
आयुष हत्याकांड से दहला बरगढ़, गम के बीच उबाल पर जनआक्रोश
चित्रकूट जिले के बरगढ़ कस्बे में कपड़ा व्यापारी के मासूम बेटे आयुष की अपहरण के बाद हत्या ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया है। यह वारदात अब केवल एक परिवार की निजी त्रासदी नहीं रही, बल्कि पूरे कस्बे के लिए गहरे सदमे और आक्रोश की वजह बन गई है। शनिवार को जब आयुष की अंतिम यात्रा उसके घर से निकली, तो बरगढ़ की सड़कें खामोश थीं और हर आंख नम नजर आई। लोगों के मन में एक ही सवाल था कि आखिर एक निर्दोष बच्चे के साथ इतनी क्रूरता कैसे की जा सकती है।

अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद दर्दनाक था। जैसे ही आयुष की अर्थी उठी, मां आरती खुद को संभाल नहीं सकीं और बेसुध होकर गिर पड़ीं। उनका करुण क्रंदन हर किसी का दिल चीर रहा था। वह बार-बार यही कहती रहीं कि उनके बेटे ने आखिर किसी का क्या बिगाड़ा था, जो उसे इस बेरहमी से मार दिया गया। आसपास मौजूद महिलाएं उन्हें ढांढस बंधाने और संभालने का प्रयास करती रहीं, लेकिन मां का दुख थमने का नाम नहीं ले रहा था। वहीं पिता अशोक केसरवानी चेहरे पर मजबूती दिखाने की कोशिश करते रहे, मगर बेटे को खोने का दर्द उनसे भी छुपाए नहीं छुप रहा था। पूरे परिवार को संभालना मुश्किल हो गया था।

इस दर्दनाक घटना के विरोध और मासूम आयुष को श्रद्धांजलि देने के लिए बरगढ़ के व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठान बंद रखे। आम दिनों में रौनक से भरा बाजार पूरी तरह सूना नजर आया। हर दुकान पर ताले लटके थे और कस्बे में सन्नाटा पसरा हुआ था। व्यापारियों और स्थानीय लोगों का कहना था कि यह घटना सिर्फ एक परिवार पर हमला नहीं है, बल्कि समाज की सुरक्षा व्यवस्था पर सीधा सवाल है। लोगों ने एकजुट होकर दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की मांग की।
अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में ग्रामीण, सामाजिक संगठनों के सदस्य, जनप्रतिनिधि और परिचित शामिल हुए। आयुष के शव को देखकर हर कोई भावुक हो उठा। लोग आपस में चर्चा करते दिखे कि जब एक मासूम बच्चा सुरक्षित नहीं है, तो आम लोगों की सुरक्षा का क्या भरोसा किया जाए। शुक्रवार रात से ही कस्बे में शोक का माहौल बना हुआ था। लगातार लोग पीड़ित परिवार के घर पहुंचकर संवेदना जता रहे थे। मानिकपुर विधायक अविनाश चंद्र द्विवेदी भी मौके पर पहुंचे और परिवार को ढांढस बंधाया।

घटना के बाद क्षेत्र में गुस्सा भी साफ तौर पर देखने को मिला। लोगों का आक्रोश अपराधियों के खिलाफ था और वे कड़ी सजा की मांग कर रहे थे। हालात को देखते हुए पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आया। शनिवार को एसपी अरुण कुमार सिंह, एसडीएम आरआर रमन, सीओ फहद अली और भारी पुलिस बल के साथ बरगढ़ पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर निष्पक्ष कार्रवाई और न्याय का भरोसा दिलाया। एसपी ने कहा कि मामले की जांच हर पहलू से की जा रही है और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।

एसपी ने व्यापारियों और स्थानीय लोगों से भी संवाद किया और सुरक्षा को लेकर आश्वस्त किया। उन्होंने कहा कि किसी को डरने की जरूरत नहीं है, पुलिस पूरी तरह सतर्क है। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कोई व्यक्ति इस घटना को लेकर लोगों को भड़काने या माहौल खराब करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। पुलिस प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और पीड़ित परिवार के साथ संवेदनशीलता दिखाने की अपील की।

इस मामले में मुख्य आरोपी कल्लू उर्फ साहबे आलम पुलिस मुठभेड़ में मारा गया। पुलिस के मुताबिक, वह एक शातिर अपराधी था और कई गंभीर मामलों में वांछित चल रहा था। आयुष के अपहरण और हत्या के बाद पुलिस लगातार उसकी तलाश में जुटी थी। सर्विलांस के जरिए उसकी लोकेशन ट्रेस कर पुलिस ने उसे घेर लिया। पुलिस का दावा है कि आरोपी ने फायरिंग कर भागने की कोशिश की, जिसके बाद आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई में वह मारा गया।
शनिवार को आरोपी का पोस्टमार्टम कराया गया। इस दौरान उसके पिता मकसूद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, लेकिन मीडिया के सवालों से बचते नजर आए। कैमरे को देखते ही उन्होंने अपना चेहरा ढक लिया और किसी भी सवाल का जवाब नहीं दिया। पुलिस ने पोस्टमार्टम हाउस में ही पंचनामा भरते हुए सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी कीं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि कल्लू उर्फ साहबे आलम कानून से बचने के लिए बार-बार अपना नाम और पहचान बदलता था। वह प्रयागराज के घूरपुर थाने में हत्या समेत कई संगीन मामलों में वांछित था। चुनाव और त्योहारों के दौरान पुलिस की सक्रियता बढ़ने पर वह अपना ठिकाना बदल लेता था। बरगढ़ में वह एक दुकान पर काम करते हुए खुद को सामान्य मजदूर बताकर रह रहा था। वर्ष 2017 से 2020 के बीच उसके खिलाफ हत्या, मारपीट, छेड़खानी और धमकी जैसे कई गंभीर मामले दर्ज हो चुके थे।
इतने आपराधिक इतिहास के बावजूद उसने बरगढ़ में एक मासूम बच्चे का अपहरण कर उसकी गला दबाकर हत्या कर दी, जिसने पूरे इलाके को झकझोर दिया। यह हृदय विदारक घटना कानून-व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आज बरगढ़ शोक में डूबा है, लेकिन लोगों की मांग साफ है कि दोषियों को ऐसी सजा मिले, जिससे भविष्य में कोई और मासूम इस तरह की दरिंदगी का शिकार न बने।



