
कानपुर से लापता किशोरी को बंगाल ले जाकर रचाया ‘खूनी निकाह’, आरोपी महिला गिरफ्तार
उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले से एक बेहद सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसमें एक नाबालिग किशोरी को कथित तौर पर समलैंगिक प्रेम के जाल में फंसाकर पश्चिम बंगाल ले जाया गया। वहां आरोपी महिला ने न केवल उसे अपने साथ रखा, बल्कि अपने खून से उसकी मांग भरकर ‘निकाह’ जैसा नाटक भी किया। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए किशोरी को बरामद कर लिया और आरोपी महिला को गिरफ्तार कर लिया।

घटना कानपुर के साढ़ थाना क्षेत्र की है, जहां रहने वाली एक किशोरी 5 अप्रैल को अचानक घर से लापता हो गई थी। परिजनों ने पहले अपने स्तर पर उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली तो 7 अप्रैल को उसकी बड़ी बहन ने थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में ‘नव्या’ नाम की एक महिला पर किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप लगाया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत जांच शुरू कर दी। शुरुआत में यह एक सामान्य गुमशुदगी का मामला लग रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आने लगे। पुलिस ने सर्विलांस और तकनीकी साधनों की मदद से किशोरी की लोकेशन ट्रैक की, जिससे पता चला कि वह पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले में मौजूद है।
इसके बाद पुलिस की एक विशेष टीम को पश्चिम बंगाल रवाना किया गया। स्थानीय पुलिस की मदद से संदिग्ध स्थान पर पहुंचकर जब जांच की गई, तो पता चला कि ‘नव्या’ नाम की महिला असल में रूमाना खातून (21) है, जो तलाकशुदा है और वहीं की रहने वाली है।
पुलिस ने जब आरोपी के ठिकाने पर छापेमारी की, तो वहां से कई अहम सुराग मिले। आरोपी महिला के मोबाइल फोन की जांच करने पर कुछ वीडियो और तस्वीरें बरामद हुईं, जिनमें वह किशोरी की मांग अपने खून से भरती हुई दिखाई दे रही थी। इन तस्वीरों और वीडियो के आधार पर यह अंदेशा लगाया गया कि महिला ने इस तरह की रस्में निभाकर किशोरी को अपने साथ रखने का प्रयास किया और इसे ‘निकाह’ का रूप देने की कोशिश की।
हालांकि, पुलिस के पहुंचने से पहले ही आरोपी महिला को इसकी भनक लग गई और वह किशोरी को लेकर वहां से फरार हो गई। जांच के दौरान पता चला कि वह ट्रेन के जरिए गुरुग्राम की ओर भागने की योजना बना रही है। इसके बाद पुलिस ने तुरंत सभी संबंधित एजेंसियों को अलर्ट कर दिया और रेलवे स्टेशनों पर निगरानी बढ़ा दी गई।
आखिरकार पुलिस को सफलता मिली और आरोपी महिला को एक रेलवे स्टेशन पर गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के समय किशोरी भी उसके साथ थी, जिसे सुरक्षित बरामद कर लिया गया। बाद में किशोरी को उसके परिवार, खासतौर पर उसकी बहनों के सुपुर्द कर दिया गया।
थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपी महिला के खिलाफ अपहरण समेत अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। साथ ही, मोबाइल फोन से मिले वीडियो और तस्वीरों को भी साक्ष्य के रूप में जांच में शामिल किया गया है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी ने किशोरी को किस तरह अपने जाल में फंसाया और क्या इस मामले में कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल है।
प्रारंभिक जांच से यह भी संकेत मिले हैं कि आरोपी महिला ने सोशल मीडिया के जरिए किशोरी से संपर्क स्थापित किया था। बातचीत के दौरान उसने धीरे-धीरे किशोरी का भरोसा जीता और फिर उसे अपने साथ चलने के लिए राजी कर लिया। इसके बाद वह उसे अपने गृह जनपद पश्चिम बंगाल ले गई, जहां उसने उसे अपने प्रभाव में बनाए रखने के लिए इस तरह की रस्मों का सहारा लिया।
इस घटना ने समाज में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर नाबालिग बच्चों की सुरक्षा और सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव को लेकर। विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोगों के बीच संपर्क बढ़ा है, लेकिन इसके साथ ही अपराध के नए तरीके भी सामने आ रहे हैं।
पुलिस ने अभिभावकों से अपील की है कि वे अपने बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखें और उन्हें अजनबी लोगों से दूरी बनाए रखने की सलाह दें। साथ ही, किसी भी संदिग्ध स्थिति में तुरंत पुलिस को सूचित करें।
फिलहाल पुलिस इस पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है। आरोपी महिला से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि क्या इस घटना के पीछे कोई बड़ा गिरोह या नेटवर्क सक्रिय है।
यह मामला इस बात का स्पष्ट संकेत है कि डिजिटल युग में सतर्कता बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही या अनजान व्यक्ति पर भरोसा बड़ी मुसीबत का कारण बन सकता है। ऐसे में जागरूक रहना और समय पर सही कदम उठाना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।



