उत्तर प्रदेश

काशी को मिलेगा नया पहचान वाला सिग्नेचर ब्रिज, फरवरी से शुरू होगा निर्माण कार्य

वाराणसी में गंगा नदी पर एक और भव्य और आधुनिक पुल बनने की तैयारी लगभग पूरी हो चुकी है। मालवीय पुल के पास प्रस्तावित सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण कार्य अगले महीने फरवरी से शुरू होने की पूरी संभावना है। यह ब्रिज न सिर्फ काशी की यातायात व्यवस्था को मजबूत करेगा, बल्कि रेलवे नेटवर्क, व्यापार और पर्यटन को भी नई गति देगा। रेल मंत्रालय की ओर से पुल निर्माण के लिए कंपनी के चयन की प्रक्रिया अंतिम दौर में है और फरवरी के पहले सप्ताह में इसके पूरा होने की उम्मीद जताई जा रही है।

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी जाएगी। माना जा रहा है कि पीएम अपने वाराणसी दौरे के दौरान नगर निगम के नए सदन की आधारशिला भी रख सकते हैं। ऐसे में काशी को एक साथ दो बड़े विकास कार्यों की सौगात मिलने जा रही है। सिग्नेचर ब्रिज को लेकर प्रशासन और रेलवे दोनों स्तरों पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं।

गंगा नदी पर बनने वाला यह सिग्नेचर ब्रिज ऐतिहासिक मालवीय पुल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर, उसके समानांतर बनाया जाएगा। यह पुल नमो घाट से पड़ाव के बीच बनेगा और रेल व सड़क दोनों के लिए उपयोग में आएगा। ब्रिज के निर्माण का लक्ष्य करीब तीन वर्षों में इसे पूरा करने का रखा गया है। परियोजना की निगरानी उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल द्वारा गठित विशेष टीम करेगी, ताकि निर्माण कार्य गुणवत्ता और समयसीमा के अनुसार पूरा हो सके।

इस सिग्नेचर ब्रिज की डिजाइन इसे खास बनाती है। करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह पुल 1074 मीटर लंबा होगा। इसके निचले हिस्से में चार लेन का रेलवे ट्रैक बनाया जाएगा, जिससे ट्रेनों की आवाजाही आसान और तेज होगी। वहीं ऊपरी हिस्से में छह लेन की चौड़ी सड़क बनाई जाएगी, जिससे शहर के दोनों किनारों के बीच सड़क यातायात को बड़ी राहत मिलेगी। इस व्यवस्था से पुराने मालवीय पुल पर यातायात का दबाव भी कम होगा।

रेलवे अधिकारियों के अनुसार, ब्रिज निर्माण के लिए गंगा नदी के बीच आधुनिक तकनीक से आठ मजबूत पिलर खड़े किए जाएंगे। ये पिलर नदी के बहाव, जलस्तर और मौसम की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए डिजाइन किए जाएंगे, ताकि पुल लंबे समय तक सुरक्षित और टिकाऊ बना रहे। इसके साथ ही वाराणसी रेलवे स्टेशन और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन को जोड़ने के लिए नया रेलवे ट्रैक भी विकसित किया जाएगा, जिससे रेल यातायात और अधिक सुचारु हो सकेगा।

सिग्नेचर ब्रिज के बनने से वाराणसी की कनेक्टिविटी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। यह शहर पहले से ही धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन के लिहाज से देश-दुनिया में प्रसिद्ध है। बेहतर सड़क और रेल संपर्क से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आवागमन में सहूलियत मिलेगी। इससे होटल, रेस्टोरेंट, ट्रांसपोर्ट और स्थानीय कारोबार को भी बड़ा फायदा होने की उम्मीद है।

व्यापारिक दृष्टि से भी यह ब्रिज बेहद अहम माना जा रहा है। रेलवे ट्रैक की क्षमता बढ़ने से मालगाड़ियों की आवाजाही तेज होगी, जिससे पूर्वांचल के व्यापार और उद्योगों को लाभ मिलेगा। साथ ही सड़क मार्ग बेहतर होने से आसपास के जिलों का वाराणसी से संपर्क और मजबूत होगा। इससे रोजगार के नए अवसर भी पैदा होने की संभावना है।

इस परियोजना को लेकर लंबे समय से योजनाएं बनाई जा रही थीं। बीते साल 8 नवंबर को काशी दौरे पर आए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित सिग्नेचर ब्रिज स्थल का निरीक्षण किया था। उस दौरान उन्होंने इस पुल को देश के सबसे बड़े और आधुनिक ब्रिजों में से एक बताया था। उनके इस बयान के बाद से ही इस परियोजना को लेकर लोगों में उत्साह और उम्मीदें बढ़ गई थीं।

उत्तर रेलवे के एडीआरएम बीके यादव ने बताया कि सिग्नेचर ब्रिज निर्माण से जुड़ी सभी आवश्यक औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं। कंपनी के चयन सहित अन्य प्रक्रियाएं रेल मंत्रालय के नियमों के अनुसार पूरी की जा रही हैं। जैसे ही ये प्रक्रियाएं पूरी होंगी, निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि परियोजना को तय समय में पूरा करने के लिए हर स्तर पर निगरानी रखी जाएगी।

कुल मिलाकर, सिग्नेचर ब्रिज वाराणसी के विकास में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा। यह पुल आधुनिक तकनीक, मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर कनेक्टिविटी का प्रतीक बनेगा। इसके निर्माण से न सिर्फ काशी की तस्वीर बदलेगी, बल्कि यह आने वाले वर्षों में पूर्वांचल की आर्थिक और सामाजिक प्रगति को भी नई दिशा देगा।

Join WhatsApp Channel Join Now
Subscribe and Follow on YouTube Subscribe
Follow on Facebook Follow
Follow on X-twitter Follow
Download from Google Play Store Download

Related Articles

Back to top button