उत्तर प्रदेश

कोरोना के बाद ढिलाई पड़ी भारी: कानपुर में मलेरिया के केसों में जबरदस्त उछाल, छह साल में कई गुना बढ़ी मरीजों की संख्या

कानपुर: औद्योगिक नगरी कानपुर में एक बार फिर मलेरिया तेजी से फैलता नजर आ रहा है। कोरोना महामारी के दौरान जहां लोग साफ-सफाई और स्वास्थ्य को लेकर बेहद सतर्क हो गए थे, वहीं अब उसी सतर्कता में आई कमी शहर के लिए नई चुनौती बन गई है। हालात यह हैं कि पिछले कुछ वर्षों में मलेरिया के मामलों में कई गुना बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे स्वास्थ्य विभाग और आम लोगों की चिंता बढ़ गई है।

कोरोना काल में क्यों घटी बीमारी

जब कोरोना महामारी फैली, तब लोगों ने खुद को सुरक्षित रखने के लिए कई सख्त कदम उठाए। मास्क पहनना, बार-बार हाथ धोना, घर और आसपास की सफाई रखना—ये सब आदतें आम हो गई थीं। इसी का असर यह हुआ कि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां भी काफी हद तक नियंत्रण में आ गईं।

COVID-19 के दौरान किए गए सैनिटाइजेशन अभियान और साफ-सफाई ने मच्छरों के पनपने की संभावनाओं को कम कर दिया था। यही कारण रहा कि उस समय मलेरिया के मामले न्यूनतम स्तर पर पहुंच गए।

आंकड़े बता रहे पूरी कहानी

स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड के अनुसार, 2020 में मलेरिया के 17 केस सामने आए। 2021 में यह संख्या घटकर 15 रह गई और 2022 में तो केवल 8 मरीज ही दर्ज किए गए। लेकिन इसके बाद जैसे ही कोरोना का प्रभाव कम हुआ, मलेरिया ने फिर से सिर उठाना शुरू कर दिया।

2023 में मरीजों की संख्या 43 तक पहुंची, 2024 में यह बढ़कर 128 हो गई, और 2025 में अब तक 222 से अधिक केस सामने आ चुके हैं। यह बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं।

रिपोर्टिंग सिस्टम भी बना कारण

मामलों में वृद्धि का एक कारण नया डिजिटल पोर्टल सिस्टम भी है। अब यदि कोई व्यक्ति बाहर रहकर काम करता है और उसे मलेरिया हो जाता है, लेकिन उसके पहचान पत्र में पता कानपुर का है, तो उसका केस भी कानपुर के आंकड़ों में ही जुड़ जाता है।

स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, 2024 में दर्ज 128 मामलों में से लगभग 78 मरीज ऐसे थे, जिन्हें दूसरे राज्यों में संक्रमण हुआ था। बावजूद इसके, पोर्टल पर उन्हें कानपुर के आंकड़ों में शामिल किया गया, जिससे संख्या बढ़ी हुई नजर आई।

पहले भी रह चुका है खतरा

यह समस्या नई नहीं है। कोरोना से पहले भी कानपुर में मलेरिया के मामले काफी ज्यादा थे। 2018 में 403 और 2019 में 426 मरीज सामने आए थे। यानी कोरोना के दौरान आई गिरावट एक अस्थायी स्थिति थी, जो अब खत्म हो चुकी है।

लापरवाही से बढ़ रहा खतरा

विशेषज्ञों का मानना है कि लोगों की लापरवाही मलेरिया के बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है। अब लोग पहले की तरह साफ-सफाई पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। जगह-जगह पानी जमा हो रहा है, कूलर और टंकियों की नियमित सफाई नहीं हो रही, जिससे मच्छरों को पनपने का मौका मिल रहा है।

मलेरिया क्या है और कैसे फैलता है

Malaria एक संक्रामक बीमारी है, जो संक्रमित मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से फैलती है। यह बीमारी शरीर में प्रवेश कर खून को प्रभावित करती है और धीरे-धीरे शरीर के अन्य अंगों पर भी असर डाल सकती है।

पहचानें इसके लक्षण

डॉक्टरों के अनुसार, मच्छर के काटने के 2 से 3 सप्ताह के भीतर लक्षण सामने आते हैं। इनमें शामिल हैं:

तेज बुखार

ठंड लगना और कंपकंपी

सिर दर्द

कमजोरी और भूख में कमी

पसीना आना

कई बार बुखार एक दिन आता है और फिर गायब हो जाता है, जिससे मरीज इसे नजरअंदाज कर देता है।

खतरनाक रूप: पीएफ मलेरिया

मलेरिया का सबसे खतरनाक प्रकार पीएफ (प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम) है। यह शरीर के अंदर तेजी से असर करता है और अगर समय पर इलाज न मिले तो यह लीवर और किडनी को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

समय पर इलाज बेहद जरूरी

डॉक्टरों का कहना है कि मलेरिया के लक्षण दिखते ही तुरंत जांच करानी चाहिए। खुद से दवा लेना खतरनाक हो सकता है। सही समय पर इलाज मिलने से मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है।

बचाव के आसान उपाय

मलेरिया से बचाव के लिए कुछ सरल लेकिन प्रभावी उपाय अपनाए जा सकते हैं:

घर और आसपास पानी जमा न होने दें

कूलर और फ्रिज का पानी हर सप्ताह बदलें

मच्छरदानी का उपयोग करें

फुल आस्तीन के कपड़े पहनें

छत पर रखे बर्तनों को खाली रखें

पशुबाड़ों में पानी नियमित रूप से बदलें

स्वास्थ्य विभाग की पहल

मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. हरिदत्त नेमी ने बताया कि मलेरिया को नियंत्रित करने के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं। टीमों को घर-घर जाकर जागरूकता फैलाने और मच्छरों के पनपने वाले स्थानों को खत्म करने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि कोरोना के दौरान अपनाई गई सावधानियां अगर फिर से अपनाई जाएं, तो मलेरिया को काफी हद तक रोका जा सकता है।

जागरूकता ही समाधान

विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सरकारी प्रयास काफी नहीं हैं। जब तक आम लोग खुद जिम्मेदारी नहीं समझेंगे, तब तक इस समस्या पर पूरी तरह काबू पाना मुश्किल होगा।

निष्कर्ष

कानपुर में मलेरिया के बढ़ते मामले एक चेतावनी हैं कि स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही कितनी भारी पड़ सकती है। कोरोना ने हमें सिखाया था कि थोड़ी सी सतर्कता से बड़ी बीमारियों को रोका जा सकता है।

अब समय है कि हम फिर से वही आदतें अपनाएं—साफ-सफाई, जागरूकता और समय पर इलाज—ताकि मलेरिया जैसी बीमारी को दोबारा काबू में लाया जा सके और शहर को सुरक्षित बनाया जा सके।

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