
‘आजादी’ की कीमत 40 हजार: उन्नाव में पत्नी ने रची साजिश, सुपारी किलर्स से कराई पति की हत्या—मोबाइल कॉल्स ने खोला राज
उन्नाव के चमरौली गांव में सामने आया हत्याकांड रिश्तों की टूटन, घरेलू हिंसा और अपराध की भयावह कड़ी को उजागर करता है। एक महिला ने अपने ही पति से छुटकारा पाने के लिए 40 हजार रुपये की सुपारी देकर उसकी हत्या करवा दी। पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने पूरे मामले को और भी चौंकाने वाला बना दिया है।

एक खेत, एक शव और कई सवाल
19 मार्च की सुबह गांव के बाहर एक गेहूं के खेत में एक व्यक्ति का शव मिलने से हड़कंप मच गया। मृतक की पहचान 35 वर्षीय ट्रक चालक श्रीकांत उर्फ जगली के रूप में हुई। शव की स्थिति देखकर स्पष्ट था कि यह कोई सामान्य मौत नहीं थी।
दोनों हाथ पीछे साड़ी से बंधे हुए थे और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पसलियां टूटने की पुष्टि हुई। बाहरी चोटें कम होने के बावजूद अंदरूनी चोटों से मौत होना इस बात की ओर इशारा कर रहा था कि हत्या योजनाबद्ध तरीके से की गई है।
परिवार की शिकायत और जांच की शुरुआत
मृतक की मां ने अपनी बहू और कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। इसी के आधार पर पुलिस ने जांच शुरू की और शुरुआती दौर में ही घर के भीतर की कहानी पर ध्यान केंद्रित किया गया।
जांच के दौरान पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लिया, जिसमें मोबाइल फोन की कॉल डिटेल सबसे अहम साबित हुई।
CDR बना केस का टर्निंग पॉइंट
जब पुलिस ने पत्नी सुखरानी के मोबाइल की कॉल डिटेल खंगाली, तो कुछ ऐसे नंबर सामने आए जिनसे बार-बार संपर्क किया गया था। यही सुराग पुलिस को सच्चाई के करीब ले गया।
अजगैन थाने के प्रभारी सुरेश सिंह के अनुसार, जब इन तथ्यों के आधार पर सुखरानी से पूछताछ की गई, तो उसने साजिश का पूरा खुलासा कर दिया।
प्रेम विवाह से शुरू, हिंसा में खत्म
सुखरानी ने बताया कि उसकी शादी श्रीकांत से प्रेम विवाह के जरिए हुई थी। शुरुआत में जीवन सामान्य था, लेकिन धीरे-धीरे पति का व्यवहार बदलने लगा।
उसके अनुसार, श्रीकांत शराब पीकर अक्सर उससे मारपीट करता था और उनके छोटे बच्चे को भी नहीं छोड़ता था। इसके साथ ही वह उस पर शक करता और मानसिक रूप से प्रताड़ित करता था।
यह लगातार बढ़ती प्रताड़ना ही उस मोड़ तक पहुंची, जहां उसने पति की हत्या की साजिश रच डाली।
सुपारी किलर्स से हुआ सौदा
सुखरानी ने अपने परिचित अंकित यादव और मोहित सिंह से संपर्क किया। दोनों को उसने अपने पति की हत्या के लिए 40 हजार रुपये देने का प्रस्ताव दिया।
दोनों आरोपियों ने 20-20 हजार रुपये में यह काम करने की हामी भर दी। योजना के तहत समय और स्थान तय किया गया और पूरी साजिश को अंजाम देने की तैयारी शुरू हो गई।
हत्या की रात: साजिश बनी हकीकत
17 मार्च की रात सुखरानी अपने पति को बहाने से गांव के एक खेत में ले गई। यह वही स्थान था जहां पहले से दोनों सुपारी किलर्स छिपे हुए थे।
जैसे ही श्रीकांत वहां पहुंचा, आरोपियों ने उसे पकड़ लिया। विरोध करने पर उसके हाथ साड़ी से बांध दिए गए और उस पर हमला कर दिया गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
हत्या के बाद शव को वहीं छोड़ दिया गया और आरोपी फरार हो गए।
गिरफ्तारी और सबूत
पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। उनके पास से मोबाइल फोन और सुपारी की रकम का हिस्सा भी बरामद किया गया।
अंकित यादव से 5,250 रुपये और मोहित सिंह से 5,700 रुपये बरामद हुए। यह रकम उस 40 हजार रुपये का हिस्सा थी, जो हत्या के लिए दी गई थी।
आरोपियों का आपराधिक रिकॉर्ड
जांच में यह भी सामने आया कि दोनों सुपारी किलर्स पर पहले से ही मारपीट के मामले दर्ज हैं। यह तथ्य इस बात को दर्शाता है कि वे पहले भी आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
अंकित यादव का गांव से पारिवारिक संबंध था, जिसके चलते उसका सुखरानी के घर आना-जाना था और वहीं से यह साजिश शुरू हुई।
अविश्वास और रिश्तों का टूटना
पूछताछ के दौरान सुखरानी ने यह भी दावा किया कि उसके पति के किसी अन्य महिला से संबंध थे। वहीं पति उस पर चरित्र को लेकर आरोप लगाता था।
इस आपसी अविश्वास और तनाव ने रिश्ते को पूरी तरह खत्म कर दिया और अंततः यह हत्या की वजह बना।
मासूम की जिंदगी पर असर
इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा प्रभावित एक मासूम बच्चा हुआ है। सुखरानी का दो साल का बेटा अब अपनी मां के साथ जेल में रह रहा है।
परिवार के किसी भी सदस्य ने उसे अपने पास रखने की जिम्मेदारी नहीं ली, जिसके चलते वह भी इस अपराध की सजा झेलने को मजबूर है।
कानूनी कार्रवाई और आगे की जांच
पुलिस ने तीनों आरोपियों के खिलाफ हत्या, साजिश और साक्ष्य छिपाने जैसी धाराओं में मामला दर्ज किया है। उन्हें अदालत में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस साजिश में कोई और भी शामिल था या यह पूरी योजना केवल तीन लोगों तक ही सीमित थी।
निष्कर्ष: समाज के लिए चेतावनी
उन्नाव का यह मामला समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी है। घरेलू विवाद, हिंसा और अविश्वास यदि समय रहते नहीं सुलझाए जाएं, तो वे किसी भी हद तक जा सकते हैं।
यह घटना यह भी दर्शाती है कि तकनीकी साक्ष्य, जैसे कॉल डिटेल रिकॉर्ड, अपराध की गुत्थी सुलझाने में कितने महत्वपूर्ण होते हैं।
अंततः, यह हत्याकांड केवल एक अपराध नहीं, बल्कि टूटते रिश्तों और सामाजिक ताने-बाने की एक कड़वी सच्चाई है, जिससे सीख लेकर ही भविष्य में ऐसे मामलों को रोका जा सकता है।



