
कपसाड़ में खौफ और सियासत: मां की हत्या, बेटी लापता; गांव की हर सड़क पर पुलिस, नेताओं की आमने-सामने भिड़ंत
मेरठ।
सरधना क्षेत्र के कपसाड़ गांव में एक अनुसूचित जाति की महिला की हत्या और उसकी बेटी के रहस्यमय अपहरण ने गांव को ठप कर दिया है। हालात इतने बिगड़ गए कि प्रशासन को गांव के चारों ओर कड़ा सुरक्षा घेरा बनाना पड़ा। ढाई किलोमीटर पहले से बैरिकेडिंग कर दी गई और गांव पूरी तरह पुलिस के नियंत्रण में है।

बेटी की तलाश जारी, आरोपियों तक नहीं पहुंच सकी पुलिस
अपहृत युवती रूबी का दूसरे दिन भी कोई सुराग नहीं मिला। नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से परिवार और ग्रामीणों का गुस्सा बढ़ता गया। मां सुनीता का शव पूरे दिन घर में रखा रहा। परिवार का साफ कहना था—बेटी की सुरक्षित वापसी के बिना अंतिम संस्कार नहीं होगा।
नेताओं और संगठनों की भीड़ से बढ़ा तनाव
घटना की जानकारी मिलते ही सपा, बसपा, भीम आर्मी, कांग्रेस और अन्य संगठनों के नेता गांव पहुंचने लगे। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गया। सुबह के समय सपा विधायक अतुल प्रधान को गांव में प्रवेश से रोके जाने पर माहौल और गरमा गया, हालांकि बाद में पीड़ित परिवार की मांग पर उन्हें अंदर जाने दिया गया।
19 घंटे बाद प्रशासन ने लिखित आश्वासन दिया
लगातार दबाव और हंगामे के बाद प्रशासन ने पीड़ित परिवार से लिखित समझौता किया। इसमें 48 घंटे के भीतर रूबी की बरामदगी, 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को स्थायी नौकरी, शस्त्र लाइसेंस और गांव में स्थायी पुलिस तैनाती का भरोसा दिया गया। इसके बाद देर शाम सुनीता का अंतिम संस्कार किया गया।
500 से ज्यादा पुलिसकर्मी, हर आने-जाने वाले पर नजर
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए एसएसपी समेत तमाम वरिष्ठ अधिकारी मौके पर मौजूद रहे। चार सीओ, 20 इंस्पेक्टर, 150 दरोगा और 500 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए। आरआरएफ की टीम लगातार गश्त करती रही और गांव में आने-जाने वालों की सघन जांच की गई।
सबसे बड़ा सवाल अब भी अनुत्तरित
इतनी सुरक्षा, इतने वादों और इतनी सियासत के बीच गांव के हर घर में सिर्फ एक ही सवाल गूंज रहा है—
रूबी कहां है?



