
झांसी में कर्ज और पिता की मौत का सदमा बना मौत की वजह, तेरहवीं के बाद बेटे ने कुएं में कूदकर की आत्महत्या
झांसी जिले के समथर थाना क्षेत्र से दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां पिता के इलाज में डूबे कर्ज और उनकी मौत के गहरे सदमे ने एक बेटे की जान ले ली। पिता की तेरहवीं के अगले ही दिन बेटे ने 80 फीट गहरे कुएं में छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली। इस घटना से पूरे गांव में शोक और सन्नाटा पसरा हुआ है।

गांव खूजा निवासी उदयभान अहिरवार खेती-किसानी के साथ मजदूरी कर परिवार का खर्च चलाता था। परिजनों के अनुसार, उसके पिता वृंदावन पिछले करीब दो साल से गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। इलाज के दौरान उदयभान ने करीब छह लाख रुपये का कर्ज ले लिया था। लगातार खर्च और आय के सीमित साधनों के कारण वह पहले से ही मानसिक दबाव में था।
16 जनवरी को पिता वृंदावन का निधन हो गया। इसके बाद उदयभान पूरी तरह टूट गया। परिवार वालों का कहना है कि वह अक्सर गुमसुम रहने लगा था और भविष्य को लेकर बेहद चिंतित रहता था। 28 जनवरी को उसने पिता की तेरहवीं की रस्म पूरी की। अगले दिन सुबह करीब छह बजे वह घर से निकला और खेतों की ओर चला गया, लेकिन दोबारा लौटकर नहीं आया।
कुछ देर बाद खेतों के पास स्थित कुएं से किसी के गिरने की आवाज सुनाई दी। आसपास काम कर रही महिलाओं को शक हुआ और उन्होंने तुरंत इसकी सूचना गांव में दी। परिजन और ग्रामीण मौके पर पहुंचे और कुएं में खोजबीन शुरू की। कुएं में करीब 50 फीट तक पानी भरा होने के कारण तुरंत कुछ पता नहीं चल सका।
स्थिति को देखते हुए वाटर पंप लगाकर कुएं का पानी निकलवाया गया। घंटों की मशक्कत के बाद जब पानी का स्तर नीचे गया, तब कुएं के अंदर उदयभान का शव दिखाई दिया। शव देखते ही परिवार में कोहराम मच गया और ग्रामीणों की आंखें नम हो गईं।
उदयभान अपने पीछे एक बेटा और दो बेटियां छोड़ गया है। उसका बेटा पंकज (25) और बेटी कौशल्या (22) की शादी हो चुकी है, जबकि छोटी बेटी सुंदरी (20) के लिए घरवाले रिश्ते की तलाश कर रहे थे। अब परिवार पर कर्ज के साथ-साथ इस हादसे का गहरा दुख भी टूट पड़ा है।
समथर थाना प्रभारी अतुल कुमार राजपूत ने बताया कि कुएं से शव बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्रारंभिक जांच में मामला आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है, लेकिन पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
यह घटना एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर करती है कि बीमारी, कर्ज और मानसिक तनाव किस तरह आम आदमी की जिंदगी को भीतर से तोड़ देता है, और समय पर सहारा न मिलने पर इसका अंजाम कितना भयावह हो सकता है।



