथ काम करने के लिए जलालपुर कुराड गांव के पास स्थित एक कंबल फैक्टरी में पहुंचे थे। सोमवार की सुबह करीब 10 बजे फैक्टरी प्रबंधन ने उन्हें दूषित पानी के एक गहरे टैंक की सफाई करने के लिए कहा। बताया जा रहा है कि टैंक करीब 20 फीट गहरा था और उसमें लंबे समय से गंदा पानी जमा था।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों युवकों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण के टैंक में उतार दिया गया। जैसे ही वे टैंक के अंदर पहुंचे, वहां जमा जहरीली गैस के कारण उनका दम घुटने लगा। कुछ ही मिनटों में दोनों बेहोश होकर टैंक के अंदर गिर पड़े।
जब काफी देर तक दोनों युवक बाहर नहीं आए, तो फैक्टरी में मौजूद अन्य लोगों को शक हुआ। इसके बाद एक अन्य व्यक्ति को रस्सी के सहारे टैंक में उतारा गया। उसने अंदर का नजारा देखा तो उसके होश उड़ गए। दोनों युवक बेसुध पड़े थे और कोई हरकत नहीं कर रहे थे।
इसके बाद तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस और फैक्टरी कर्मचारियों की मदद से दोनों को बाहर निकाला गया और पास के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया। हालांकि डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
मृतकों के परिजनों ने फैक्टरी प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि बिना सुरक्षा के इतने खतरनाक काम में युवकों को उतारना लापरवाही ही नहीं, बल्कि अपराध है। अगर उन्हें मास्क, ऑक्सीजन सिलेंडर या अन्य सुरक्षा उपकरण दिए गए होते, तो शायद उनकी जान बच सकती थी।
फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फैक्टरी प्रबंधन से पूछताछ की जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर औद्योगिक सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

